नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। हर बार की तरह इस बार भी साल के इस हिस्से में महंगाई भत्ते यानी डीए में बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस पर कोई अधिकारिक मुहर नहीं लग पाई है। इस देरी के बाद से कर्मचारियों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्या इस बार डीए का भुगतान सीधे दिवाली के आसपास किया जाएगा या फिर इसके लिए थोड़ा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
सरकारी कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठनों में से एक एआईडीईएफ ने सरकार को पत्र लिखकर जल्द से जल्द डीए बढ़ाने की मांग की है। संगठन का यह भी कहना है कि सरकार को केवल डीए ही नहीं बल्कि बोनस की सीमा को भी बढ़ाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक कर्मचारियों को इसका सीधा फायदा मिल सके। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों का तर्क है कि उनके रोजमर्रा के खर्च बढ़ गए हैं। ऐसे में सरकार की तरफ से मिलने वाली यह राहत उनके लिए बहुत जरूरी है ताकि वे त्योहारी सीजन को अच्छे से मना सकें।
कैबिनेट बैठक के बाद क्यों बढ़ा कर्मचारियों का इंतजार
सामान्य तौर पर केंद्र सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई के महीने से डीए में संशोधन करती है। हालांकि इसके आधिकारिक ऐलान में अक्सर कुछ हफ्तों या महीनों की देरी हो जाती है। इस बार भी जुलाई से लागू होने वाले डीए को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से कई तरह की तारीखें सामने आ रही थीं। लेकिन कैबिनेट की आखिरी बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा न होने से कर्मचारियों को थोड़ा झटका जरूर लगा है। अब सबकी निगाहें आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों पर टिकी हैं जहां इस पर मुहर लग सकती है।
कर्मचारी यूनियनों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को ऐन मौके पर सार्वजनिक कर सकती है। ऐसा अक्सर देखा गया है कि सरकार दिवाली या दशहरा जैसे बड़े त्योहारों के आसपास कर्मचारियों को तोहफे के रूप में डीए बढ़ोतरी का ऐलान करती है। इससे बाजार में भी नकदी का प्रवाह बढ़ता है और त्योहारी खरीदारी को बढ़ावा मिलता है। यही वजह है कि इस बार भी यह माना जा रहा है कि फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर भले ही अभी न हुए हों, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारी पूरी है।
दशहरे के बाद और दिवाली से पहले मिल सकती है खुशखबरी
वित्तीय जानकारों का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारियों को निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि डीए बढ़ना एक तय प्रक्रिया है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर यह बढ़ोतरी तय होती है और इस बार भी इसमें तीन से चार प्रतिशत तक की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। यदि ऐसा होता है तो मूल वेतन के आधार पर हर महीने मिलने वाली राशि में अच्छा खासा इजाफा देखने को मिलेगा। साथ ही एरियर का भुगतान भी एकमुश्त मिलने की उम्मीद है जिससे बैंक खाते में अच्छी खासी रकम आएगी।
आम कर्मचारियों से जब हमने बात की तो उनका साफ कहना था कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। पेट्रोल, डीजल से लेकर रसोई गैस और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, ऐसे में डीए की बढ़ी हुई किस्त ही एकमात्र सहारा होती है। कर्मचारी अब केवल यही उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार बिना किसी और देरी के दशहरे के तुरंत बाद इस बहुप्रतीक्षित फैसले की घोषणा कर दे ताकि वे अपनी दिवाली की प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकें।
डीए से जुड़ी अन्य जरूरी बातें जो हर कर्मचारी को पता होनी चाहिए
केंद्रीय कर्मचारियों को यह भी समझना जरूरी है कि महंगाई भत्ता उनकी बेसिक सैलरी का एक निश्चित हिस्सा होता है। यह पैसा सीधे तौर पर महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है ताकि कर्मचारियों की जीवनशैली पर नकारात्मक असर न पड़े। इसके अलावा पेंशनभोगियों को भी इसी फॉर्मूले के तहत डीआर यानी महंगाई राहत का फायदा मिलता है। जैसे ही सरकार कैबिनेट बैठक में इस पर आधिकारिक मुहर लगाएगी, वित्त मंत्रालय की तरफ से इसका विस्तृत आदेश जारी कर दिया जाएगा।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि मामला पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन है और इस पर जल्द ही सकारात्मक फैसला आने की पूरी संभावना है। कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। हमारा यह न्यूज पोर्टल आगे भी इस मुद्दे पर पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा ताकि आपको हर सटीक जानकारी समय पर मिलती रहे।










