नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने भारतीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पिछले कुछ महीनों से लगातार राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय चल रहे चिराग पासवान ने अब साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। हाल ही में उन्होंने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और पंजाब के राजनीतिक मैदान में भी उतरेगी। इस घोषणा के बाद से दोनों राज्यों के राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। चिराग पासवान की यह रणनीति एनडीए गठबंधन के भीतर उनके बढ़ते कद और उनकी महत्वाकांक्षाओं को साफ तौर पर दिखाती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच उनके दिवंगत पिता और दिग्गज दलित नेता रामविलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने की सियासत भी तेज हो गई है। हाल ही में रामविलास पासवान की जयंती को आधिकारिक रूप से राजकीय समारोह का दर्जा दिया गया है। इस सम्मान के मिलने के बाद चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का खुले दिल से धन्यवाद किया है। इसे राजनीतिक रूप से एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इससे पासवान परिवार और उनकी पार्टी का जनाधार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। चिराग लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि वे अपने पिता के विचारों और उनके संघर्षों को देश के हर कोने तक लेकर जाएंगे।
उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनावी जमीन तलाशने की तैयारी
बिहार से बाहर निकलकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की इस कड़ी में चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश और पंजाब को चुना है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इन दोनों राज्यों में दलित और पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा वोटर बेस मौजूद है जिसे साधने के लिए एलजेपी (रामविलास) अपनी रणनीति तैयार कर रही है। हालांकि इन राज्यों में पहले से ही कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन चिराग का युवा चेहरा और आक्रामक तेवर युवाओं को अपनी ओर खींच सकता है। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभी से जमीन स्तर पर संगठन को मजबूत करना शुरू करें ताकि आगामी चुनावों में पार्टी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सके।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों की गतिविधियों पर भी चिराग पासवान पैनी नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और राम मंदिर जाने के सवाल पर भी चिराग ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को धार्मिक स्थलों पर जाने और पूजा करने का पूरा अधिकार है। इस तरह के बयानों के जरिए चिराग एक संतुलित और परिपक्व राजनेता की छवि पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जो किसी भी मुद्दे पर सीधा और स्पष्ट रुख रखने से नहीं कतराते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह संतुलित रवैया उन्हें आने वाले समय में एक भरोसेमंद राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित कर सकता है।
बिहार में मुख्यमंत्री पद के दावे को लेकर कार्यकर्ताओं का उत्साह
एक तरफ जहां राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के विस्तार की योजनाएं बन रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह चरम पर है। हाल ही में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के मौके पर शिवहर जिले में एक विशाल संकल्प सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा के दौरान स्थानीय जिला अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं ने खुलकर मांग उठाई कि उनका मुख्य लक्ष्य भविष्य में चिराग पासवान को बिहार का मुख्यमंत्री बनाना है। हालांकि चिराग खुद अभी केंद्र की राजनीति में मोदी सरकार में मंत्री हैं और अपने संसदीय क्षेत्र तथा राष्ट्रीय एजेंडे पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन उनके समर्थकों की यह महत्वाकांक्षा बिहार की भावी राजनीति का एक नया संकेत जरूर दे रही है।
जमीनी स्तर पर मिल रहे इस समर्थन से यह साफ हो गया है कि चिराग पासवान की लोकप्रियता में लगातार इजाफा हो रहा है। रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी में हुई टूट के दौर से बाहर निकलकर चिराग ने जिस तरह से फिर से पार्टी को खड़ा किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने साबित कर दिया है कि वे केवल विरासत के वारिस नहीं बल्कि खुद एक मजबूत जननेता बनने की क्षमता रखते हैं। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश और पंजाब के दौरे उनके इस राजनीतिक सफर की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगी और आगे की हर बड़ी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।





