नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सियासत में इन दिनों गहमागहमी का माहौल पूरी तरह गर्म है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बार फिर विपक्ष के नेताओं को आड़े हाथों लिया है और उन्हें सीधे तौर पर अराजक करार दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी और उसके नेताओं को आम जनता की परेशानियों से कोई मतलब नहीं है। उन्हें केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चिंता सता रही है। जेएनयू परिसरों में हाल ही में छात्राओं के साथ हुई बदसलूकी के मामले पर बोलते हुए सीएम रेखा गुप्ता ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के मुंह पर ताला क्यों लग जाता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सिर्फ राजनीतिक हमलों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने प्रशासनिक मोर्चे पर भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। हाल ही में उन्होंने मुखर्जी नगर इलाके का औचक दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों की समस्याएं बहुत ध्यान से सुनीं। छात्रों के रहने, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद सभी बड़े अधिकारियों को त्वरित समाधान के कड़े निर्देश दिए। सीएम ने स्पष्ट किया कि छात्रों का भविष्य सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन अब इन निर्देशों के बाद लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहा है और छात्र भी इस पहल से राहत महसूस कर रहे हैं।
विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर कड़े सवाल
राजनीतिक बयानों के इस दौर में मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हालिया प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए पूछा कि जब ऐसे मामले सामने आते हैं तो मानवाधिकार संगठन और सीजेपी जैसी संस्थाएं कहां छिप जाती हैं। सीएम ने विपक्ष के इस दोहरे रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है। मुख्यमंत्री के इन तीखे तेवरों ने राजधानी की राजनीतिक सरगर्मी को और अधिक बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की खुलकर तारीफ की। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से स्पष्ट किया कि दिल्ली के चहुंमुखी विकास में केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। बुनियादी ढांचे से लेकर जन कल्याणकारी योजनाओं तक, हर क्षेत्र में केंद्र की तरफ से अपेक्षित मदद मिलने के कारण राजधानी में काम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके लिए उन्होंने देश के प्रधानमंत्री का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच तालमेल को लेकर अक्सर बयानबाजी होती रहती है।
मुखर्जी नगर के छात्रों को मिला सीधा प्रशासनिक आश्वासन
राजधानी के कोचिंग हब मुखर्जी नगर में छात्रों की समस्याएं लंबे समय से चर्चा का विषय बनी हुई थीं। महंगे कमरे, सुरक्षा की कमी और लाइब्रेरी की समस्याओं से जूझ रहे छात्रों से मिलने खुद मुख्यमंत्री पहुंची थीं। उन्होंने न सिर्फ छात्रों का दर्द सुना बल्कि मौके पर ही दिल्ली पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को तलब किया। सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि छात्रों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री के इस जमीनी दौरे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और अधिकारी अब धरातल पर काम करते नजर आ रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह आक्रामक राजनीतिक रुख और प्रशासनिक सक्रियता जनता के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। एक तरफ जहां वह विपक्ष के हर हमले का जवाब आक्रामकता से दे रही हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता के बीच जाकर समस्याओं के समाधान का भरोसा भी दिला रही हैं। आने वाले हफ्तों में दिल्ली की राजनीति का यह नया तेवर क्या रंग लाता है, यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर फाइलों से निकलकर काम जमीन पर उतरता हुआ साफ दिखाई दे रहा है।










