नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर अचानक अफरातफरी मच गई। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ता वहां जमा हो गए। वे पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। छात्रों का यह समूह सड़क पर ही धरने पर बैठ गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चुनाव आयोग निष्पक्ष काम नहीं कर रहा है। वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। मौके पर पहले से तैनात पुलिस बल ने हालात संभालने की कोशिश की। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटने की चेतावनी दी। जब छात्र नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग करना शुरू किया। जवानों ने एक-एक करके कार्यकर्ताओं को खींचकर बसों में भरा। कई छात्र सड़क पर ही लेट गए और पुलिस की गाड़ियों को रोकने लगे। इस दौरान संसद मार्ग पर लंबा जाम लग गया। गाड़ियां जहां की तहां खड़ी रह गईं। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया। इलाके में चारों तरफ लोहे के बैरिकेड्स लगा दिए गए।
प्रेस क्लब से थाने तक छात्रों का मार्च
यह पूरा प्रदर्शन पहले प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के पास शुरू हुआ था। वहां छात्र संगठनों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रेस वार्ता रखी थी। इसके बाद छात्रों ने संसद की ओर मार्च निकालने का फैसला किया। लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। वे संसद मार्ग थाने के ठीक सामने जमा हो गए। वहां उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। छात्रों का आरोप है कि लोकतंत्र में आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं और महिला पुलिसकर्मियों के बीच भी धक्का-मुक्की हुई। कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस की बस की छत पर चढ़ने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने तुरंत स्थिति को काबू में कर लिया। हिरासत में लिए गए छात्रों को शहर के अलग-अलग थानों में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि नई दिल्ली जिले में धारा 144 लागू है। यहां बिना अनुमति किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन की इजाजत नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष के बड़े नेताओं की हिरासत पर भड़का गुस्सा
इस पूरे मामले की जड़ें पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हैं। हाल ही में विपक्षी सांसदों ने भी चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकाला था। उस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में सभी सांसदों को किंग्सवे कैंप थाने से छोड़ दिया गया। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस केवल सरकार के इशारे पर काम कर रही है। विपक्ष के नेताओं को जनता से मिलने और सवाल पूछने से रोका जा रहा है।
छात्र नेताओं ने दावा किया कि उनके कई साथियों को बिना वजह नोटिस थमाए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर भी पुलिस झूठे केस दर्ज कर रही है। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि सरकारी काम में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सड़क घेर ली थी, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही थी। इसलिए पुलिस को उन्हें वहां से जबरन हटाना पड़ा।
सड़क पर लगा भारी जाम और सुरक्षा कड़ी
संसद मार्ग पर हंगामे के चलते लुटियंस दिल्ली में ट्रैफिक बुरी तरह चरमरा गया। कनाट प्लेस और पटेल चौक की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दफ्तरों से घर लौट रहे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक पुलिस को कई रास्तों पर रूट डायवर्ट करना पड़ा। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद सड़क पर खड़े होकर ट्रैफिक सामान्य कराने में जुटे रहे। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सड़क से प्रदर्शनकारियों को हटाया जा सका।
संसद मार्ग थाने और आसपास के इलाकों में अब भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। अर्धसैनिक बलों की दो अतिरिक्त कंपनियां तैनात कर दी गई हैं। खुफिया एजेंसियां भी सोशल मीडिया और छात्र संगठनों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। एनएसयूआई ने एलान किया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने आने वाले दिनों में देश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी प्रदर्शन की चेतावनी दी है। दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है ताकि दोबारा भीड़ न जुट सके।








