नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी में भारत को स्थायी सीट दिलाने की मांग एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। भारत सरकार और देश के तमाम कूटनीतिक विशेषज्ञ लंबे समय से यह बात कहते आए हैं कि साल 1945 में बनी इस संस्था में आज की दुनिया की हकीकत नहीं दिखती है। भारत की दलील है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश और सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था को वैश्विक फैसले लेने वाली इस मुख्य टेबल पर स्थायी जगह मिलनी ही चाहिए। पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर भारत की तरफ से वैश्विक मंचों पर नए सिरे से आवाज उठाई गई है, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल काफी तेज हो गई है।
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की तरफ से भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रुख करने की खबर सामने आई है। शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि पड़ोसी देश ने भारत के खिलाफ कुछ मुद्दों को लेकर इस वैश्विक संस्था का दरवाजा खटखटाया है और वैश्विक दबाव बनाने की कोशिश की है। हालांकि भारतीय कूटनीति से जुड़े जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की इन हरकतों से भारत के बढ़ते वैश्विक कद और उसकी स्थायी सदस्यता की जायज मांग पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। भारत लगातार शांति, सुरक्षा और वैश्विक भलाई के मुद्दों पर काम कर रहा है, जिसे दुनिया के कई बड़े देश भी अब खुलकर समर्थन देने लगे हैं।
संयुक्त राष्ट्र में सुधार और बदलाव की सख्त जरूरत
भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ढांचा बहुत पुराना हो चुका है और अब इसमें बदलाव का समय आ गया है। साल 1945 में जब इस संस्था की नींव रखी गई थी, तब दुनिया के हालात बहुत अलग थे और आज की तारीख में वैश्विक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। वर्तमान समय में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के कई बड़े देशों को सुरक्षा परिषद में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे देश भी लंबे समय से इसके स्थायी सदस्य बनने की मांग मजबूती से रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अगर संयुक्त राष्ट्र को आने वाले समय में प्रासंगिक रहना है, तो उसे अपनी कार्यप्रणाली और सदस्य देशों की संख्या में जरूरी बदलाव करने ही होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत को यूएनएससी में स्थायी सीट मिल जाती है, तो देश की वैश्विक ताकत और कूटनीतिक रसूख में भारी इजाफा होगा। दुनिया के बड़े फैसलों में भारत की सीधी आवाज गूंजेगी और आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर भारत का पक्ष और ज्यादा मजबूती से रखा जा सकेगा। वर्तमान में ग़ाज़ा जैसे इलाकों में संघर्ष और टकराव के बढ़ते जोखिम को देखते हुए भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में भारत जैसी बड़ी लोकतांत्रिक ताकत का सुरक्षा परिषद में होना पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।
पाकिस्तान की चाल और भारत का कूटनीतिक जवाब
पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाकर मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिशों को कूटनीतिक जानकारों ने महज एक राजनीतिक शिगूफा बताया है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह साबित किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है और क्षेत्रीय शांति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पाकिस्तान की तरफ से बेवजह के मुद्दों को उठाने से वैश्विक समुदाय का ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब दुनिया के देश इस चाल को अच्छी तरह समझने लगे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि देश अपनी तय कूटनीतिक राह पर पूरी मजबूती से आगे बढ़ रहा है और किसी भी बाहरी दबाव में आने वाला नहीं है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों से बातचीत के मुताबिक, आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र में सुधारों को लेकर बहस और ज्यादा तेज होने की पूरी उम्मीद है। भारत के पक्ष में दुनिया के कई प्रभावशाली देशों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है, जिससे यूएनएससी में स्थायी सदस्यता का रास्ता धीरे-धीरे ही सही लेकिन साफ होता नजर आ रहा है। आम जनता और देश के युवाओं की नजरें भी इस बात पर टिकी हैं कि कब वह ऐतिहासिक दिन आएगा जब भारत आधिकारिक तौर पर दुनिया के इन सबसे ताकतवर देशों की कतार में स्थायी रूप से शामिल होगा।









