नई दिल्ली और तिरुवनंतपुरम/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में इन दिनों बीमा यानी इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़ी खबरें सबसे ज्यादा चर्चा में बनी हुई हैं। केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों ने जनता को लुभाने के लिए बड़े-बड़े चुनावी वादे करने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केरल की जनता के सामने हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन और पचास लाख रुपये तक का भारी-भरकम हेल्थ इंश्योरेंस देने का बड़ा ऐलान किया है। चुनावी मैदान में उतरी कांग्रेस पार्टी का यह दांव मुख्य रूप से महिला वोटर्स को अपने पाले में खींचने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
केरल की राजनीतिक जमीन पर इस समय मुफ्त बस सफर और आकर्षक बीमा योजनाओं के जरिए सियासी समीकरण साधने की होड़ सी मच गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के इस दौर में पचास लाख तक का स्वास्थ्य बीमा और नियमित पेंशन का वादा मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। राज्य की चुनावी हवा अब पूरी तरह से कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। कांग्रेस पार्टी को पूरी उम्मीद है कि महिला मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इन लोकलुभावन बीमा योजनाओं के बलबूते पर उनके पक्ष में मतदान करेगा।
नई दिल्ली में पशुधन बीमा पोर्टल का शुभारंभ
एक तरफ जहां चुनावी राज्यों में बीमा योजनाओं पर राजनीति गरमाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक स्तर पर भी देश के भीतर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में कल पशुधन बीमा पोर्टल को आधिकारिक रूप से लॉन्च किए जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सरकार के इस नए डिजिटल कदम से देश के करोड़ों पशुपालकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस पोर्टल के जरिए किसान और पशुपालक बहुत ही आसानी से अपने मवेशियों का बीमा करा सकेंगे और किसी भी आपदा या बीमारी की स्थिति में समय पर मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे।
पशुधन बीमा से जुड़ी यह डिजिटल पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। अक्सर यह देखा जाता था कि ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों को अपने मवेशियों का बीमा कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और कागजी कार्रवाई में महीनों निकल जाते थे। इस नए ऑनलाइन पोर्टल के आ जाने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी और किसानों को दलालों के चक्कर से भी मुक्ति मिल जाएगी। सरकार का यह प्रयास ग्रामीण भारत में वित्तीय सुरक्षा का दायरा बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगा।
एलआईसी बोर्ड में नए स्वतंत्र निदेशकों की एंट्री
सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी के कामकाज में भी बड़े प्रशासनिक फेरबदल की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में पांच नए स्वतंत्र निदेशकों को एलआईसी के बोर्ड में शामिल किया गया है, जिससे कंपनी के निर्णय लेने की प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी। इन अनुभवी पेशेवरों के आने से कंपनी की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बाजार में उसकी साख को और अधिक बल मिलने की पूरी संभावना है। शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से एलआईसी लगातार अपने बोर्ड और कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
दूसरी ओर, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई द्वारा प्रस्तावित नए वितरण नियमों को लेकर बीमा बाजार में अंदरखाने हलचल तेज हो गई है। आईआरडीएआई के इन नए प्रस्तावों से एलआईसी के पारंपरिक एजेंटों और ब्रोकर संगठनों के बीच थोड़ी नाराजगी और चिंता देखने को मिल रही है। एजेंट संघों का मानना है कि नए नियमों से उनके कामकाज और कमीशन के ढांचे पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि विनियामक संस्था का तर्क है कि ये सारे बदलाव ग्राहकों के हितों की रक्षा करने और बीमा बाजार को ज्यादा पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ही लाए जा रहे हैं।







