नई दिल्ली के तिहाड़ जेल से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हाल ही में हुए सीजेपी विरोध प्रदर्शन और उससे जुड़े मामलों के बाद जेल प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए सौरभ दास और आशुतोष रांका को अब तिहाड़ जेल के भीतर अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया है। जेल के अंदर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने और किसी भी तरह के आपसी विवाद से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस पूरी कार्रवाई पर जेल के वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जेल परिसर के भीतर पूरी तरह शांति बनी रहे।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल की बैरक नंबर चार में रखा गया है। वहीं दूसरी ओर, सौरव दास को बैरक नंबर दो में भेजा गया है। इन दोनों कैदियों की गतिविधियों पर सुरक्षा कर्मियों की पैनी नजर है। जेल नियमों के अनुसार दोनों को अलग रखने के पीछे प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस के साथ हुई झड़पों और प्रदर्शनों के बाद से इन दोनों के नाम काफी चर्चा में आए थे। इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों और जेल प्रशासन ने इनकी निगरानी और बढ़ा दी है ताकि अंदर किसी प्रकार की समस्या पैदा न हो।
तिहाड़ जेल के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और नई बैरक व्यवस्था
जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सौरभ दास और आशुतोष रांका को अलग रखने का फैसला उच्चाधिकारियों की बैठक के बाद लिया गया। तिहाड़ जेल में कई हाई-प्रोफाइल कैदी बंद रहते हैं, इसलिए सुरक्षा के मानक बहुत सख्त होते हैं। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन जोखिम नहीं उठाना चाहता है। दोनों को अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट करने से जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंदियों की सुरक्षा और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन करना उनकी पहली प्राथमिकता है, जिसके तहत यह प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कानूनी मोर्चे पर भी कुछ राहत भरी खबरें सामने आई हैं। प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों में शामिल अजिंक्य शिंदे को पांच हजार के मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। अदालत से जमानत मिलने के बाद उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर जाने की अनुमति मिल गई। हालांकि, सौरभ दास और आशुतोष रांका को अभी न्यायिक हिरासत के तहत जेल में ही रहना पड़ रहा है। उनके वकीलों की तरफ से आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है ताकि उन्हें भी जल्द से जल्द राहत दिलाई जा सके और जमानत के कागजात तैयार किए जा सकें।
दिल्ली पुलिस और एनएसयूआई प्रदर्शन का पूरा विवाद
यह पूरा मामला हाल ही में हुए उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है जिसने दिल्ली की सड़कों पर हड़कंप मचा दिया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और छात्र संगठन एनएसयूआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि पुलिस के साथ तीखी झड़प देखने को मिली थी। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कर्मियों के साथ बदसलूकी और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप लगे थे। इस हंगामे के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
राजधानी दिल्ली में हुए इस जोरदार प्रदर्शन के बाद से ही राजनीतिक गलियारों और छात्र संगठनों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्र संगठन और मानवाधिकार कार्यकर्ता पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। तिहाड़ जेल के बाहर और भीतर दोनों जगह सुरक्षा के लिहाज से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई और तेज होने की उम्मीद है, जहां दोनों पक्षों के वकील अपनी दलीलें रखेंगे।
कानूनी लड़ाई और आगे की रणनीति
तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि वे स्थिति पर पूरी तरह काबू पा चुके हैं और किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए तैयार हैं। जेल के भीतर कैदियों की काउंसलिंग और उनकी गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। दूसरी ओर, गिरफ्तार किए गए छात्रों और उनके समर्थकों के परिवार वाले कानूनी मदद जुटाने में लगे हैं। आने वाले हफ्तों में इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई और नए खुलासे होने की संभावना है, क्योंकि पुलिस इस आंदोलन के पीछे के मुख्य साजिशकर्ताओं और अन्य चेहरों की भी तलाश कर रही है।








