नई दिल्ली से हमारे विशेष ग्राउंड ब्यूरो के अनुसार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लेकर देश भर के किसानों में भारी उत्सुकता बनी हुई है। पिछले चौबीस घंटों में इंटरनेट पर इस योजना से जुड़े दस्तावेजों और बैंक खातों की स्थिति की जांच को लेकर सर्च में जबरदस्त उछाल आया है। ग्रामीण इलाकों के किसान अपने मोबाइल फोन और नजदीकी जन सेवा केंद्रों पर जाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनकी अगली किस्त कब जारी होगी। सरकार की ओर से इस योजना के तहत देश के पात्र किसानों को सालाना छह हजार रुपये की आर्थिक मदद सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि हर चार महीने पर दो-दो हजार रुपये की तीन बराबर किस्तों में दी जाती है। इस वित्तीय मदद से छोटे और सीमांत किसानों को खेती किसानी का खर्च उठाने में काफी आसानी होती है।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से कई इलाकों के किसानों को यह शिकायत मिल रही है कि उनके बैंक खाते में पैसे आने बंद हो गए हैं या फिर उनका स्टेटस पेंडिंग दिखा रहा है। हमारी टीम ने जब इस मामले की तह तक जाकर पड़ताल की तो पता चला कि इसके पीछे मुख्य वजह ई-केवाईसी का पूरा न होना और बैंक खाते का आधार से लिंक न होना है। सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि योजना का लाभ लेने के लिए हर किसान का बायोमेट्रिक सत्यापन और ई-केवाईसी कराना अनिवार्य है। जिन किसानों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उनके पैसे तकनीकी कारणों से रुक जाते हैं। इसके अलावा भूमि सत्यापन का काम भी कई राज्यों में चल रहा है, जिसके कारण कुछ मामलों में राशि भेजने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें समय रहते अपनी कमियों को दूर करना होगा।
घर बैठे ऐसे चेक करें लाभार्थी सूची में अपना नाम
अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपका नाम प्रधानमंत्री किसान योजना की नई लाभार्थी सूची में है या नहीं, तो आप इसे बहुत आसानी से खुद देख सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वेबसाइट के होम पेज पर आपको 'फार्मर कॉर्नर' का विकल्प दिखाई देगा, जिस पर आपको क्लिक करना है। इसके बाद वहां दिए गए 'लाभार्थी सूची' यानी बेनिफिशरी लिस्ट वाले ऑप्शन को चुनें। अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जिसमें आपको अपना राज्य, जिला, ब्लॉक, तहसील और गांव का नाम चुनना होगा। सारी जानकारी सही से भरने के बाद जब आप 'रिपोर्ट प्राप्त करें' पर क्लिक करेंगे, तो आपके पूरे गांव के पात्र किसानों की सूची स्क्रीन पर आ जाएगी। आप इस सूची में अपना नाम आसानी से खोज सकते हैं और यह देख सकते हैं कि सरकार ने आपका आवेदन स्वीकार कर लिया है या नहीं।
कई बार किसानों के सामने यह दिक्कत आती है कि उनका नाम तो सूची में होता है लेकिन पैसे उनके बैंक खाते में नहीं पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने पोर्टल पर ही 'बेनिफिशरी स्टेटस' जांचने की सुविधा भी दी है। इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद आपको अपना आधार नंबर या योजना से जुड़ा बैंक खाता संख्या दर्ज करनी होती है। कैप्चा कोड भरकर जैसे ही आप आगे बढ़ेंगे, आपके सामने आपकी किस्त का पूरा इतिहास खुल जाएगा। इसमें आपको यह पता चल जाएगा कि कौन सी किस्त किस तारीख को आपके खाते में भेजी गई है और यदि कोई किस्त रुकी है, तो उसके रुकने का कारण क्या है। यदि वहां आधार सीडिंग या बैंक खाते की समस्या दिखाई दे, तो आप तुरंत अपने बैंक में जाकर इसे ठीक करवा सकते हैं।
ई-केवाईसी और आधार सीडिंग न कराने पर क्या होगा?
कृषि विभाग के अधिकारियों से बातचीत के दौरान यह बात सामने आई है कि बहुत से किसानों ने योजना के नियमों के मुताबिक अपने दस्तावेज अपडेट नहीं किए हैं। सरकार ने बार-बार यह चेतावनी दी है कि बिना ई-केवाईसी के अगली किस्त का भुगतान किसी भी हालत में नहीं किया जाएगा। आप अपने मोबाइल फोन पर फेस ऑथेंटिकेशन ऐप के जरिए घर बैठे खुद भी ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अलावा आपके पास नजदीकी सीएससी यानी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर बॉयोमेट्रिक के जरिए ई-केवाईसी कराने का भी विकल्प खुला रहता है। जिन किसानों के बैंक खातों में आधार कार्ड लिंक नहीं है, उनके पैसे रास्ते में ही अटक जाते हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आप अपने बैंक में जाकर एनपीसीआई मैपिंग और आधार सीडिंग का काम तुरंत पूरा करवा लें।
देशभर के ग्रामीण इलाकों में हमारी फील्ड विजिट के दौरान यह देखने को मिला कि कई किसान तकनीकी जानकारी के अभाव में इन छोटी-छोटी कमियों को समय पर नहीं सुधार पाते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और कृषि मित्रों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे किसानों को जागरूक करें। प्रधानमंत्री किसान योजना देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए एक बड़ा सहारा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि आपको पोर्टल पर कोई भी तकनीकी दिक्कत आ रही है, तो आप योजना के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हमारी फ्रीलान्स टीम इस पूरे मामले पर आगे भी नजर बनाए रखेगी और किसानों से जुड़ी हर नई जानकारी आप तक पहुंचाती रहेगी।











