कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ मुखर हुईं अभिनेत्री पूनम पांडे
देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों राजनीतिक गलियारों से लेकर सड़कों तक हलचल काफी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बयानों और आंदोलनों को लेकर विवादों का सिलसिला लगातार गहराता जा रहा है। एक समय ऐसा भी था जब इसी पार्टी के समर्थन में कई नामचीन चेहरे खड़े नजर आते थे, लेकिन अब हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। जिन लोगों ने कुछ महीने पहले इस दल के विरोध प्रदर्शनों में खुलकर शिरकत की थी, वही अब इसके राजनीतिक एजेंडे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
हाल ही में एक ऐसा वाकया सामने आया है जिसने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। कुछ महीने पहले तक छात्रों के मुद्दों और नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाली जानी-मानी अभिनेत्री पूनम पांडे ने अब कॉकरोच जनता पार्टी के मौजूदा तेवरों पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका यह बदला हुआ रुख इस बात का गवाह है कि राजनीतिक दलों के तौर-तरीकों से अब वे लोग भी दूरी बनाने लगे हैं जो कभी उनके समर्थन में खड़े हुए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता तब तक ही कायम रहती है जब तक उसके मुद्दे जनहित से जुड़े हों। लेकिन जब विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सत्ता परिवर्तन और संवैधानिक पदों पर बैठे शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग बेबुनियाद तरीके से उठने लगती है, तो समाज का एक बड़ा वर्ग उससे किनारा करने लगता है। पूनम पांडे का यह बयान इसी दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जो यह बताता है कि जनता अब राजनीतिक ड्रामेबाजी को भली-भांति समझने लगी है।
नीट आंदोलन से लेकर मौजूदा बयानों तक का पूरा सफर
जून और जुलाई के महीनों में जब देश भर के युवा नीट पेपर लीक मामले को लेकर सड़कों पर उतर आए थे, तब दिल्ली का जंतर-मंतर इन विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गया था। उस दौरान छात्रों की आवाज बुलंद करने के लिए कई सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र नेता और फिल्मी दुनिया की हस्तियां भी वहां पहुंची थीं। विशेष तौर पर 18 जुलाई को जब सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाया गया था, तब जंतर-मंतर पर भारी भीड़ जमा हो गई थी।
उसी दौरान अभिनेत्री पूनम पांडे ने भी जंतर-मंतर का रुख किया था और छात्रों के पक्ष में अपनी बात रखी थी। उन्होंने सरकार से अपील की थी कि युवाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। हालांकि, समय बीतने के साथ ही इस पूरे आंदोलन की दिशा और दशा दोनों बदल चुकी हैं। अब कॉकरोच जनता पार्टी देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर अभियान चला रही है, जिसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
अपने हालिया बयानों में पूनम पांडे ने इन पुरानी यादों और मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए साफ कहा कि अब जो कुछ हो रहा है, उसका छात्रों के वास्तविक मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ इस तरह की बेतुकी मांगें उठाना और माहौल खराब करना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री और सीईसी के इस्तीफे की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा लगातार उठाए जा रहे प्रशासनिक और राजनीतिक विरोध के बीच पूनम पांडे ने कड़े शब्दों में आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर देश के प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग की जा रही है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में अपनी बात कहने के दायरे तय हैं, लेकिन जिस तरह से बिना किसी ठोस आधार के माहौल गरमाया जा रहा है, वह देश की छवि के लिए ठीक नहीं है।
"देश का मजाक ही तो उड़ाया जा रहा है। फिलहाल क्या हो रहा है, जिसका मन चाहे सीधा उठकर बोल देते हैं प्राइम मिनिस्टर इस्तीफा दो। ये क्या बात हो गई। मतलब वो तुम्हारे घर के कौन हैं, तुम्हारे पड़ोसी हैं क्या। वह देश के प्रधानमंत्री हैं। मतलब वो कौन हैं उनका नाम तो देखिए, ऐसे थोड़ी ना देश चलता है।" — पूनम पांडे, अभिनेत्री
पूनम पांडे ने विदेशी नागरिकों द्वारा भारतीय मामलों में दखल दिए जाने पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अभिनेता इमरान खान को देश छोड़ने के मिले नोटिस का हवाला देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति दूसरे देश का नागरिक है, तो उसे भारत के आंतरिक मामलों में बयानबाजी करने से बचना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश में पहले ही बहुत सारा राजनीतिक ड्रामा चल रहा है, जिसे और अधिक बढ़ावा देना देशहित में नहीं है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आंदोलन में शामिल होने वाले कई बच्चों और समर्थकों को खुद इस बात की स्पष्ट जानकारी नहीं होती कि वे आखिर किस उद्देश्य के लिए वहां बैठे हैं। बिना सोचे-समझे और बिना किसी ठोस उद्देश्य के सड़कों पर भीड़ जुटाना और देश की व्यवस्था को चुनौती देना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जिस पर रोक लगनी चाहिए।
कनॉट प्लेस में कार्यक्रम के दौरान हुआ कड़ा विरोध
सिर्फ बयानी जंग ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी कॉकरोच जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। हाल ही में जब पार्टी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' कार्यक्रम के तहत अपने समर्थकों को जुटाने की कोशिश की, तो वहां का माहौल पूरी तरह से अलग नजर आया। कार्यक्रम स्थल पर पार्टी के पहुंचने से पहले ही स्थानीय व्यापारी और आम नागरिक भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन के लिए उतर आए।
कनॉट प्लेस के कारोबारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली पुलिस के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। उनका साफ कहना था कि राष्ट्रीय राजधानी के व्यावसायिक केंद्रों में इस तरह के राजनीतिक ड्रामे और माहौल खराब करने वाले आयोजनों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विरोध इतना अधिक बढ़ गया था कि पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने पड़े।
हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सीजेपी के प्रमुख युवा नेताओं जैसे अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को कनॉट प्लेस पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले समर्थकों की संख्या बेहद कम रह गई। इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि आम जनता अब इस तरह की राजनीतिक गतिविधियों से किनारा कर रही है और शांति एवं विकास के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है।











