उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने की लंबी कानूनी और जमीनी लड़ाई
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन मृतका के माता-पिता का दर्द और न्याय की आस आज भी कम नहीं हुई है। इसी कड़ी में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता ने देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू किया। परिवार का साफ कहना है कि जब तक इस पूरे मामले से जुड़े उस 'वीआईपी' का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाता और मुख्य आरोपियों को कठोरतम सजा नहीं मिलती, तब तक उनकी यह लड़ाई थमेगी नहीं। देश की राजधानी में आयोजित इस धरने ने एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
घटनाक्रम के मुताबिक, पीड़ित परिवार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर बैठा था। परिवार का आरोप है कि राज्य स्तर पर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया और इसी कारण उन्हें मजबूरन दिल्ली आकर अपनी गुहार लगानी पड़ी। अंकिता के माता-पिता का यह संघर्ष केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि देश भर की बेटियों की सुरक्षा और न्याय से जुड़ा एक बड़ा प्रतीक बन चुका है। आम नागरिकों और सामाजिक संगठनों का भी इस मुहिम को लगातार समर्थन मिल रहा है।
तड़के चार बजे पुलिस कार्रवाई: हिरासत में लिए गए पीड़ित माता-पिता
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे इस प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से सख्त रुख देखने को मिला। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर सुबह करीब चार बजे पुलिस पहुंची और सुरक्षा व्यवस्था एवं नियमों का हवाला देते हुए अंकिता भंडारी के माता-पिता और उनके साथ मौजूद समर्थकों को हिरासत में ले लिया। अहले सुबह हुई इस अचानक कार्रवाई से मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समर्थकों ने इस कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने सभी को गाड़ियों में बैठाकर थाने ले जाने की प्रक्रिया पूरी की।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर बिना पूर्व अनुमति के धरना देने और रात में वहां रुकने के नियमों के उल्लंघन के चलते यह कदम उठाया गया। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में भी सवाल उठने लगे हैं। आधी रात के बाद या भोर के समय बुजुर्ग माता-पिता के साथ इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई ने एक बार फिर व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का कहना है कि वे अपनी बेटी के लिए न्याय मांगने आए थे, न कि कोई कानून तोड़ने।
दो घंटे बाद रिहाई और वीआईपी नाम के खुलासे की मांग पर अड़ा परिवार
हिरासत में लिए जाने के करीब दो घंटे बाद पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और उनके समर्थकों को रिहा कर दिया। थाने से बाहर आने के बाद भी परिवार के तेवर में कोई नरमी नहीं आई। उन्होंने मीडिया से बातचीत में दो टूक कहा कि सरकार और प्रशासन चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। माता-पिता का मुख्य आरोप है कि इस पूरे कांड में एक रसूखदार 'वीआईपी' शामिल था, जिसका नाम अब तक आधिकारिक जांच से बाहर रखा गया है। परिवार की मांग है कि उस वीआईपी का न केवल नाम उजागर हो, बल्कि उससे भी गहन पूछताछ की जाए।
"हम अपनी बेटी के लिए पिछले लंबे समय से दर-दर भटक रहे हैं। हमें न्याय चाहिए और उस असली चेहरे का सामने आना जरूरी है जिसने हमारी बेटी की जान ली। पुलिस हमें कितनी भी बार हिरासत में ले, हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।" — अंकिता भंडारी के माता-पिता
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों और विभिन्न महिला संगठनों ने भी दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की है और पीड़ित परिवार को समर्थन देने का ऐलान किया है।
मामले की पृष्ठभूमि और न्याय की आस में भटकता परिवार
गौरतलब है कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास स्थित एक रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता भंडारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे राज्य में भारी जनआक्रोश देखने को मिला था। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी और रिजॉर्ट संचालक समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल जेल में हैं। हालांकि, शुरुआत से ही यह आरोप लगता रहा है कि मामले से जुड़े कई अहम सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई और असली गुनाहगारों को बचाया जा रहा है।
निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय और अब सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला विभिन्न चरणों से गुजर रहा है। परिवार और उनके वकील लगातार यह दलील देते आ रहे हैं कि जब तक मामले की निष्पक्ष और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई जाती, तब तक सच पूरी तरह सामने नहीं आ सकेगा। दिल्ली में दिया गया यह धरना उसी लंबी और दर्दनाक लड़ाई का एक नया अध्याय है, जो यह साबित करता है कि एक बेटी के माता-पिता का हौसला आज भी टूटा नहीं है।












