क्या अब भी परेशान कर रही है गंध न आने की समस्या?
साल 2020 से 2023 के बीच दुनियाभर में कोरोना महामारी ने जो तबाही मचाई, उससे शायद ही कोई अछूता रहा हो। कोरोनावायरस यानी सार्स-सीओवी-2 उस समय इंसानों के लिए पूरी तरह नया था। न तो इस बीमारी से निपटने के लिए हमारे पास कोई पुख्ता दवा थी और न ही उस वक्त तक वैक्सीन की खोज हो पाई थी। यही वजह थी कि महामारी की पहली और दूसरी लहर ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और लाखों लोगों को अपनी चपेट में लिया। कोरोना के इस दौर में संक्रमित मरीजों में कई तरह के नए और अजीबोगरीब लक्षण देखने को मिले, जिनमें सर्दी-जुकाम और बुखार के साथ-साथ स्वाद और गंध का गायब हो जाना सबसे आम था। इसे डॉक्टरों ने कोरोना वायरस का एक प्रमुख न्यूरोलॉजिकल और रेस्पिरेटरी साइड-इफेक्ट माना था।
लेकिन महामारी का दौर थमने के बाद भी एक बड़ा सवाल आम लोगों के मन में बना हुआ है। आज भी कई ऐसे लोग हैं जो यह शिकायत करते हैं कि उन्हें किसी भी चीज की गंध ठीक से महसूस नहीं होती है। चूंकि कोरोना काल के दौरान गंध न आने की समस्या यानी 'एनोस्मिया' (Anosmia) चर्चा के केंद्र में रही थी, इसलिए आज भी जब किसी को यह दिक्कत होती है, तो वे सीधे तौर पर इसकी सुई कोरोना की तरफ घुमा देते हैं। लोगों के मन में यह डर बैठ गया है कि क्या उन्हें दोबारा कोविड हो गया है या फिर पुराने संक्रमण का असर अब तक उनके शरीर पर बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानते हैं। उनका साफ कहना है कि गंध महसूस न होने के पीछे केवल कोरोना ही एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि इसके कई अन्य शारीरिक और चिकित्सीय कारण भी हो सकते हैं।
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गंध गायब होने के पीछे छिपे हैं कई अन्य चिकित्सीय कारण
कान, नाक और गले (ENT) के विशेषज्ञ और सामान्य स्वास्थ्य चिकित्सक बताते हैं कि नाक के जरिए गंध महसूस करने की हमारी क्षमता कई अलग-अलग कारकों पर निर्भर करती है। जब नाक के अंदरूनी मार्ग में किसी प्रकार की सूजन आ जाती है या तंत्रिका तंत्रिकाएं प्रभावित होती हैं, तो गंध का अहसास होना बंद या कम हो जाता है। सर्दी-जुकाम, फ्लू, मौसमी एलर्जी और साइनस का गंभीर संक्रमण इसके सबसे आम कारणों में गिने जाते हैं। इसके अलावा, कई लोगों की नाक के भीतर 'पॉलीप' यानी मांस जैसी एक बढ़ी हुई अतिरिक्त संरचना विकसित हो जाती है, जो हवा के रास्ते को ब्लॉक कर देती है। इस रुकावट के कारण गंध सूंघने वाली नसों तक नहीं पहुंच पाती है और व्यक्ति एनोस्मिया का शिकार हो जाता है।
केवल संक्रमण ही नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और अन्य मेडिकल स्थितियां भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। अत्यधिक धूम्रपान करने वाले लोगों में सूंघने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसके साथ ही, सिर पर कभी लगी गंभीर चोट, ब्रेन इंजरी या कुछ विशेष प्रकार की दवाइयों का लंबे समय तक सेवन भी इस समस्या को बुलावा दे सकता है। कई बार न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी इसका कारण बनती हैं। इसलिए, अगर आपको लंबे समय से गंध महसूस नहीं हो रही है, तो बिना डरे किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और इसके असल कारणों का पता लगाना चाहिए ताकि सही समय पर सही इलाज शुरू किया जा सके।
"यह समझना बेहद जरूरी है कि गंध न आने की समस्या हर बार कोविड-19 का ही परिणाम हो न हो। साइनस, पुरानी एलर्जी, या नाक के भीतर किसी तरह की रुकावट भी इसके पीछे एक बड़ा कारण हो सकती है। सही निदान के बाद ही इसका उचित उपचार संभव है।" — डॉ. आर. के. शर्मा, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ
सिर्फ गंध ही नहीं, खाने के स्वाद पर भी पड़ता है गहरा असर
आम तौर पर लोग इस बात को लेकर भ्रम में रहते हैं कि उनकी जीभ ने काम करना बंद कर दिया है या उनका स्वाद चला गया है। लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग होती है। कई मामलों में जांच के दौरान यह सामने आया है कि मरीज की जीभ पूरी तरह स्वस्थ होती है और वह मीठे, नमकीन, खट्टे और कड़वे स्वादों को पहचानने में सक्षम होती है, असली दिक्कत गंध की क्षमता कम होने की वजह से होती है। विज्ञान और मेडिकल साइंस के अनुसार, हमारे खाने के स्वाद का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हमारी गंध की क्षमता पर निर्भर करता है। जब हम कोई चीज खाते हैं, तो उससे उठने वाली खुशबू या महक हमारी नाक के पिछले हिस्से से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंचती है, जिससे हमें उस भोजन का असली और लजीज स्वाद महसूस होता है।
जब आप एनोस्मिया से पीड़ित होते हैं और आपको भोजन की महक नहीं आती है, तो आपका पसंदीदा खाना भी अचानक एकदम फीका, बेस्वाद और मिट्टी जैसा लगने लगता है। लोग अक्सर रसोई घर में जाकर मसालेदार और स्वादिष्ट खाना बनाते हैं, लेकिन मुंह में डालते ही उन्हें निराशा हाथ लगती है। उन्हें लगता है कि शायद खाने में नमक या मसालों की कमी है, जबकि कमी उनके शरीर के भीतर सूंघने की शक्ति में आ चुकी होती है। स्वाद और गंध का यह चोली-दामन का साथ लोगों के खान-पान के शौक और भूख पर भी असर डालता है, जिससे कई बार लोग कुपोषण या कमजोरी का शिकार भी होने लगते हैं क्योंकि उन्हें खाने में कोई रुचि नहीं रह जाती है।
रोजमर्रा की जिंदगी में कितना बड़ा खतरा बन सकता है एनोस्मिया?
बहुत से लोग गंध न आने की समस्या को एक मामूली बात मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह स्थिति हमारी जिंदगी के लिए एक बड़ा और छिपा हुआ खतरा साबित हो सकती है। हमारी गंध की क्षमता केवल खाने का आनंद लेने के लिए नहीं बनी है, बल्कि यह प्रकृति द्वारा हमें दी गई एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली (Natural Defense System) है। सोचिए, अगर आपके घर में रसोई गैस लीक हो रही है और आपको उसकी महक ही न आए, तो क्या होगा? गैस पूरे कमरे में फैल जाएगी और एक छोटी सी चिंगारी या माचिस की तीली जलने से बड़ा धमाका या भयानक आग लग सकती है। इसी तरह, सड़ी हुई और खराब चीजें खाने से रोकने में भी गंध हमारी मदद करती है।
इसके अलावा, कहीं आग लगने पर धुआं उठना, किसी हानिकारक रसायन या केमिकल का लीक होना, या कोई जहरीली गैस का रिसाव होना—इन तमाम आपातकालीन स्थितियों में हमारी नाक सबसे पहले हमें सचेत करती है। लेकिन जो लोग एनोस्मिया से पीड़ित होते हैं, वे इन तमाम तरह के खतरों की गंध को महसूस करने में असमर्थ रहते हैं। वे समय रहते आग, गैस लीक या खराब भोजन की पहचान नहीं कर पाते, जिससे उनके जीवन पर हमेशा एक बड़ा जोखिम मंडराता रहता है। इसलिए इस समस्या को केवल स्वादहीनता तक सीमित न मानकर, इसे एक गंभीर स्वास्थ्य संकेत के रूप में देखना चाहिए और समय रहते इसके निवारण के उपाय करने चाहिए।
निष्कर्ष और एहतियात
अंत में यही कहा जा सकता है कि एनोस्मिया यानी गंध का अहसास न होना केवल कोरोना का कोई साधारण अवशेष मात्र नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर चल रही किसी अन्य अंदरूनी परेशानी का संकेत भी हो सकता है। यदि आप या आपका कोई जानने वाला लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहा है, तो इसे नजरअंदाज करने की भूल बिल्कुल न करें। तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक या ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें ताकि वे नाक के अंदरूनी हिस्सों की जांच करके सही कारण का पता लगा सकें। समय पर की गई जांच और उचित इलाज न केवल आपकी सूंघने की क्षमता को वापस ला सकता है, बल्कि आपको भविष्य में होने वाले कई बड़े खतरों और दुर्घटनाओं से भी सुरक्षित रख सकता है।





