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सावधान! 5 दिन लगातार बंद रह सकते हैं बैंक: 28 से हड़ताल, जानिए एटीएम, यूपीआई और ईएमआई पर असर

देशभर में बैंक कर्मचारियों ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे पहले शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के कारण ग्राहकों को लगातार पांच दिनों तक बैंकिंग कामकाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
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23 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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सावधान! 5 दिन लगातार बंद रह सकते हैं बैंक: 28 से हड़ताल, जानिए एटीएम, यूपीआई और ईएमआई पर असर
📷 सावधान! 5 दिन लगातार बंद रह सकते हैं बैंक: 28 से हड़ताल, जानिए एटीएम, यूपीआई और ईएमआई पर असर — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल बुलाई है।
  • हड़ताल से पहले 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी होने से बैंक कुल पांच दिन प्रभावित रह सकते हैं।
  • एसबीआई और उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को जरूरी लेन-देन समय से पहले निपटाने की सलाह दी है।
  • डिजिटल सेवाएं जैसे एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और नेट बैंकिंग पूरी तरह चालू रहने की उम्मीद है।

देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर का आखिरी सप्ताह काफी व्यस्त और चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। यदि आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम अटका हुआ है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाने की जरूरत है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने महीने के आखिर में तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल का प्रस्ताव रखा है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस हड़ताल का सीधा असर आपकी जेब, लोन की ईएमआई, कैश निकासी और अन्य वित्तीय लेनदेन पर पड़ सकता है।

28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU), जो देश के बैंकिंग सेक्टर के लगभग 90 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, उसने 28 से 30 सितंबर तक लगातार तीन दिनों तक हड़ताल पर रहने का फैसला किया है। संगठन का कहना है कि उनकी कई ऐसी मांगें लंबे समय से लंबित हैं जिन पर सरकार और प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। इस तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान देश भर में सरकारी और कई अन्य बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहने की पूरी आशंका है।

हड़ताल के ऐलान के बाद से ही बैंकिंग सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। बैंकों के ग्राहकों को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए वित्तीय संस्थान अभी से ही एहतियाती कदम उठाने लगे हैं। बैंक शाखाओं के भीतर होने वाले तमाम वित्तीय कार्य, जैसे कि चेक क्लीयरेंस, कैश जमा करना या निकालना, नए खाते खुलवाना और केवाईसी अपडेट कराने जैसे काम इस दौरान बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।

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लगातार पांच दिनों तक बैंक बंद रहने का संकट

इस बैंक हड़ताल की टाइमिंग ने ग्राहकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। प्रस्तावित हड़ताल 28 सितंबर से शुरू हो रही है, जबकि इससे ठीक पहले 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। इसके चलते कई राज्यों में बैंक लगातार पांच दिनों तक बंद जैसी स्थिति का सामना कर सकते हैं। शुक्रवार, 25 सितंबर तक ही बैंक शाखाएं खुलेंगी, जिसके बाद ग्राहकों को सीधा अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही राहत मिलने की उम्मीद बचेगी।

जानकारों का मानना है कि यदि आपको बैंक जाकर कोई महत्वपूर्ण कागजी कार्रवाई पूरी करनी है, तो आपके पास केवल 25 सितंबर तक का ही समय है। आखिरी समय की भगदड़ से बचने के लिए ग्राहकों को अभी से अपनी वित्तीय प्लानिंग कर लेनी चाहिए। खासकर जिन लोगों को बैंक कर्मचारियों की भौतिक मदद की आवश्यकता होती है, उन्हें अपने जरूरी काम प्राथमिकता के आधार पर निपटा लेने चाहिए ताकि किसी प्रकार के आर्थिक नुकसान या विलंब से बचा जा सके।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने जारी की एडवाइजरी

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित कई अन्य बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है। एसबीआई ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपनी बैंकिंग से जुड़ी जरूरी जरूरतें हड़ताल शुरू होने से पहले ही पूरी कर लें। हालांकि, बैंक की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि वे हरसंभव प्रयास करेंगे कि ग्राहकों को न्यूनतम असुविधा हो, लेकिन शाखाओं में कामकाज का सुचारू रूप से चलना कर्मचारियों की हड़ताल में भागीदारी पर पूरी तरह निर्भर करेगा।

उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (UPGB) जैसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने भी अपने खाताधारकों को एसएमएस और मोबाइल संदेशों के जरिए सतर्क करना शुरू कर दिया है। संदेश में साफ कहा गया है कि ग्राहक हड़ताल की अवधि से पहले ही अपने सभी आवश्यक लेन-देन पूरे कर लें। बैंक ने यह भी आश्वस्त किया है कि इस दौरान डिजिटल और वैकल्पिक माध्यम पूरी क्षमता से काम करते रहेंगे ताकि ग्राहकों को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े।

"प्रिय ग्राहक, प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। कृपया आवश्यक लेन-देन हड़ताल से पूर्व कर लें। बैंक की एटीएम, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध रहेंगी।" — उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक (UPGB) प्रबंधन

डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई का सहारा, लेकिन रखना होगा खास ध्यान

राहत की बात यह है कि बैंक शाखाएं भले ही बंद रहें, लेकिन डिजिटल युग में आपकी जेब पूरी तरह खाली नहीं रहेगी। एसबीआई और अन्य बैंकों ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि वे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप्स, योनी (YONO) और यूपीआई (UPI) जैसी डिजिटल सेवाओं का खुलकर इस्तेमाल कर सकते हैं। पैसे ट्रांसफर करने, ऑनलाइन बिल चुकाने या रोजमर्रा के छोटे-मोटे डिजिटल भुगतान के लिए इन माध्यमों में कोई रुकावट आने की संभावना नहीं है।

हालांकि, ग्राहकों को इस दौरान कुछ सावधानियां भी बरतनी होंगी। यदि आपके खाते से किसी लोन की ईएमआई, म्यूचुअल फंड की एसआईपी या किसी अन्य प्रकार का ऑटो-डेबिट होना है, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस हो। हड़ताल के दिनों में यदि तकनीकी कारणों से खाता अपडेट होने में देरी होती है, तो पर्याप्त फंड न होने पर आपको पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, यदि आपको नकदी (कैश) की आवश्यकता है, तो समय रहते एटीएम या कैश डिपॉजिट मशीनों (ADWM) से पैसों की व्यवस्था कर लें ताकि अंतिम समय में एटीएम के चक्कर न काटने पड़ें।

आखिर क्यों हो रही है यह देशव्यापी बैंक हड़ताल?

बैंक कर्मचारियों के इस कड़े रुख के पीछे कई पुरानी और गंभीर मांगें जुड़ी हुई हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस लंबे समय से बैंकिंग सेक्टर में पांच दिन की कार्य संस्कृति (फाइव डे बैंकिंग) लागू करने की मांग कर रहा है, जिसके तहत शनिवार और रविवार दोनों दिन अवकाश घोषित किए जाने की बात है। इसके अलावा, बैंक कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए भी वैकल्पिक रूप से बहाल करने की मांग कर रहे हैं।

कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगों में पेंशन में सुधार करना, सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) का एक समान और न्यायसंगत फॉर्मूला तैयार करना और लगातार बढ़ रहे काम के बोझ को कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में नई भर्तियों का होना शामिल है। यूनियनों का कहना है कि सरकार और बैंकिंग संघ यदि समय रहते इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं, तो आने वाले समय में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जा सकता है।

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