भारतीय कमर्शियल एविएशन के इतिहास में हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया, लेकिन इसके साथ ही देश की राजनीति में एक नया बवंडर भी खड़ा हो गया है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 के कॉकपिट में हुए जानलेवा हमले के दौरान अपनी जान की परवाह न करते हुए सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की वीरता की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। अमेरिका और इजराइल जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस जांबाज पायलट के अदम्य साहस की खुलकर सराहना की है। हालांकि, इस राष्ट्रीय गौरव के पल में देश के प्रमुख विपक्षी दल यानी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी ने भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है।
सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर तीखा वार, पूछा- कैप्टन स्मित के लिए करुणा क्यों नहीं?
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर सीधा और कड़ा हमला बोला है। बीजेपी सांसद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक तरफ जहां पूरा देश कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के आगे नतमस्तक है और उनके सूझबूझ भरे कदमों की तारीफ कर रहा है, वहीं कांग्रेस पार्टी के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा की तरफ से कैप्टन स्मित के समर्थन में आज तक एक भी आधिकारिक बयान, एक भी सोशल मीडिया पोस्ट या संवेदना का कोई संदेश सामने नहीं आया है।
बीजेपी प्रवक्ता ने इस मामले को लेकर कांग्रेस की वैचारिक प्राथमिकताओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब विदेशी धरती पर संकट के समय एक भारतीय पायलट अपनी जान जोखिम में डालकर अनगिनत जिंदगियां बचाता है, तब विपक्षी नेताओं के मुंह से तारीफ के दो शब्द भी नहीं निकलते। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह देश की जनता को तय करना है कि उनके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है या फिर राजनीति।
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बाटला हाउस और गाजा के मामलों से की गई कांग्रेस की चुप्पी की तुलना
अपने आक्रामक तेवर जारी रखते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने अतीत की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस पार्टी की दोहरी नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में कई ऐसे मौके आए हैं जब कांग्रेस के बड़े नेताओं ने आतंकवादियों, देश विरोधी ताकतों या अंतरराष्ट्रीय विवादों पर बढ़-चढ़कर बयानबाजी की थी और संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी थीं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि किस प्रकार कुछ नेताओं ने बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान मारे गए आतंकवादियों पर आंसू बहाए थे और विभिन्न मंचों से संदिग्ध व्यक्तियों के समर्थन में आवाज उठाई थी।
बीजेपी नेता ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता गाजा की हर घटना पर तुरंत संवेदना जताते हैं, सोशल मीडिया पर लंबे चौड़े लेख लिखते हैं और कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठकों में प्रस्ताव पास करवाते हैं, वे आज एक भारतीय जांबाज के सम्मान में बोलने से बच रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता अपने तथाकथित वोट बैंक की राजनीति के डर से इतने खौफजदा हो चुके हैं कि उन्हें देश के सम्मान से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक नफे-नुकसान के चश्मे से ही दिखाई देते हैं।
"आज हम सीधे कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहते हैं कि आखिर क्यों उन लोगों के मुंह से कैप्टन स्मित मच्छार के लिए एक भी शब्द नहीं निकल रहा, जिन्होंने जाकिर नाइक को शांति का मसीहा कहा, अफजल गुरु को हालात का शिकार बताया और बाटला हाउस एनकाउंटर पर आंसू बहाए।" — सुधांशु त्रिवेदी, राष्ट्रीय प्रवक्ता, बीजेपी एवं राज्यसभा सांसद
क्या है कैप्टन स्मित मच्छार की वह बहादुरी की दास्तान?
यह पूरा विवाद उस भयानक घटना से जुड़ा है जो फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में उड़ान के दौरान घटी थी। इस विमान में 174 यात्री सवार थे जो दुबई से तेल अवीव की यात्रा पर निकले थे। उड़ान के दौरान अचानक ओमान के रहने वाले को-पायलट इमाम अल हमामी ने कॉकपिट के भीतर ही कैप्टन स्मित मच्छार पर घातक हथियारों से हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके शरीर से लगातार खून बह रहा था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी और अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए कॉकपिट का दरवाजा सुरक्षित तरीके से खोल दिया।
कैप्टन स्मित के इस त्वरित कदम की बदौलत समय रहते अन्य क्रू मेंबर और यात्री कॉकपिट में दाखिल हो सके और हमलावर को काबू में कर लिया गया। यदि कैप्टन स्मित उस समय थोड़ी भी घबराहट या कमजोरी दिखाते, तो विमान एक बड़े भीषण हादसे का शिकार हो सकता था और सैकड़ों बेकसूर लोगों की जान जा सकती थी। इस साहसिक कारनामे के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी कैप्टन स्मित के सूझबूझ भरे कदमों की जोरदार चर्चा हुई है। इसके साथ ही इस बात के भी खुलासे सामने आए हैं कि हमलावर पायलट की हरकतों के पीछे कुछ चरमपंथी विचारधाराओं से जुड़ाव हो सकता है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बयानबाजी और आने वाले दिनों के संकेत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में तापमान काफी बढ़ गया है। एक तरफ जहां सत्ताधारी पार्टी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को राष्ट्रवाद के पैमाने पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकती है। चुनाव के माहौल और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इस प्रकार के राष्ट्रीय सुरक्षा और वीरता से जुड़े मुद्दे जनता के बीच मुख्य चर्चा का विषय बन जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के नागरिक की सुरक्षा और सैन्य या अर्धसैनिक सेवाओं से जुड़े जांबाजों की हौसलाअफजाई राजनीति से ऊपर उठकर होनी चाहिए। हालांकि, जब भी ऐसे मामले राजनीतिक मंचों पर उछलते हैं, तो वैचारिक ध्रुवीकरण और तीखी बयानबाजी का दौर तेज होना स्वाभाविक हो जाता है। अब देखना यह होगा कि भारतीय जनता पार्टी के इन तीखे हमलों पर कांग्रेस पार्टी या उसके शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और इस बहस का राजनीतिक पटल पर क्या असर पड़ता है।






