युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए डिजिटल मंच की पहल
आज के दौर में तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले हर युवा का सपना होता है कि पढ़ाई पूरी होते ही उसे एक बेहतरीन नौकरी मिल जाए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्राविधिक शिक्षा विभाग ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। तकनीकी विद्यार्थियों को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने के लिए एक केंद्रीकृत ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट पोर्टल तैयार किया गया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एक ही छत के नीचे लाना है, ताकि रिक्रूटमेंट प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया जा सके।
पारंपरिक रूप से कॉलेजों में प्लेसमेंट के लिए अलग-अलग कंपनियों को बुलाना और छात्रों का डेटा संकलित करना एक लंबी प्रक्रिया रही है। इसमें कई बार छोटे या दूरदराज के कॉलेजों के मेधावी छात्रों को बड़े उद्योगों तक पहुंचने का मौका नहीं मिल पाता था। इस डिजिटल पोर्टल के आ जाने से अब भौगोलिक दूरियां और प्रशासनिक बाधाएं खत्म होती दिख रही हैं। कोई भी छात्र घर बैठे अपनी योग्यता, स्किल और रिज्यूमे को इस सिस्टम पर अपलोड कर सकता है और देश की नामी-गिरामी कंपनियों की नजरों में आ सकता है।
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लाखों छात्र और हजारों संस्थान आए एक साथ
इस महत्वाकांक्षी पोर्टल की शुरुआत को कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन इसका दायरा बेहद तेजी से फैल रहा है। अब तक इस सिस्टम पर ढाई लाख से अधिक तकनीकी छात्र अपना पंजीकरण करा चुके हैं। इसके अलावा, राज्यभर के तीन हजार से ज्यादा तकनीकी और इंजीनियरिंग संस्थान भी इस नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। इसमें प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ-साथ कई तकनीकी संस्थान और पॉलिटेक्निक डिप्लोमा कॉलेज भी शामिल हैं, जिससे डिप्लोमा धारक युवाओं को भी इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का एक ही मंच पर आना इस बात का प्रमाण है कि देश में तकनीकी कौशल की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इस बात की थी कि इन्हें एक ऐसा पारदर्शी माध्यम मिले जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। इस पोर्टल के माध्यम से छात्रों को न केवल फुल-टाइम जॉब्स बल्कि इंटर्नशिप के भी बेहतरीन अवसर मिलने की उम्मीद बंध गई है, जिससे वे कॉर्पोरेट संस्कृति को गहराई से समझ सकें।
उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर
हालांकि पोर्टल पर छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा है, लेकिन इसके सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। फिलहाल पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले कंपनियों द्वारा लाई जाने वाली रिक्तियों या जॉब ओपनिंग्स की संख्या कम है। यानी जितने युवा नौकरी की तलाश में हैं, उस अनुपात में बाजार से नौकरियां उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इस असंतुलन को दूर करने के लिए अब प्राविधिक शिक्षा विभाग और संबंधित विश्वविद्यालयों ने कमर कस ली है।
हाल ही में कई दौर की उच्चस्तरीय बैठकों में इस बात पर मंथन किया गया है कि देश की दिग्गज औद्योगिक इकाइयों, आईटी फर्म्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को इस पोर्टल पर कैसे लाया जाए। इसके लिए कॉर्पोरेट घरानों के साथ संवाद स्थापित किया जा रहा है ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार सीधे इस पोर्टल से योग्य युवाओं का चयन कर सकें। आईटी और विनिर्माण क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है और शुरुआती दौर में पांच लाख रुपये तक के वार्षिक पैकेज वाले पद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
पारदर्शिता और बेहतर परिणामों की ओर कदम
विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षाविदों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस पोर्टल को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा। भविष्य की योजनाओं के तहत इस प्लेटफॉर्म पर यह भी ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा कि किस संस्थान के कितने छात्रों का चयन हुआ और उन्हें औसतन कितना वेतन पैकेज मिला। इस तरह के डेटा सार्वजनिक होने से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि संस्थानों को भी यह आत्मविश्लेषण करने का मौका मिलेगा कि उनके यहां की शिक्षण गुणवत्ता और प्लेसमेंट का स्तर कैसा है।
"हमारा पूरा प्रयास है कि अधिक से अधिक राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इस पोर्टल के साथ जोड़ा जाए, ताकि हमारे तकनीकी छात्रों को उनकी योग्यता के मुताबिक बेहतरीन करियर विकल्प मिल सकें। आने वाले समय में इसके परिणाम बेहद सकारात्मक होंगे।" — प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एकेटीयू
युवाओं के लिए क्या है खास और आगे की राह
इस पोर्टल की उपयोगिता तभी अपने चरम पर पहुंचेगी जब छात्र की हर एक उम्मीद कॉरपोरेट जगत की रिक्तियों से मेल खाए। तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे अपनी प्रोफाइल को अपडेट रखें और अपनी स्किल को लगातार निखारते रहें। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे कॉर्पोरेट सेक्टर इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनेगा, वैसे-वैसे देश के दूर-दराज के इलाकों में बैठे युवाओं के लिए भी महानगरों की बड़ी कंपनियों में रास्ते खुलते चले जाएंगे।








