बिहार की राजनीति में इन दिनों कानून व्यवस्था और राजनीतिक बयानों को लेकर सरगर्मी काफी तेज हो गई है। एनडीए गठबंधन के प्रमुख घटक दल और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान द्वारा राज्य की मौजूदा प्रशासनिक स्थिति पर सवाल उठाए जाने के बाद अब विपक्षी दलों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चिराग पासवान के बयानों का समर्थन करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। संजय सिंह का कहना है कि चिराग पासवान आज जिन मुद्दों को उठा रहे हैं, वे असल में वही बातें हैं जिन्हें विपक्ष लंबे समय से दोहराता आ रहा है।
चिराग पासवान के बयानों पर सियासत तेज, आप सांसद ने क्या कहा
हाल ही में केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने बिहार के विभिन्न जिलों में महिलाओं के खिलाफ सामने आ रही अभद्रता और छेड़छाड़ की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि राज्य में बेलगाम अपराध और बिगड़ती कानून व्यवस्था के कारण उन्हें एनडीए सरकार का समर्थन करते हुए शर्म महसूस होती है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दल इसे सरकार की नाकामी के रूप में देख रहे हैं और लगातार नीतीश कुमार सरकार के साथ-साथ बीजेपी पर भी निशाना साध रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए कहा कि चिराग पासवान अब केवल अपराध की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे उन तमाम बुनियादी विषयों को भी छू रहे हैं जिन पर विपक्ष लगातार सवालिया निशान लगाता रहा है। संजय सिंह के अनुसार, संविधान और आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर भी अब सत्ता पक्ष के भीतर से ही आवाजें उठने लगी हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि देश और राज्यों में व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है कि मौजूदा हुकूमत का मूल एजेंडा समाज के कमजोर वर्गों को मिलने वाले अधिकारों को कमजोर करना है।
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सम्राट चौधरी के इस्तीफे वाले पुराने बयानों पर भी छिड़ी बहस
संजय सिंह ने अपने बयान में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में कानून व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे और यह कहा गया था कि यदि महिलाओं के विरुद्ध किसी भी तरह का अपराध या छेड़खानी होती है, तो वे तुरंत जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। आप सांसद ने सवाल उठाया कि आज जब खुलेआम बेटियों और महिलाओं के साथ अभद्रता की घटनाएं सामने आ रही हैं और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, तो वे तमाम बड़े नेता और मंत्री कहां छिपे हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जनता के सामने सुरक्षा के जो वादे किए गए थे, वे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि थानों से लेकर सड़कों तक आम नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि पुलिस प्रशासन का खौफ अपराधियों के मन से पूरी तरह समाप्त हो चुका है। ऐसे में केवल बयानबाजी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि अपराधियों में कानून का डर फिर से कायम हो सके।
"चिराग पासवान तो कई चीजें कह रहे हैं। वो तो संविधान और आरक्षण को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं जो बार-बार विपक्ष भी कहता है। बीजेपी का मकसद संविधान और आरक्षण को खत्म करना है। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर तो सम्राट चौधरी ने खुद कहा था कि अगर किसी महिला के साथ छेड़खानी-अपराध हुई तो हम इस्तीफा दे देंगे। कहां छुपे हुए हैं आप?"— संजय सिंह, राज्यसभा सांसद, आम आदमी पार्टी
एसआईआर विवाद और चुनाव प्रक्रिया पर खड़े किए बड़े सवाल
कानून व्यवस्था के मुद्दे के अलावा संजय सिंह ने एसआईआर विवाद और देश की चुनावी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि आखिर भारतीय जनता पार्टी लगातार चुनाव आयोग के बचाव में क्यों उतर आती है। आप नेता का आरोप है कि यदि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है, तो किसी एक राजनीतिक दल को आयोग के पक्ष में खुलकर वकालत करने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने आशंका जताई कि चुनावी संस्थाओं की आड़ में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है, जिसका सीधा फायदा सत्ताधारी दल को मिल रहा है।
संजय सिंह ने देश के विभिन्न राज्यों में हुए पिछले चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत तमाम जगहों पर चुनावों के दौरान जिस तरह से बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उनका दावा है कि लाखों की संख्या में वैध वोटरों के नाम मतदाता सूचियों से गायब कर दिए जाते हैं, जिससे चुनावी परिणाम पूरी तरह से प्रभावित होते हैं।
चुनावों को रद्द करने की मांग और विपक्षी एकता का मुद्दा
आप सांसद ने कड़े शब्दों में मांग की कि इस प्रकार की अनियमितताओं के चलते देश में हुए हालिया सभी चुनावों की गहन समीक्षा और उन्हें रद्द किए जाने की मांग उठनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मतदाताओं को उनके मताधिकार से ही वंचित कर दिया जाएगा और मनमाने तरीके से चुनाव संपन्न कराए जाएंगे, तो लोकतंत्र की मूल भावना ही समाप्त हो जाएगी। संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों पर देश के अन्य विपक्षी दल भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं और कोई भी निष्पक्ष दल इस तरह की कार्यप्रणाली के समर्थन में खड़ा नजर नहीं आता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान के बयानों और उस पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं से आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर असहजता बढ़ सकती है। विधानसभा चुनावों के नजदीक आते-आते यह मुद्दे और अधिक तूल पकड़ सकते हैं, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी रस्साकशी का दौर और ज्यादा आक्रामक होने की पूरी संभावना है। जनता के बीच भी इन तमाम विषयों पर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं और हर कोई यह जानना चाहता है कि आने वाले समय में इन सियासी बहसों का जमीनी हकीकत पर क्या असर पड़ेगा।








