दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर बढ़ेगा ट्रेनों का जोर, सरकार ने दी मंजूरी
देश की राजधानी दिल्ली को उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से जोड़ने वाला दिल्ली-अंबाला रेलखंड देश के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इस रूट पर यात्रियों की भारी भीड़ और ट्रेनों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है। इस व्यस्त मार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और क्षमता में भारी विस्तार करने के लिए अब तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस वृहद परियोजना पर कुल 5983 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जाएगी, जिससे न सिर्फ यात्रियों का सफर सुगम होगा बल्कि माल ढुलाई की रफ्तार भी कई गुना बढ़ जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में इस महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर इसकी निर्धारित क्षमता से लगभग 66 प्रतिशत अधिक ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। अत्यधिक यातायात दबाव के कारण राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी कई बार छोटे स्टेशनों या आउटर सिग्नल पर रोकनी पड़ जाती हैं। इसके अलावा मालगाड़ियों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित होती है। इन तमाम समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए ही सरकार ने इस खंड पर दो अतिरिक्त लाइनें बिछाने की योजना को अमलीजामा पहनाने का निर्णय लिया है।
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क्षमता से अधिक ट्रेनों का दबाव और बढ़ती मुश्किलें
दिल्ली और अंबाला के बीच का यह रेलखंड सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील है। इस रूट पर प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक यात्री ट्रेनें दौड़ती हैं, जिनमें वीआईपी ट्रेनें भी शामिल हैं। इसके साथ ही विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयला ले जाने वाली मालगाड़ियां भी इसी मार्ग से होकर गुजरती हैं। ट्रेनों की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण ट्रैक पर लगातार लोड बना रहता है, जिसके परिणामस्वरुप अक्सर ट्रेनें अपने निर्धारित समय से काफी विलंब से गंतव्य तक पहुंचती हैं।
आने वाले समय में जब कश्मीर घाटी यानी श्रीनगर तक सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी पूरी तरह चालू हो जाएगी, तो इस रूट पर ट्रेनों और मालगाड़ियों का दबाव और अधिक बढ़ जाएगा। यदि समय रहते रेल ढांचे का आधुनिकीकरण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विकट हो सकती है। इसे भांपते हुए ही रेलवे बोर्ड ने लगभग पांच साल पहले इस परियोजना की रूपरेखा तैयार करनी शुरू की थी, जिसे अब धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और भारी वित्तीय निवेश
इसी वर्ष फरवरी के महीने में केंद्र सरकार ने इस 194 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर दो अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी थी। इस पूरी परियोजना पर कुल 5983 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इस योजना के तहत केवल पटरियां ही नहीं बिछाई जाएंगी, बल्कि इस मार्ग पर सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए दो बड़े रेल ओवर ब्रिज और 79 रेल अंडर ब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि सड़क और रेल यातायात आपस में न उलझें।
परियोजना के पहले चरण के तहत सब्ज़ी मंडी से अंबाला कैंट के बीच दो अतिरिक्त लाइनों के निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए रेलवे ने 3612 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की निविदा भी आमंत्रित कर दी है। इस टेंडर के अंतर्गत सिविल वर्क, आधुनिक ट्रैक निर्माण, अत्याधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली, टेलीकम्युनिकेशन और ओवरहेड इक्विपमेंट यानी ओएचई से जुड़े सभी कार्य शामिल किए गए हैं, जो रेल आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगे।
"दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग हमारी प्राथमिक धमनियों में से एक है। इस परियोजना के पूरा होने से न केवल ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या हमेशा के लिए खत्म होगी, बल्कि देश के उत्तरी राज्यों के साथ व्यापारिक और सामरिक संपर्क भी और अधिक मजबूत हो जाएगा।" — वरिष्ठ रेलवे अधिकारी, नई दिल्ली
पर्यटन को बढ़ावा और औद्योगिक माल ढुलाई में तेजी
इस रेल परियोजना के धरातल पर उतरने से उत्तर भारत के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले सैलानियों को अभूतपूर्व सुविधा मिलने वाली है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा, शिमला, जम्मू और श्रीनगर जाने वाले पर्यटकों को अब ट्रेनों के लंबे इंतजार से मुक्ति मिलेगी और वे कम समय में अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। इसके अलावा, औद्योगिक मोर्चे पर भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे। थर्मल पावर प्लांटों तक कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी और कृषि गोदामों तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों से माल भेजने की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस पूरी परियोजना को तय समयसीमा यानी चार वर्षों के भीतर पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण कार्य के दौरान यात्रियों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए विशेष योजना बनाई गई है। इस बुनियादी ढांचे के विस्तार से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भारी इजाफा होगा, जिससे देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को भी अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा संबल मिलेगा।








