चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत: डीएमसीएंडएच में व्हाइट कोट समारोह
दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएंडएच) में चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखने वाले नए छात्रों के लिए एक बेहद खास और भावनात्मक क्षण आया। एमबीबीएस बैच-2026 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित व्हाइट कोट सेरेमनी ने उनके डॉक्टर बनने के सफर का औपचारिक आगाज कर दिया। इस कार्यक्रम में न केवल छात्र, बल्कि उनके अभिभावक और संस्थान के प्रतिष्ठित शिक्षक भी शामिल हुए, जिन्होंने भावी चिकित्सकों का उत्साहवर्धन किया।
व्हाइट कोट पहनना किसी भी मेडिकल छात्र के जीवन का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। यह सफेद कोट केवल एक लिबास नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि अब छात्र ने समाज की सेवा, करुणा और विज्ञान की एक कठिन राह चुन ली है। डीएमसीएंडएच के सभागार में आयोजित इस भव्य समारोह में चारों तरफ उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिला, जहां हर छात्र के चेहरे पर एक नई चमक और जिम्मेदारी का अहसास साफ झलक रहा था।
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सफेद कोट के मायने और नैतिकता का पाठ
समारोह के दौरान संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सकों और प्रोफेसरों ने नए छात्रों को संबोधित करते हुए चिकित्सा पेशे की मूल भावना से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह सफेद कोट पहनने के बाद डॉक्टर और मरीज के बीच का रिश्ता एक पवित्र बंधन में बंध जाता है। मरीजों का विश्वास जीतना और उनके दर्द को कम करना ही एक सच्चे चिकित्सक का पहला धर्म होना चाहिए।
संस्थान के विशेषज्ञों ने छात्रों को पढ़ाई के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में भी चेताया और कहा कि मेडिकल की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसानियत को समझने का एक जरिया भी है। अनुशासन, कड़ी मेहनत और निरंतर सीखने की ललक ही एक सफल डॉक्टर की पहचान बनाती है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को हमेशा मरीजों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉक्टरी की शपथ और भविष्य का संकल्प
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह क्षण था जब सभी नवागत विद्यार्थियों ने एक स्वर में पारंपरिक चिकित्सा शपथ (हिप्पोक्रेटिक ओथ) ली। हाथ में मोमबत्ती और दिल में सेवा का जज्बा लिए छात्रों ने संकल्प लिया कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद मरीज का इलाज करेंगे और चिकित्सा विज्ञान की मर्यादा को हमेशा बनाए रखेंगे।
"व्हाइट कोट केवल एक रंग नहीं है, यह पवित्रता, निष्पक्षता और निस्वार्थ भाव से सेवा करने का एक आजीवन अनुबंध है। आज हमारे इन युवा छात्रों ने चिकित्सा जगत में प्रवेश किया है, और मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस पेशे की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।" — डीएमसीएंडएच प्रबंधन
शपथ ग्रहण के दौरान कई छात्रों और उनके अभिभावकों की आंखें नम हो गईं। यह उनके वर्षों के कड़े संघर्ष और सपनों के सच होने का पल था। माता-पिता ने अपने बच्चों को व्हाइट कोट पहने हुए देखा तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
अभिभावकों की उपस्थिति और उत्सव का माहौल
इस ऐतिहासिक अवसर पर छात्रों के अभिभावक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। उन्होंने अपने बच्चों को मंच पर जाकर व्हाइट कोट पहनते और शपथ लेते हुए देखा। कॉलेज परिसर को बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था और इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए छात्रों ने आपस में तस्वीरें भी खिंचवाईं।
समारोह के अंत में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अनौपचारिक वार्ताओं का दौर चला, जहां वरिष्ठ छात्रों ने अपने जूनियर्स का स्वागत किया और उन्हें कॉलेज के माहौल से तालमेल बिठाने के टिप्स दिए। यह आयोजन न केवल एक शैक्षणिक औपचारिकता था, बल्कि यह आने वाले डॉक्टरों की एक नई पीढ़ी के मानसिक और नैतिक निर्माण की मजबूत नींव साबित हुआ।








