होम/देश/ब्लैक होल कैसे करते हैं बड़ी-बड़ी गैलेक्सीज का शिकार? वैज्ञानिकों ने सुलझाई ब्रह्मांड की सबसे बड़ी गुत्थी
देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

ब्लैक होल कैसे करते हैं बड़ी-बड़ी गैलेक्सीज का शिकार? वैज्ञानिकों ने सुलझाई ब्रह्मांड की सबसे बड़ी गुत्थी

ब्रह्मांड में सुपरमैसिव ब्लैक होल अपनी ही गैलेक्सी के लिए कैसे जानलेवा साबित होते हैं, इसका बड़ा खुलासा हुआ है। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ब्लैक होल के प्लाज्मा जेट्स नई गैलेक्सी के निर्माण और तारों के जन्म को कैसे रोक देते हैं।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•4 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•24
🌐Read in English →
शेयर करें:
ब्लैक होल कैसे करते हैं बड़ी-बड़ी गैलेक्सीज का शिकार? वैज्ञानिकों ने सुलझाई ब्रह्मांड की सबसे बड़ी गुत्थी
📷 ब्लैक होल कैसे करते हैं बड़ी-बड़ी गैलेक्सीज का शिकार? वैज्ञानिकों ने सुलझाई ब्रह्मांड की सबसे बड़ी गुत्थी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • ब्लैक होल आकार में गैलेक्सी के मुकाबले बहुत छोटे होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव लाखों लाइट-इयर्स दूर तक फैलता है।
  • ब्लैक होल से निकलने वाले शक्तिशाली प्लाज्मा जेट्स गैलेक्सी की गैस और धूल को डिस्टर्ब कर देते हैं।
  • गैलेक्सी के बाहरी किनारों तक पहुंचने वाले ये जेट्स नए तारों के बनने की प्रक्रिया को हमेशा के लिए रोक देते हैं।
  • तारों का निर्माण रुकने से गैलेक्सी धीरे-धीरे मृत अवस्था में पहुंचने लगती है, जिसकी पुष्टि नई खगोलीय स्टडी में हुई है।

ब्रह्मांड का सबसे खतरनाक शिकारी: गैलेक्सी और ब्लैक होल का अनोखा और खौफनाक कनेक्शन

ब्रह्मांड में ऐसे कई रहस्य हैं जो इंसानी समझ से परे लगते हैं, लेकिन विज्ञान धीरे-धीरे इनसे पर्दा उठा रहा है। अंतरिक्ष में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल अक्सर अपनी ही गैलेक्सी के लिए विनाशकारी साबित होते हैं। वैज्ञानिकों के मन में लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि आखिर ब्रह्मांड की विशालकाय गैलेक्सीज के मुकाबले आकार में बेहद छोटे दिखने वाले ब्लैक होल किस तरह उन पर भारी पड़ जाते हैं। इस पेचीदा गुत्थी को अब खगोल वैज्ञानिकों की एक टीम ने सुलझा लिया है, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

मिल्की वे समेत ब्रह्मांड की सभी बड़ी गैलेक्सीज गैस और धूल के विशाल बादलों से घिरी रहती हैं। खगोल विज्ञान की भाषा में इस आवरण को 'सरकमगैलेक्टिक मीडियम' कहा जाता है। यही वह मूल कच्चा माल है जिससे नए तारों का निर्माण होता है। जब किसी गैलेक्सी में तारों के बनने की प्रक्रिया तेजी से चलती है, तो यह गैस अंदर की तरफ खिंचती है। हालांकि, ब्लैक होल इस पूरी प्रक्रिया के रास्ते में सबसे बड़ा अवरोधक बनकर खड़े हो जाते हैं और गैलेक्सी के भाग्य को पूरी तरह बदल देते हैं।

संबंधित खबरें

मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने पूरे किए 5 हजार दिन: जानिए अंतरिक्ष विज्ञान के इस चमत्कार की पूरी कहानी

मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने पूरे किए 5 हजार दिन: जानिए अंतरिक्ष विज्ञान के इस चमत्कार की पूरी कहानी

उत्तराखंड के देवस्थल में भारत और बेल्जियम के वैज्ञानिक खोलेंगे अंतरिक्ष के बड़े राज, डाट दूरबीन से होगी नई खोज

उत्तराखंड के देवस्थल में भारत और बेल्जियम के वैज्ञानिक खोलेंगे अंतरिक्ष के बड़े राज, डाट दूरबीन से होगी नई खोज

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: 12 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों में पसरा गंभीर बीमारियों का साया

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: 12 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों में पसरा गंभीर बीमारियों का साया

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान: साल 2029 तक मध्य प्रदेश को बनाएंगे पूरी तरह नशामुक्त, ध्वस्त होगा अपराधियों का नेटवर्क

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान: साल 2029 तक मध्य प्रदेश को बनाएंगे पूरी तरह नशामुक्त, ध्वस्त होगा अपराधियों का नेटवर्क

बिहार पुलिस के मुखिया पद पर क्यों फंसा पेंच: जितेंद्र सिंह गंगवार और बी. श्रीनिवासन की दावेदारी से उलझी प्रक्रिया, UPSC को नहीं भेजे गए नाम

बिहार पुलिस के मुखिया पद पर क्यों फंसा पेंच: जितेंद्र सिंह गंगवार और बी. श्रीनिवासन की दावेदारी से उलझी प्रक्रिया, UPSC को नहीं भेजे गए नाम

मेडिकल की दुनिया में पहला कदम: डीएमसीएंडएच के नए एमबीबीएस बैच को मिले व्हाइट कोट, डॉक्टरों ने ली शपथ

मेडिकल की दुनिया में पहला कदम: डीएमसीएंडएच के नए एमबीबीएस बैच को मिले व्हाइट कोट, डॉक्टरों ने ली शपथ

अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक सफलता: पहली बार बाह्यग्रह 'बेटा पिक्टोरिस b' से मिले सीधे रेडियो संकेत

अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक सफलता: पहली बार बाह्यग्रह 'बेटा पिक्टोरिस b' से मिले सीधे रेडियो संकेत

प्लाज्मा जेट्स का रहस्य: कैसे रुक जाता है नए तारों का निर्माण

वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्लैक होल के भीतर से निकलने वाले शक्तिशाली प्लाज्मा जेट्स इस पूरी प्रक्रिया की धुरी हैं। ये जेट्स ब्लैक होल के केंद्र से शुरू होते हैं और ऊर्जा को बाहर की तरफ धकेलते हुए गैलेक्सी के बाहरी किनारों तक फैल जाते हैं। रास्ते में आने वाली गैस इन जेट्स के संपर्क में आकर बुरी तरह डिस्टर्ब हो जाती है और चमकने लगती है। इस भारी उथल-पुथल के कारण गैस का ठंडे होकर तारों का रूप लेना बंद हो जाता है।

तारों के बिना कोई भी गैलेक्सी लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकती। जब नए तारों का जन्म होना बंद हो जाता है, तो गैलेक्सी धीरे-धीरे बुझने लगती है और अंततः मृतप्राय हो जाती है। रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की को-लीडर नम्रता रॉय ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि इतनी छोटी सी खगोलीय संरचना इतनी विशाल गैलेक्सी के भविष्य को कैसे तय कर सकती है, यह अपने आप में एक चौंकाने वाला विषय था, जिसका सटीक जवाब अब मिल गया है।

आकार में छोटे लेकिन प्रभाव में विशाल: कैसे काम करते हैं सुपरमैसिव ब्लैक होल

आम आदमी के मन में यह सवाल आना लाजिमी है कि जिस ब्लैक होल की चौड़ाई हमारे पूरे सोलर सिस्टम के बराबर हो सकती है, वह अरबों तारों वाली गैलेक्सी को कैसे प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि सुपरमैसिव ब्लैक होल का द्रव्यमान सूरज से भी लाखों या करोड़ों गुना ज्यादा होता है। भले ही वे आकार के मामले में गैलेक्सी के सामने बेहद छोटे दिखते हों, लेकिन उनका गुरुत्वाकर्षण और उनसे निकलने वाली ऊर्जा का दायरा अकल्पनीय रूप से बड़ा होता है।

एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की को-लीडर सांचयीता बोरठाकुर ने इस खोज को एक मील का पत्थर बताया है। उनका मानना है कि यह रिजल्ट ब्लैक होल और गैलेक्सी के बीच के छिपे हुए कनेक्शन को पूरी स्पष्टता के साथ समझाता है। एक ब्लैक होल का प्रभाव उसकी अपनी सीमा से निकलकर लाखों प्रकाश वर्ष यानी लाइट-इयर्स दूर तक असर डाल सकता है, जो ब्रह्मांडीय ताकतों की अद्भुत मिसाल है।

हालिया खगोलीय शोध और अंतरिक्ष विज्ञान के नए द्वार

इस महत्वपूर्ण अध्ययन को प्रतिष्ठित 'एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में प्रकाशित किया गया है। दुनिया भर के खगोलशास्त्री इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि कम सक्रिय ब्लेज़र और ब्लैक होल किस तरह अपने आसपास के वातावरण को नियंत्रित करते हैं। वैज्ञानिकों ने NASA की उन्नत दूरबीनों जैसे NICER और NuSTAR के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह साबित किया है कि ब्लैक होल के आसपास की गतिविधियां किस तरह गैलेक्सी के विकास को रोकती या आगे बढ़ाती हैं।

"हैरानी की बात यह है कि इतनी छोटी चीज इतनी बड़ी गैलेक्सी पर कैसे असर डाल सकती है। यह एक बड़ा रिजल्ट है जो ब्लैक होल और गैलेक्सी के कनेक्शन को गहराई से समझाता है।" — नम्रता रॉय और सांचयीता बोरठाकुर, अंतरिक्ष वैज्ञानिक

भविष्य में इस तरह के शोध अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल भौतिकी को समझने के नए रास्ते खोलेंगे। जिस तरह से वैज्ञानिक ब्लैक होल के अदृश्य तंत्र और प्लाज्मा जेट्स के प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं, उससे ब्रह्मांड के जन्म से लेकर उसके अंत तक के कई अनसुने रहस्यों से पर्दा उठना तय माना जा रहा है। आम जनता के लिए भी यह जानना रोमांचक है कि अंतरिक्ष की गहराइयों में कितने बड़े पैमाने पर अदृश्य युद्ध लगातार जारी हैं।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने पूरे किए 5 हजार दिन: जानिए अंतरिक्ष विज्ञान के इस चमत्कार की पूरी कहानीTECH-AUTO

मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने पूरे किए 5 हजार दिन: जानिए अंतरिक्ष विज्ञान के इस चमत्कार की पूरी कहानी

4 अक्टू॰31
उत्तराखंड के देवस्थल में भारत और बेल्जियम के वैज्ञानिक खोलेंगे अंतरिक्ष के बड़े राज, डाट दूरबीन से होगी नई खोजNATIONAL

उत्तराखंड के देवस्थल में भारत और बेल्जियम के वैज्ञानिक खोलेंगे अंतरिक्ष के बड़े राज, डाट दूरबीन से होगी नई खोज

4 अक्टू॰26
पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?NATIONAL

पृथ्वी और मंगल का अलग है इतिहास: एक ही धूल के बादल से बने दोनों ग्रह, फिर भी क्यों हुआ ऐसा?

4 अक्टू॰28
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: 12 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों में पसरा गंभीर बीमारियों का सायाNATIONAL

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: 12 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी गांवों में पसरा गंभीर बीमारियों का साया

4 अक्टू॰24
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान: साल 2029 तक मध्य प्रदेश को बनाएंगे पूरी तरह नशामुक्त, ध्वस्त होगा अपराधियों का नेटवर्कNATIONAL

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान: साल 2029 तक मध्य प्रदेश को बनाएंगे पूरी तरह नशामुक्त, ध्वस्त होगा अपराधियों का नेटवर्क

4 अक्टू॰45
बिहार पुलिस के मुखिया पद पर क्यों फंसा पेंच: जितेंद्र सिंह गंगवार और बी. श्रीनिवासन की दावेदारी से उलझी प्रक्रिया, UPSC को नहीं भेजे गए नामNATIONAL

बिहार पुलिस के मुखिया पद पर क्यों फंसा पेंच: जितेंद्र सिंह गंगवार और बी. श्रीनिवासन की दावेदारी से उलझी प्रक्रिया, UPSC को नहीं भेजे गए नाम

4 अक्टू॰37
मेडिकल की दुनिया में पहला कदम: डीएमसीएंडएच के नए एमबीबीएस बैच को मिले व्हाइट कोट, डॉक्टरों ने ली शपथNATIONAL

मेडिकल की दुनिया में पहला कदम: डीएमसीएंडएच के नए एमबीबीएस बैच को मिले व्हाइट कोट, डॉक्टरों ने ली शपथ

4 अक्टू॰42
अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक सफलता: पहली बार बाह्यग्रह 'बेटा पिक्टोरिस b' से मिले सीधे रेडियो संकेतNATIONAL

अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक सफलता: पहली बार बाह्यग्रह 'बेटा पिक्टोरिस b' से मिले सीधे रेडियो संकेत

4 अक्टू॰51