अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के लिए अपनी जोरदार अपील दोहराई है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने इतिहास में वो कर दिखाया है जो किसी अन्य नेता या राष्ट्रपति ने नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कोई डींग नहीं हांक रहे हैं, बल्कि पूरी तरह से जमीनी और वास्तविक तथ्यों पर बात कर रहे हैं। उनके अनुसार, उन्होंने अपने कूटनीतिक प्रयासों से वैश्विक स्तर पर कुल 8 युद्धों और संघर्षों को सफलताપूर्वक सुलझाया है।
दावों पर नोबेल की उम्मीद और फैक्ट-चेकर्स के सवाल
व्हाइट हाउस से अपने कूटनीतिक रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में उन्हें एक और बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिल सकती है। हालांकि, ईरान के साथ चल रहे तनाव और सीजफायर की दिशा में कोई ठोस प्रगति न दिखने के बावजूद ट्रंप का यह दावा काफी चर्चा में है। ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की इच्छा जगजाहिर है और वह कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के असली हकदार वही हैं।
दूसरी ओर, स्वतंत्र फैक्ट-चेकर्स ने ट्रंप के इन दावों को लेकर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि जिन विवादों और समझौतों का जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति कर रहे हैं, उनमें से कई औपचारिक रूप से पूर्ण युद्ध नहीं थे और कूटनीति में अमेरिका की भूमिका भी हर बार अलग-अलग प्रकृति की रही है। इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में ट्रंप के बयानों की गूंज लगातार बनी हुई है।
रूस में प्लेग और बायोवेपन पर क्या बोले ट्रंप?
अपने संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप से रूस में हाल ही में सामने आई एक गंभीर स्वास्थ्य घटना को लेकर भी सवाल पूछा गया। दरअसल, रूस के साइबेरिया में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 साल की एक लैब वर्कर की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उसे अज्ञात कारणों से निमोनिया हुआ था, जिसके बाद उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को तुरंत कड़ी मेडिकल निगरानी में रखा गया।
जब पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या यह किसी प्रकार का बायोवेपन (जैव हथियार) हमला हो सकता है, तो उन्होंने जवाब दिया कि अमेरिकी एजेंसियां जल्द ही इस पूरे मामले का पता लगा लेंगी। हालांकि, फिलहाल शुरुआती संकेतों के आधार पर उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें नहीं लगता कि यह कोई सुनियोजित बायोवेपन था। बायोवेपन एक ऐसा घातक जैविक हथियार माना जाता है, जिसके प्रयोग के लिए न तो सीमा पर सेना भेजने की जरूरत होती है और न ही मिसाइल दागने की, लेकिन इसका असर आने वाली कई पीढ़ियों तक विनाशकारी साबित हो सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो और दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।
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