सोने की कीमतों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में आई सुस्ती
भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर फिलहाल ब्रेक लगता हुआ नजर आ रहा है। देश की राजधानी दिल्ली समेत प्रमुख बाजारों में सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुना, जिसका सीधा असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार पर देखने को मिला है। पिछले कुछ सत्रों से जारी इस मंदी के कारण खरीदारों को कुछ हद तक राहत जरूर मिल रही है, जो लंबे समय से आसमान छूते दामों के कारण खरीदारी टाल रहे थे।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली सराफा बाजार में बुधवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने के भाव में 900 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इससे ठीक एक दिन पहले यानी मंगलवार को इसी शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,54,900 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह करेक्शन बाजार के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, क्योंकि लगातार लंबी तेजी के बाद कीमतों में थोड़ा ठहराव या गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है।
केवल 24 कैरेट शुद्ध सोना ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों के सोने में भी गिरावट का यह दौर समान रूप से देखा गया है। बाजार में आभूषण निर्माण के लिए सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले 22 कैरेट सोने का भाव गिरकर 1,41,888 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसके अलावा, कम शुद्धता वाले यानी 18 कैरेट सोने की कीमत भी घटकर 1,16,175 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। हालांकि दूसरी तरफ, चांदी की कीमतों में थोड़ी स्थिरता बनी हुई है और यह लगातार दूसरे दिन 2,42,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही, जिससे सर्राफा कारोबार में मिला-जुला रुख देखने को मिला है।
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वैश्विक बाजार में मंदी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर
घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर पड़ रहे इस दबाव के पीछे मुख्य वजहें वैश्विक पटल से जुड़ी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर संकेतों और अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती ने बुलियन मार्केट की चाल को प्रभावित किया है। डॉलर इंडेक्स में हुई बढ़ोतरी के बाद निवेशकों ने सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में यह नरमी आई है। दुनिया भर के बाजारों में स्पॉट गोल्ड की कीमतों में भी लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह फिसलकर 4,317.09 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर रुख सख्त रह सकता है। मौद्रिक नीति में सख्ती की उम्मीदों ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने के लिए मजबूर किया है। जब भी वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ती है, तो सोने जैसी गैर-लाभकारी परिसंपत्तियों पर बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है, क्योंकि निवेशक ट्रेजरी यील्ड और बॉन्ड की तरफ आकर्षित होने लगते हैं।
चांदी के वैश्विक बाजार की बात करें तो वहां भी सुस्ती का माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमतें लगभग 3 प्रतिशत तक टूटकर 65.17 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर चांदी की कीमतों में वैश्विक गिरावट का उतना बड़ा असर नहीं दिखा और यह अपने पिछले स्तर पर ही टिकी रही। इसके बावजूद, कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में दोनों कीमती धातुओं की अगली दिशा तय करेंगे।
एक साल में कितना महंगा हुआ सोना और क्या है निवेशकों का रुख
भले ही पिछले कुछ दिनों से सोने के दामों में मामूली गिरावट देखने को मिल रही हो, लेकिन यदि व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पिछले एक साल में सोने ने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया है। घरेलू बाजार में एक साल पहले जो सोना करीब 98,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास मिल रहा था, वह अब बढ़कर लगभग 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर के आसपास घूम रहा है। इस भारी उछाल के पीछे वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी और अप्रैल के महीने में सरकार द्वारा आयात शुल्क यानी इम्पोर्ट ड्यूटी में किए गए बदलाव प्रमुख कारण रहे हैं।
कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का असर अब आम खरीदारों के शॉपिंग पैटर्न पर भी साफ नजर आने लगा है। अब लोग शादियों या त्योहारों के सीजन में भारी-भरकम पारंपरिक ज्वेलरी खरीदने के बजाय हल्के वजन के आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा, पुराने सोने को एक्सचेंज करके नए आभूषण बनवाना, गोल्ड कॉइन में निवेश करना, या फिर डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ (ETF) जैसे आधुनिक विकल्पों की तरफ निवेशकों और मध्यम वर्ग का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
वित्तीय सलाहकारों का यह भी मानना है कि छोटे निवेशकों को मौजूदा गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। पोर्टफोलियो विविधीकरण (Diversification) के लिहाज से अपने कुल निवेश का एक निश्चित हिस्सा सोने में बनाए रखना हमेशा समझदारी का सौदा माना जाता है, बशर्ते निवेश दीर्घकालिक दृष्टिकोण से किया जाए।
बाजार विशेषज्ञों की राय और आगे की क्या है संभावना
कमोडिटी बाजार के दिग्गजों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में सोने की चाल पूरी तरह से अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर निर्भर करेगी। जब तक वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आती और ब्याज दरों को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, तब तक बाजार में इसी तरह की उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है।
"सोने और चांदी के बाजार में इस समय शॉर्ट-थर्म प्रॉफिट बुकिंग यानी मुनाफावसूली का दौर चल रहा है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह बाजार में धीरे-धीरे खरीदारी करने का एक अच्छा मौका हो सकता है, बशर्ते वे वैश्विक आर्थिक संकेतों पर पैनी नजर रखें।" — राहुल शर्मा, सीनियर कमोडिटी एनालिस्ट
आम जनता और छोटे खरीदारों के लिए सलाह यही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय अपनी वित्तीय जरूरत के हिसाब से ही आभूषणों या सोने की खरीद करें। त्योहारी सीजन नजदीक आने के कारण स्थानीय बाजारों में मांग बनी रह सकती है, जिससे कीमतों में एक सीमित दायरे में ही हलचल देखने को मिलने की संभावना है।






