एपल फैंस के बीच क्यों बढ़ रहा है इंटरनेशनल शॉपिंग का क्रेज
हर साल जब भी एपल का नया फोन बाजार में आता है, तो भारतीय स्टोर्स के बाहर लंबी कतारें लग जाती हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, लेकिन इस बार टेक प्रेमियों का तरीका थोड़ा बदला हुआ है। लोग सिर्फ भारत में खरीदारी करने के बजाय दुबई का रुख कर रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारत और यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के बीच आईफोन की कीमतों में मिलने वाला बड़ा अंतर है। खरीदारों का कहना है कि अगर वे दुबई जाकर फोन खरीदते हैं, तो वहां से आने-जाने का फ्लाइट टिकट और वीजा का खर्च निकालने के बाद भी उनके पैसे बच जाते हैं।
यह ट्रेंड अब धीरे-धीरे मुख्यधारा में आ रहा है और कई लोग अपनी छुट्टियों या बिजनेस ट्रिप के साथ इस खरीदारी को जोड़ रहे हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि क्रॉस-बॉर्डर प्राइसिंग का यह अंतर उपभोक्ताओं के खरीदारी करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है। लोग अब यह कैलकुलेशन करने लगे हैं कि स्थानीय स्तर पर अधिक टैक्स चुकाने से बेहतर है कि यात्रा के दौरान ही फोन खरीद लिया जाए।
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टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी का पूरा गणित
आखिर दोनों देशों की कीमतों में इतना बड़ा अंतर क्यों है? इसका सबसे बड़ा कारण टैक्स की दरें हैं। यूएई में स्मार्टफोन्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर केवल 5% वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) वसूला जाता है। इसके विपरीत, भारत में प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी, जीएसटी और अन्य करों को मिलाकर कुल टैक्स का बोझ काफी ज्यादा हो जाता है। यही वजह है कि 1.5 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले फोन पर यह अंतर सीधे तौर पर 30,000 से 40,000 रुपये तक की बचत में बदल जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब उत्पाद की मूल कीमत बहुत अधिक होती है, तो टैक्स का प्रतिशत भी बड़ी रकम बन जाता है। भारत में आयात शुल्क और अन्य लेवी के कारण कीमतें स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं, जबकि खाड़ी देशों में टैक्स प्रणाली काफी सरल और कम खर्चीली है। यही कारण है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए दुबई एक पसंदीदा शॉपिंग गंतव्य बनता जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय और मार्केट पर असर
इस पूरी स्थिति को लेकर टेक और मार्केटिंग सेक्टर के जानकारों का भी अलग नजरिया है। इस बारे में एक जाने-माने मार्केटिंग विशेषज्ञ का कहना है कि कीमतों का यह भारी अंतर उपभोक्ताओं के मानसिक गणित को पूरी तरह बदल देता है।
"कीमतों का यह बड़ा अंतर केवल यह तय नहीं करता कि लोग क्या खरीदेंगे, बल्कि यह भी तय करता है कि वे खरीदारी के लिए किस भौगोलिक स्थान को चुनेंगे। अगर यात्रा के खर्च को निकाल भी दिया जाए, तो भी यह सौदा ग्राहकों के लिए किफायती साबित हो रहा है।" — अभिषेक थॉमस, मार्केटिंग मैनेजर
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि इस तरह विदेश से सामान लाते समय देश के कस्टम नियमों और व्यक्तिगत सामान पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा का पूरा ध्यान रखना जरूरी है। ऐसा न करने पर हवाई अड्डे पर कानूनी पेच या अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ सकता है।
आईफोन के नए मॉडल्स के फीचर्स और बैटरी लाइफ
एपल द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए प्रीमियम मॉडल्स में कई बड़े तकनीकी बदलाव किए गए हैं। इन फोन्स में अब तक की सबसे बड़ी बैटरी क्षमता दी गई है, जो सिंगल चार्ज पर लंबा बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ ही, कैमरा सेटअप में भी बड़ा अपग्रेड किया गया है, जिसमें तीन अलग-अलग 48 मेगापिक्सल के लेंस शामिल हैं। कंपनी का दावा है कि ये नए प्रो मॉडल्स बेहद कम समय में तेजी से चार्ज हो जाते हैं, जिससे आधुनिक यूजर की जरूरतें आसानी से पूरी होती हैं।
बेहतर बैटरी बैकअप और शानदार कैमरा क्वालिटी की वजह से इन फोन्स की मांग वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक है। यही वजह है कि लोग हर संभव तरीके से इन डिवाइसेज को जल्द से जल्द हासिल करना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय यात्रा ही क्यों न करनी पड़े।
निष्कर्ष और आगे की स्थिति
कुल मिलाकर, दुबई से आईफोन खरीदने का यह नया चलन उपभोक्ताओं की स्मार्ट खरीदारी रणनीति का हिस्सा बन चुका है। जहां एक तरफ यह तरीका लोगों को हजारों रुपये की बचत करा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक बाजार और स्थानीय कर नीतियों के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करता है। जब तक दोनों देशों के टैक्स ढांचे में इस तरह का बड़ा फर्क रहेगा, तब तक टेक प्रेमियों द्वारा इस प्रकार की क्रॉस-बॉर्डर शॉपिंग का सिलसिला जारी रहने की पूरी संभावना है।






