रसोई गैस के दामों का उतार-चढ़ाव: आम आदमी की जेब पर कैसे पड़ा असर
भारत में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हमेशा से ही आम आदमी के बजट का एक अहम हिस्सा रही हैं। त्योहारों के इस सीजन में जब घरों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे रेहड़ी-पटरी वालों तक में गैस की खपत बढ़ जाती है, तब इसके दामों पर लोगों की खास नजर होती है। पिछले 12 सालों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी फेरबदल देखने को मिला है। कभी यह दाम घटकर बेहद कम स्तर पर आ गए, तो कभी वैश्विक बाजार की हलचल के चलते रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गए।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के आधिकारिक आंकड़ों पर अगर नजर डालें, तो साल दर साल रसोई गैस के दामों में काफी विविधता रही है। आम नागरिकों के लिए यह समझना हमेशा दिलचस्प और जरूरी रहता है कि आखिर उनके घर तक पहुंचने वाले एक सिलेंडर की कीमत किन चरणों से होकर गुजरी है और इसके पीछे कौन से आर्थिक कारक जिम्मेदार होते हैं।
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साल 2014 से 2016 के बीच आई ऐतिहासिक गिरावट
जब केंद्र में मई 2014 में नई सरकार का गठन हुआ था, उस शुरुआती दौर में दिल्ली के भीतर बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलो के इंडेन सिलेंडर की कीमत 928.50 रुपये दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में नरमी का रुख देखने को मिला, जिसका सीधा फायदा घरेलू उपभोक्ताओं को मिला।
IOCL के रिकॉर्ड बताते हैं कि अक्टूबर 2014 में सिलेंडर की कीमत घटकर 880 रुपये पर आ गई। इसके बाद के सालों में यह ग्राफ तेजी से नीचे गिरा। अक्टूबर 2015 में यही सिलेंडर 517.50 रुपये में मिलने लगा और अक्टूबर 2016 आते-आते कीमतें अपने सबसे निचले स्तर यानी महज 490 रुपये प्रति सिलेंडर पर सिमट गईं। यह वह दौर था जब एलपीजी उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी राहत मिली थी।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और एलपीजी की तय होती है कीमत
आम जनता के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि आखिर एलपीजी सिलेंडर के दाम अचानक क्यों बढ़ या घट जाते हैं। इसके पीछे का मुख्य आधार अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें होती हैं। भारत में एलपीजी की लागत निर्धारित करने के लिए अरब गल्फ बेंचमार्क को मुख्य पैमाना माना जाता है।
तेल विपणन कंपनियां (OMCs) पिछले महीने के औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी विनिमय दरों यानी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का आकलन करके हर महीने कीमतों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, सरकार और तेल कंपनियां यह भी सुनिश्चित करती हैं कि वैश्विक बाजार के हर छोटे-बड़े झटके का सीधा और भारी असर आम जनता की रसोई पर न पड़े। कई मौकों पर सरकार के निर्देशानुसार कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बढ़ोतरी को खुद पर लेते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है।
साल 2017 से 2020 के बीच कीमतों में दिखा मिलाजुला रुख
साल 2016 के बाद से रसोई गैस के दाम एक बार फिर ऊपर की ओर बढ़ने लगे। अक्टूबर 2017 आते-आते दिल्ली में सिलेंडर की कीमत बढ़कर 649 रुपये हो गई। इसके बाद वैश्विक मुद्रास्फीति और अन्य आर्थिक कारणों से अक्टूबर 2018 में यह उछलकर सीधा 879 रुपये के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
लेकिन बाजार की अनिश्चितता का सिलसिला यहीं नहीं थमा। अगले ही साल यानी अक्टूबर 2019 में दामों में फिर से सुधार हुआ और यह घटकर 605 रुपये पर आ गए। इसके बाद अक्टूबर 2020 में कोविड महामारी के शुरुआती दौर के बीच दिल्ली में 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 594 रुपये दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली।
कोविडोत्तर दौर में रिकॉर्ड ऊंचाई और फिर स्थिरता
महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था जब पटरी पर लौटने लगी, तो ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण पूरी दुनिया में ईंधन के दाम आसमान छूने लगे। भारत में भी इसका असर साफ दिखा। अक्टूबर 2021 में सिलेंडर की कीमत बढ़कर 899.50 रुपये हो गई। इसके बाद साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा संकट गहराया और 6 जुलाई 2022 को दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 1,053 रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गई।
इस भारी-भरकम कीमत से राहत दिलाने के लिए बाद के महीनों में नीतिगत कदम उठाए गए। अगस्त 2023 में दाम घटकर 903 रुपये पर आए और मार्च 2024 तक यह 803 रुपये तक नीचे आ गए। इसके बाद कीमतों में फिर से आंशिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। अप्रैल और अक्टूबर 2025 के दौरान सिलेंडर 853 रुपये में बिकता रहा। इसके बाद साल 2026 की शुरुआत में मार्च के महीने में यह बढ़कर 913 रुपये हुआ और जून 2026 से दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलो इंडेन सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर स्थिर बनी हुई है।
"अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत पर पड़ता है, जिसके आधार पर तेल कंपनियां अपनी रणनीतिक कीमतें तय करती हैं।" — ऊर्जा मंत्रालय के सूत्र
निष्कर्ष: आगे क्या हो सकता है?
त्योहारों के इस मौसम में एलपीजी सिलेंडर के संशोधित होने वाले नए दामों को लेकर हर वर्ग में उत्सुकता बनी हुई है। हालांकि पिछले कुछ महीनों से कीमतें 942 रुपये पर स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव तय करेंगे कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा। उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी है कि वे हर महीने की पहली तारीख को अपडेट होने वाले इन दामों पर अपनी नजर बनाए रखें ताकि अपने घरेलू बजट को बेहतर ढंग से प्रबंधित किया जा सके।







