जब सभी रिपोर्ट्स नॉर्मल होने के बाद भी नहीं होती प्रेग्नेंसी
परिवार बढ़ाने का सपना हर शादीशुदा जोड़े की जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत और अहम पड़ाव होता है। इसके लिए वे हर संभव प्रयास करते हैं और अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखते हैं। हालांकि, कई बार लाख कोशिशों के बावजूद जब खुशखबरी नहीं मिलती है, तो मानसिक तनाव और चिंता का स्तर बढ़ने लगता है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला हाल ही में एक फर्टिलिटी क्लीनिक में सामने आया, जिसने डॉक्टरों और खुद उस जोड़े को भी हैरानी में डाल दिया।
चिकित्सकों के पास पहुंचे इस युवा जोड़े की उम्र महज 26 साल थी और वे पिछले दो वर्षों से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे थे। हैरानी की बात यह थी कि महिला के मासिक धर्म नियमित थे, जीवनशैली काफी हद तक संतुलित थी और उनके मेडिकल अल्ट्रासाउंड तथा अन्य शुरुआती परीक्षणों में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं पाई गई थी। इसके बावजूद सकारात्मक परिणाम न मिलने के कारण वे असमंजस में थे कि आखिर उनकी राह में कौन सी अनदेखी बाधा आ रही है।
आमतौर पर ऐसे मामलों में भारतीय समाज का एक बड़ा वर्ग युवा दंपतियों को तरह-तरह के घरेलू नुस्खों, पूजा-पाठ या स्थानीय टोटकों की सलाह देना शुरू कर देता है। इस जोड़े के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके परिवार और रिश्तेदारों का मानना था कि उनकी उम्र अभी काफी कम है, इसलिए उन्हें डॉक्टरों के चक्कर काटने के बजाय थोड़ा और वक्त बिताना चाहिए। लेकिन यह जोड़ा अपनी समस्या के मूल कारण को वैज्ञानिक तरीके से समझना चाहता था, जिसके चलते वे आखिरकार एक वरिष्ठ फर्टिलिटी विशेषज्ञ के पास जा पहुंचे।
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स्पर्म काउंट सही होने का यह मतलब नहीं कि सब कुछ ठीक है
विशेषज्ञ डॉक्टर ने जब उस जोड़े की पूरी मेडिकल हिस्ट्री समझी और उनके पुराने दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन किया, तो उन्होंने कुछ अतिरिक्त और विशिष्ट जांच कराने का निर्णय लिया। इन विस्तृत परीक्षणों के बाद जो परिणाम सामने आए, उन्होंने पति को बुरी तरह हैरान कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि मुख्य समस्या पुरुष साथी के शरीर में 'लो स्पर्म मोटेलिटी' यानी शुक्राणुओं की गतिशीलता के कम होने की थी।
जब डॉक्टर ने पति को इन परिणामों के बारे में विस्तार से समझाया, तो उनका पहला सवाल यही था कि आखिर ऐसा कैसे संभव है क्योंकि उनके वीर्य परीक्षण में स्पर्म की संख्या तो पूरी तरह सामान्य आई थी। इस पर डॉक्टर ने उन्हें बहुत ही सरल शब्दों में समझाया कि केवल शुक्राणुओं की कुल गिनती ही एकमात्र पैमाना नहीं होती है। गर्भधारण की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए यह भी बेहद आवश्यक है कि वे शुक्राणु अपनी जगह से कितनी तेजी और सटीकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
"केवल स्पर्म की संख्या ही मायने नहीं रखती, उनका ठीक से मूव करना भी उतना ही जरूरी है। अगर स्पर्म तेजी से आगे नहीं बढ़ पाते, तो अंडे तक पहुंचकर उसे फर्टिलाइज करना असंभव हो जाता है।" — डॉ. महिमा, फर्टिलिटी एक्सपर्ट
आधुनिक जीवनशैली और खानपान कैसे बिगाड़ रहे हैं सेहत
अपनी रिपोर्ट में यह कमी सामने आने के बाद वह युवा पति काफी परेशान हो गया और उसने डॉक्टर से बार-बार यही पूछा कि आखिर उसके साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में पुरुषों में स्पर्म मोटेलिटी कम होने की समस्या तेजी से पैर पसार रही है और इसके पीछे कई प्रकार की आधुनिक आदतें और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।
दैनिक जीवन में जरूरत से ज्यादा धूम्रपान करना, शराब का सेवन करना और अत्यधिक मानसिक तनाव लेना शुक्राणुओं की गतिशीलता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड का अत्यधिक सेवन, शारीरिक सक्रियता की कमी और शरीर का अत्यधिक वजन यानी मोटापा भी प्रजनन स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। जब शरीर के भीतर हार्मोंस का संतुलन बिगड़ता है, तो उसका सीधा असर प्रजनन कोशिकाओं की गुणवत्ता पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की समस्याओं से घबराने के बजाय समय रहते अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, तनाव मुक्त दिनचर्या और नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर पुरुष अपनी प्रजनन क्षमता को काफी हद तक सुधार सकते हैं। जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सीय परामर्श लेना और काउंसलिंग कराना भी इस मानसिक और शारीरिक सफर को आसान बना सकता है।





