भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी दूरसंचार और डिजिटल सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) अब लॉन्चिंग के बेहद करीब पहुंच चुका है। बाजार के जानकारों और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिल रही जानकारियों के अनुसार, निवेशकों का लंबे समय से चल रहा इंतजार इस महीने यानी अक्टूबर के अंत तक खत्म हो सकता है। इस मेगा आईपीओ को लेकर घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशकों में भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio Platforms Limited) के इस प्रस्तावित आईपीओ की टाइमलाइन को लेकर वित्तीय गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सभी आवश्यक नियामक प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) ने इस साल जून में आवेदन मिलने के बाद 28 अगस्त को ही इस आईपीओ को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी थी।
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में खुल सकता है सब्सक्रिप्शन, जानें क्या है संभावित शेड्यूल
सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर के बीच आम निवेशकों के लिए खुलेगा। वहीं, बड़े और संस्थागत एंकर निवेशकों को इसके ठीक पहले 19 अक्टूबर को इस पर दांव लगाने का अवसर मिल सकता है। कंपनी की योजना इस आईपीओ को देश के प्रमुख शेयर बाजारों यानी बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) पर 28 अक्टूबर तक लिस्ट कराने की है। हालांकि, बाजार की मौजूदा चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस शेड्यूल में मामूली फेरबदल भी किया जा सकता है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जियो का यह आईपीओ अब तक की सबसे बड़ी शेयर बिक्री में से एक हो सकता है। पिछले कुछ हफ्तों में कंपनी प्रबंधन ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के साथ कई दौर की बैठकें की हैं, जिन्हें बेहद सकारात्मक माना जा रहा है। इसके अलावा घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की तरफ से भी मजबूत समर्थन के संकेत मिल रहे हैं, जिससे साफ होता है कि बाजार में इस इश्यू को लेकर जबरदस्त डिमांड रहने वाली है।
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कर्जमुक्त होने की दिशा में रिलायंस जियो का बड़ा कदम
यह प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश शेयरों (Fresh Issues) पर आधारित होगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी इस आईपीओ के जरिए जो भी पूंजी जुटाएगी, उसका सीधा इस्तेमाल बिजनेस के विस्तार और वित्तीय मजबूती के लिए किया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस इश्यू से मिलने वाले फंड में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग कंपनी अपने ऊपर चढ़े कर्ज का पूरा या आंशिक भुगतान करने में करेगी। बाकी बची हुई राशि का इस्तेमाल जनरल कॉरपोरेट उद्देश्यों और नई तकनीकों के विकास के लिए किया जाएगा।
कंपनी के इस कदम से इसकी वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत होगी। एक डिजिटल सेवा कंपनी के रूप में जियो ने मोबिलिटी, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में अपनी पकड़ को काफी मजबूत किया है। 31 मार्च तक के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस जियो इन्फोकॉम के पास 524.4 मिलियन यानी 52 करोड़ से अधिक ग्राहक थे, जो इसे भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बनाते हैं। इसके अलावा कंपनी के पास 268.5 मिलियन 5G ग्राहक भी हैं, जो चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क है।
रिटेल निवेशकों और आम लोगों के लिए क्या है खास मौका
इस मेगा आईपीओ में खुदरा (Retail) और हाई नेट वर्थ वाले निवेशकों (HNI) के लिए लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित किए जाने की संभावना है। शेष राशि संस्थागत निवेशकों के लिए रखी जाएगी। चूंकि जियो को अब केवल एक टेलीकॉम ऑपरेटर के बजाय एक मजबूत टेक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है, इसलिए छोटे निवेशकों के बीच भी इस शेयर को लेकर भारी क्रेज देखने को मिल रहा है।
"जियो का यह आईपीओ भारतीय資本 बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। डिजिटल और 5G सेक्टर में कंपनी की बादशाहत को देखते हुए निवेशकों का रुझान इसमें सबसे अलग रहने की उम्मीद है। हालांकि, निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह के बाद ही निवेश का फैसला करना चाहिए।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक
ग्रे मार्केट और वैल्युएशन पर टिकी हैं निवेशकों की निगाहें
फिलहाल ग्रे मार्केट में इस आईपीओ को लेकर आधिकारिक हलचल शुरू नहीं हुई है, क्योंकि कंपनी की तरफ से अभी तक प्राइस बैंड (Price Band) की घोषणा नहीं की गई है। जैसे ही शेयरों का मूल्य दायरा तय होगा, ग्रे मार्केट में भी इसके प्रीमियम को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। अगले हफ्ते कंपनी द्वारा वैल्युएशन और कीमत को लेकर अंतिम निर्णय लिए जाने की पूरी उम्मीद है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि बाजार में इस समय भले ही कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हो, लेकिन जियो जैसी दिग्गज कंपनी के आईपीओ पर इसका कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने पोर्टफोलियो और वित्तीय लक्ष्यों का आकलन जरूर कर लें।






