भारतीय कार बाजार का कड़ा इम्तिहान और ग्राहकों का बदलता मिजाज
भारतीय कार बाजार में किसी भी नए ब्रांड या मॉडल के लिए अपनी पैठ बनाना और उसे बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है। यहां का ट्रेंड, ग्राहकों की बदलती पसंद और ऑटोमोबाइल सेक्टर की तगड़ी प्रतियोगिता किसी भी दिग्गज गाड़ी के लिए अग्निपरीक्षा साबित होती है। इस साल की शुरुआत में जब फ्रेंच कार निर्माता कंपनी रेनॉ (Renault) ने अपनी मशहूर और लीजेंड्री एसयूवी 'डस्टर' की भारतीय बाजार में वापसी का ऐलान किया था, तो ऑटोमोबाइल प्रेमियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई थी। कंपनी ने इस पुरानी यादों को ताजा करने वाली गाड़ी के नए अवतार को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे और शुरुआती माहौल भी काफी सकारात्मक रहा था।
जनवरी के अंत में आधिकारिक पर्दा उठाने के बाद मार्च महीने में रेनॉ डस्टर को भारतीय सड़कों पर आधिकारिक तौर पर उतार दिया गया था। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 10.49 लाख रुपये तय की थी, जो इस सेगमेंट के लिहाज से काफी आकर्षक मानी जा रही थी। बाजार में कदम रखते ही डस्टर ने शुरुआती दिनों में जबरदस्त धूम मचाई और मार्च में डिलीवरी शुरू होते ही इसके 1,402 यूनिट बिक गए। इसके बाद अप्रैल महीने में बिक्री में और इजाफा हुआ और कुल 2,359 यूनिट डिस्पैच किए गए। इसे देखकर ऐसा लगा मानो भारतीय ग्राहकों ने एक बार फिर इस लीजेंड को हाथों-हाथ अपना लिया है और यह गाड़ी सेगमेंट में तहलका मचा देगी।
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मई आते ही नजर क्यों लगी? लगातार गिरते बिक्री के आंकड़े
लेकिन शुरुआती उत्साह और चमकदार आंकड़ों का यह दौर बहुत लंबा नहीं चल सका। मई का महीना आते ही मानों इस लीजेंड एसयूवी पर किसी की बुरी नजर लग गई। मई में डस्टर की बिक्री धड़ाम से नीचे गिर गई और यह आंकड़ा घटकर 1,267 यूनिट पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती बुकिंग पूरी होने के बाद ग्राहकों का उत्साह धीरे-धीरे ठंडा पड़ने लगा था। जून के महीने में तो स्थिति और भी चिंताजनक हो गई, जब कंपनी बमुश्किल 1,011 यूनिट ही बेच पाई। हालात इतने तेजी से बदले कि जुलाई आते-आते यह बिक्री का आंकड़ा सीधा आधा यानी 512 यूनिट पर आ गया।
सबसे खराब स्थिति बीते अगस्त महीने में देखने को मिली, जब इस बहुप्रतीक्षित एसयूवी के कुल 406 यूनिट ही बिक सके। मार्च से लेकर अगस्त तक के इन छह महीनों में रेनॉ डस्टर की कुल बिक्री का आंकड़ा बमुश्किल 6,957 यूनिट्स तक ही पहुंच पाया है। ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आज के समय में किसी लोकप्रिय एसयूवी के लिए एक महीने में इतने कम आंकड़े चिंता का बड़ा विषय हैं। कई मुख्य प्रतिद्वंद्वी कंपनियां एक महीने में इससे कई गुना ज्यादा गाड़ियां बेच रही हैं। ऐसे में रेनॉ के लिए भारतीय बाजार में अपनी खोई हुई साख को दोबारा मजबूती से स्थापित करना एक कड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
इंजन विकल्पों और हाइब्रिड वेरिएंट का इंतजार
मौजूदा समय में रेनॉ डस्टर को दो मुख्य टर्बो पेट्रोल इंजन विकल्पों (1.0 लीटर और 1.3 लीटर) के साथ बाजार में पेश किया गया है। इसके अलावा कंपनी ने एक दमदार 1.8 लीटर हाइब्रिड इंजन विकल्प का भी वादा किया था। हालांकि, अभी बाजार में केवल टर्बो वेरिएंट की ही बिक्री की जा रही है, जो सीमित खरीदारों को ही आकर्षित कर पा रही है। ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में भारतीय उपभोक्ता बेहतर माइलेज और आधुनिक तकनीक वाले विकल्पों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले लोग अब स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिसके कारण पारंपरिक टर्बो इंजन वाली गाड़ियों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
कंपनी ने पहले ही घोषणा की थी कि इस साल के फेस्टिव सीजन तक 1.8 लीटर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट की बिक्री भी भारतीय बाजार में शुरू कर दी जाएगी। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि ज्यादातर खरीदार इसी स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें बेहतर ईंधन दक्षता (Mileage) मिल सके। वर्तमान में कम बिक्री का एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग फेस्टिव सीजन में आने वाले नए और एडवांस वेरिएंट्स का इंतजार करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं। डीलरशिप्स पर भी ग्राहकों की पूछताछ का रुख इसी ओर ज्यादा देखा जा रहा है।
क्या फेस्टिव सीजन में पलटेगा पासा?
ऑटोमोबाइल बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि रेनॉ के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। यदि कंपनी आगामी फेस्टिव सीजन के दौरान अपने 1.8 लीटर स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वेरिएंट को समय पर और प्रतिस्पर्धी कीमत पर लॉन्च करने में सफल रहती है, तो डस्टर की रफ्तार एक बार फिर से पटरी पर लौट सकती है। भारतीय उपभोक्ता हमेशा से दमदार एसयूवी और बेहतर माइलेज के संयोजन को पसंद करते आए हैं। यदि नए वेरिएंट में यह खूबी खरीदारों को संतुष्ट कर पाई, तो इस लीजेंड की बिक्री में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
"भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में टिके रहने के लिए केवल पुरानी लोकप्रियता काफी नहीं होती, बल्कि समय की मांग के अनुसार आधुनिक तकनीक और बेहतरीन माइलेज देना अनिवार्य हो जाता है। आगामी फेस्टिव सीजन तय करेगा कि यह लीजेंड वापसी कर पाता है या नहीं।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट, द फ्रीलांस
कुल मिलाकर, रेनॉ डस्टर के सामने इस समय अस्तित्व और लोकप्रियता दोनों की बड़ी परीक्षा है। कंपनी को अपनी मार्केटिंग रणनीति के साथ-साथ ग्राहकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए जल्द ही नए और किफायती विकल्प पेश करने होंगे। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या रेनॉ अपनी इस प्रतिष्ठित एसयूवी को भारतीय सड़कों पर दोबारा उसका पुराना रुतबा दिला पाती है या यह गाड़ी खरीदारों के बीच संघर्ष करती रह जाएगी।





