सूरत के किड्स जोन में बच्चों की मामूली सी बात पर भड़का गुस्सा
गुजरात के हीरा नगरी कहे जाने वाले सूरत शहर से एक बेहद दर्दनाक और इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहां एक रिहायशी इमारत के परिसर बने बच्चों के खेलने की जगह यानी किड्स जोन में एक मामूली सी बात ने खौफनाक रूप ले लिया। खेल के दौरान एक छोटी सी गेंद के लग जाने पर एक वयस्क व्यक्ति ने अपनी सारी मर्यादाएं ताक पर रख दीं और नौ साल के एक मासूम बच्चे पर जुल्म ढा दिया। इस घटना के सामने आने के बाद से ही स्थानीय निवासियों और आम लोगों के बीच भारी रोष व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना सूरत के अलथाण इलाके में स्थित एक जानी-मानी सोसायटी के अंदर हुई। शुक्रवार की शाम का वक्त था और आसपास के तमाम बच्चे अपने घरों से निकलकर नीचे पार्क और किड्स जोन में खेलकूद में व्यस्त थे। इसी दौरान वहां साइंस कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत जागृतिबेन सोनालिया का नौ साल का बेटा हितार्थ भी अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। बच्चों का यूं हंसना-खेलना और दौड़ना आम दिनों की तरह ही चल रहा था, लेकिन किसी को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह सामान्य माहौल एक खौफनाक और हिंसक वारदात में बदल जाएगा।
संबंधित खबरें
स्माइली बॉल लगने से भड़का आरोपी, मासूम पर बरसाए थप्पड़
घटना के विस्तार से सामने आए विवरण के मुताबिक, खेल-खेल में नौ साल के हितार्थ के हाथ से एक हल्की 'स्माइली बॉल' उछल गई और वह वहीं पास में खेल रही एक अन्य बच्ची को जा लगी। वह बच्ची उसी सोसायटी में रहने वाले वर्धन शाह की बेटी बताई जा रही है। बॉल के छू जाने या लग जाने जैसी सामान्य सी बचकानी घटना पर वर्धन शाह अपना आपा खो बैठा। उसने बच्चों के इस साधारण से खेल को नजरअंदाज करने के बजाय सीधे तौर पर आक्रामक रुख अपना लिया और मासूम हितार्थ को गंदी-गंदी गालियां देना शुरू कर दिया।
गुस्से से आगबबूला हुए वर्धन शाह का मन इतने भर से नहीं भरा तो उसने सीधे बच्चे पर हाथ उठा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और बाद में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने हितार्थ को एक के बाद एक ताबड़तोड़ पांच से छह जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। थप्पड़ों की रफ्तार और ताकत इतनी अधिक थी कि वह नौ साल का बच्चा अपनी सुधबुध खो बैठा और सीधा जमीन पर फर्श पर जा गिरा। एक वयस्क व्यक्ति द्वारा इस तरह एक छोटे बच्चे पर हाथ उठाए जाने से पार्क में मौजूद अन्य बच्चे भी सहम गए और डर के मारे दूर भाग खड़े हुए।
कान पकड़कर गिड़गिड़ाता रहा बच्चा, फिर भी नहीं पसीजा दिल
जब जमीन पर गिरे हुए मासूम हितार्थ ने अपनी जान बचाने और अपनी गलती (यदि कोई थी) के लिए माफी मांगनी चाही, तो उसने पूरी तरह समर्पण का भाव दिखाते हुए अपने दोनों कान पकड़ लिए। उसने रोते हुए हाथ जोड़े और आरोपी से छोड़ देने की गुहार लगाई। आमतौर पर बच्चों को रोते और कान पकड़कर माफी मांगते देख किसी भी इंसान का दिल पसीज जाता है, लेकिन वर्धन शाह के मन में थोड़ी सी भी दया नहीं आई। उसने माफी मांग रहे लाचार बच्चे पर तरस खाने के बजाय और अधिक क्रूरता दिखाई।
बच्चे की मां जागृतिबेन सोनालिया ने मीडिया और पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बेहद दर्दनाक खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने कान पकड़कर माफी मांग रहे मासूम को एक बार फिर दबोच लिया और उसे दो-तीन थप्पड़ और जड़ दिए। इस बेरहमी के कारण बच्चे के चेहरे, विशेषकर उसके गालों पर गंभीर सूजन आ गई और उसके कान के भीतरी हिस्से में गहरी चोट पहुंच गई। बच्चा बुरी तरह सुन्न पड़ गया और सदमे की स्थिति में चला गया।
सिसकते हुए घर पहुंचा बच्चा, सीसीटीवी फुटेज से खुला राज
घटना के तुरंत बाद डरा-सहमा हितार्थ रोते-सिसकते हुए अपने घर की तरफ भागा। जब वह घर पहुंचा तो उसके मुंह से ठीक से आवाज नहीं निकल रही थी और वह बुरी तरह कांप रहा था। उसके चेहरे और गालों पर साफ तौर पर चोट के निशान और सूजन दिखाई दे रही थी। परिवार के सदस्यों ने जब उससे इतनी दहशत में होने का कारण पूछा, तो उसने रोते हुए पूरी आपबीती अपने माता-पिता को सुनाई। शुरुआत में परिजनों को यकीन ही नहीं हुआ कि कोई पड़ोसी किसी बच्चे के साथ इतनी हैवानियत कर सकता है।
सच्चाई का पता लगाने के लिए जब परिवार के लोगों ने सोसायटी के सुरक्षा प्रबंधों को खंगाला और किड्स जोन के ठीक सामने लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की जांच की, तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। कैमरे में वह खौफनाक मंजर साफ-साफ रिकॉर्ड हो चुका था जिसमें वर्धन शाह उस नौ साल के मासूम को पीटते हुए और जमीन पर गिराते हुए साफ नजर आ रहा था। फुटेज देखने के बाद बच्चे के परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई कि मामूली सी बॉल लगने पर किसी की मानसिकता इतनी गिर सकती है।
रात बीतते बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती
मानसिक सदमे और शारीरिक प्रताड़ना के बाद उस रात हितार्थ की तबीयत अचानक तेजी से बिगड़ने लगी। अत्यधिक रोने, डर और कान पर पड़े जोरदार थप्पड़ के दबाव के कारण उसे असहनीय दर्द होने लगा। रात भर परिवार वाले उसे संभालते रहे, लेकिन सुबह होते-होते उसकी स्थिति को देखते हुए कोई जोखिम लेना उचित नहीं समझा गया। परिजनों ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया और कान तथा चेहरे पर आई चोटों को देखते हुए उसे मेडिकल ऑब्जर्वेशन के तहत भर्ती कर लिया।
अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से करा रहे अपने बेटे को देखकर मां जागृतिबेन का कलेजा फट गया। एक साइंस कॉलेज में प्रोफेसर होने के नाते उन्होंने कानून का सहारा लेने का फैसला किया और तुरंत स्थानीय थाने का रुख किया। उन्होंने बिना डरे इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और आरोपी के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, एसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी जांच
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए अलथान पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी वर्धन शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 115(2) तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(आर) के तहत औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है। चूंकि मामला बच्चों की सुरक्षा और एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा की गई गुंडागर्दी से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच की कमान खुद उच्च अधिकारियों ने संभाली है।
"बच्चों के बीच खेल के दौरान इस तरह की हिंसक और क्रूर हरकत कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। आरोपी के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहराई से तहकीकात की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" — जेडआर देसाई, एसीपी (एच डिवीजन, सूरत)
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच अब एच डिवीजन के एसीपी जेडआर देसाई को सौंप दी गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज को मुख्य साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रख चुकी है और मौके पर मौजूद अन्य बच्चों तथा चश्मदीदों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर शहरी रिहायशी सोसायटियों में रहने वाले लोगों की मानसिकता, बच्चों की सुरक्षा और सह-अस्तित्व की भावना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर कोई यही मांग कर रहा है कि इस तरह के हिंसक स्वभाव वाले लोगों पर नकेल कसना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे को इस प्रकार की प्रताड़ना का शिकार न होना पड़े।








