उत्तराखंड की राजनीति में एक नई पहल: राजधानी से बाहर सीमांत क्षेत्र में उतरी धामी सरकार
उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और शासन संचालन के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य गठन के लगभग 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार सूबे की कैबिनेट बैठक राजधानी देहरादून की चार दीवारों से बाहर निकलकर सीधे भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा में आयोजित की गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में हुई इस अनूठी बैठक ने यह साबित कर दिया है कि सरकार अब योजनाओं और फैसलों को आम जनता के একেবারে करीब ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कुल 25 से 26 प्रमुख प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श किया गया और कई नीतिगत फैसलों पर औपचारिक मुहर लगाई गई। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर की वास्तविक समस्याओं को समझना और सीमांत इलाकों के विकास को गति देना है। नेपाल सीमा से लगे इन क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता की गहरी जड़ें हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्य के सुदूर कोनों तक विकास की रोशनी पहुंचाने का संकल्प लिया है।
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रेजिडेंट डॉक्टरों की बड़ी मांग पूरी: अब मिलेगा एक लाख रुपये से ज्यादा स्टाइपेंड
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े युवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में धामी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में लिए गए सबसे बड़े फैसलों में से एक रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी करना रहा। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों का स्टाइपेंड, जो पहले लगभग 75 हजार रुपये हुआ करता था, उसे अब बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये से अधिक कर दिया गया है।
चिकित्सकों का लंबे समय से यह मानना था कि उनके काम के घंटों और जिम्मेदारियों के मुकाबले उनका पारिश्रमिक कम है। सरकार के इस कदम से न केवल मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। चिकित्सा जगत में इस फैसले का चौतरफा स्वागत किया गया है और इसे एक दूरदर्शी निर्णय बताया जा रहा है।
भूमि नियमितीकरण की डेडलाइन एक साल बढ़ी, हजारों परिवारों को मिली बड़ी राहत
आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने और लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने एक और बड़ा दांव खेला है। कैबिनेट ने देहरादून, लालकुआं और बिंदुकट्टा जैसे घनी आबादी वाले और संवेदनशील क्षेत्रों में 'क्लास बी' भूमि के नियमितीकरण की समय सीमा को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले से इन इलाकों में बरसों से पक्के मकानों और जमीनों के मालिकाना हक का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस फैसले से उनके लंबे समय से अटके हुए संपत्ति के कागजात और कानूनी हक मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार की इस पहल से न केवल शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, बल्कि लोगों को अपने आशियाने को लेकर बनी अनिश्चितता से भी स्थायी मुक्ति मिलेगी।
कुक्कुट पालकों को प्रोत्साहन और रोजगार के नए अवसरों का सृजन
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि-संबंधित व्यवसायों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए भी कई आकर्षक प्रावधानों को मंजूरी दी है। बैठक में कुक्कुट पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) से जुड़े कारोबारियों के लिए विशेष सब्सिडी और आर्थिक सहायता का ऐलान किया गया है, जिसके तहत लगभग दो करोड़ रुपये तक के प्रावधानों को हरी झंडी मिली है। सरकार का मानना है कि पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए पशुपालन और पोल्ट्री सेक्टर बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसके साथ ही युवाओं की स्किलिंग और विभागीय समन्वय से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई गई है, ताकि राज्य के नौजवानों को नौकरी की तलाश में बाहर न भटकना पड़े और वे स्थानीय स्तर पर ही आजीविका के नए साधन जुटा सकें। सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, पर्यटन और आधारभूत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।
चारधाम यात्रा प्रबंधन और कैंची धाम के भारी ट्रैफिक पर भी मंथन
राज्य में वर्तमान में चल रही पवित्र चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं को और अधिक सुचारू बनाने के लिए भी मंत्रिमंडल स्तर पर गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि तीर्थयात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सड़कों की स्थिति को दुरुस्त रखा जाए। इसके अलावा, हाल के महीनों में देश-दुनिया से पहुंच रहे पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण कैंची धाम में उत्पन्न हो रही यातायात की समस्याओं के समाधान पर भी विशेष रूप से विचार किया गया।
"हमने अपने सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बढ़ाया है, जो पहले लगभग 75,000 रुपये था, उसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक कर दिया गया है। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्रों के विकास और आम जनता की सहूलियत के लिए करीब 26 महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।" — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड
कैबिनेट के इन तमाम फैसलों से यह साफ हो गया है कि चुनावी वर्ष और जनता की अपेक्षाओं के बीच तालमेल बैठाते हुए सरकार हर वर्ग को साधने का प्रयास कर रही है। सीमांत जिले से शुरू हुई इस अनोखी कैबिनेट बैठक के दूरगामी परिणाम आने वाले समय में उत्तराखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा तय करेंगे।







