क्या एक बार ठीक होने के बाद दोबारा हो सकता है डेंगू?
मानसून और उसके बाद के मौसम में डेंगू का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। इस दौरान अस्पतालों में तेज बुखार, बदन दर्द, प्लेटलेट्स गिरने और गंभीर कमजोरी के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखने को मिलता है। आमतौर पर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि अगर किसी व्यक्ति को एक बार डेंगू हो चुका है, तो उसे जीवनभर के लिए इस बीमारी से सुरक्षा मिल गई है। लोगों का मानना होता है कि अब उन्हें दोबारा डेंगू कभी नहीं हो सकता। लेकिन मेडिकल साइंस और हेल्थ एक्सपर्ट्स इस धारणा को पूरी तरह से गलत मानते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डेंगू का वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह नहीं है जिसके खिलाफ शरीर में एक बार स्थायी और व्यापक सुरक्षा बन जाए। डेंगू के मामले में यह नियम लागू नहीं होता है। अगर कोई व्यक्ति पहले डेंगू की चपेट में आ चुका है, तो इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि उसे भविष्य में दोबारा यह संक्रमण नहीं हो सकता। बल्कि, कुछ खास परिस्थितियों में दोबारा होने वाला डेंगू पहली बार की तुलना में कहीं अधिक गंभीर रूप ले सकता है और मरीज की सेहत पर भारी पड़ सकता है।
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डेंगू वायरस के चार अलग-अलग रूप और उनका असर
इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए दिल्ली स्थित आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की इंटरनल मेडिसिन विभाग की सीनियर कंसलटेंट डॉ. विनीता सिंह टंडन बताती हैं कि डेंगू का वायरस कोई एक, दो प्रकार का नहीं बल्कि इसके कुल चार प्रमुख सेरोटाइप्स होते हैं। इन चारों प्रकारों को वैज्ञानिक भाषा में DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 के रूप में जाना जाता है। जब किसी इंसान को पहली बार डेंगू होता है, तो उसका शरीर उस खास सेरोटाइप वायरस के खिलाफ मजबूत और लंबी अवधि तक रहने वाली इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है।
हालांकि, यहाँ यह समझना सबसे ज्यादा जरूरी है कि एक सेरोटाइप के खिलाफ बनी इम्युनिटी बाकी के तीन बचे हुए सेरोटाइप्स से शरीर की रक्षा नहीं करती है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि कोई मरीज पहले DENV-1 से संक्रमित हुआ था, तो भविष्य में वह DENV-2, DENV-3 या DENV-4 में से किसी अन्य वायरस से दोबारा संक्रमित हो सकता है। यही मुख्य वजह है कि एक बार डेंगू का मरीज बन चुका व्यक्ति भी अपने जीवन में फिर से डेंगू की चपेट में आ सकता है। हालांकि, इसका यह अर्थ भी नहीं है कि किसी व्यक्ति को चारों सेरोटाइप के संक्रमण के कारण जीवन में चार बार अलग-अलग डेंगू हो जाएगा।
क्यों खतरनाक माना जाता है दूसरी बार का डेंगू संक्रमण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को दूसरी बार किसी अलग सेरोटाइप के डेंगू वायरस का सामना करना पड़ता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम का रिस्पांस अलग तरीके से काम करता है। कई मेडिकल रिसर्च और मामलों में यह देखा गया है कि दूसरी बार का संक्रमण शरीर पर ज्यादा भारी पड़ सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब कतई नहीं है कि दूसरी बार डेंगू होने पर हर मरीज की हालत गंभीर ही होगी और उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ेगा। हर इंसान के शरीर की बनावट, उसकी पुरानी इम्युनिटी और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए संक्रमण का असर भी हर मरीज पर अलग-अलग रूप में दिखाई देता है।
"डेल्यू वायरस के चार प्रमुख सेरोटाइप्स होते हैं। एक प्रकार के डेंगू वायरस का इलाज होने के बाद अगर दूसरी प्रकार का डेंगू वायरस काट ले, तो दोबारा डेंगू हो सकता है और यह गंभीर भी हो सकता है। हालांकि, हर मरीज में इसका असर अलग हो सकता है, लेकिन सतर्क रहना बहुत जरूरी है।" — डॉ. विनीता सिंह टंडन, सीनियर कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन
दूसरी बार डेंगू होने पर बुखार, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में भयंकर दर्द तथा अत्यधिक थकान जैसे लक्षण पहली बार की तरह ही नजर आ सकते हैं। लेकिन सिर्फ शुरुआती लक्षणों के आधार पर यह तय कर पाना बहुत मुश्किल होता है कि बीमारी कितनी गंभीर होगी। जिन लोगों को पहले भी कभी डेंगू हो चुका है, उन्हें बुखार उतरने के बाद के दिनों में अपनी सेहत पर बहुत बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि असली खतरे की शुरुआत अक्सर बुखार कम होने के बाद ही होती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी और जरूरी सावधानियां
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, गंभीर डेंगू के कई प्रमुख लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं जब मरीज का शरीर का तापमान यानी बुखार कम होने लगता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में क्रिटिकल फेज भी कहा जाता है। यदि बुखार उतरने के बाद मरीज को अत्यधिक कमजोरी, पेट में लगातार दर्द, बार-बार उल्टी आना, सांस लेने में तकलीफ या शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक पल भी गंवाए तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अस्पताल में जांच करानी चाहिए।
डॉ. विनीता सिंह टंडन सलाह देती हैं कि यदि किसी व्यक्ति को दोबारा डेंगू हो जाता है, तो उसे घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। समय पर सही डॉक्टर की सलाह लेकर दवाइयों का कोर्स पूरा करने और सही मात्रा में फ्लूइड लेने से इस गंभीर स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है। डॉक्टर की देखरेख में रहकर प्लेटलेट्स काउंट की नियमित जांच कराते रहना चाहिए।
निष्कर्ष और बचाव के उपाय
संक्षेप में कहें तो, एक बार डेंगू होने के बाद दोबारा संक्रमण होना मरीज के शरीर के लिए काफी थका देने वाला और कष्टदायक हो सकता है। बार-बार तेज बुखार, शरीर के जोड़ों में दर्द और डिहाइड्रेशन के कारण शरीर अंदर से पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में रिकवरी में भी सामान्य से अधिक समय लग सकता है। यदि संक्रमण के ठीक होने के बाद भी कई हफ्तों तक अत्यधिक कमजोरी बनी रहे या लगातार बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें और तुरंत डॉक्टर से मिलकर पूरी स्वास्थ्य जांच करवाएं। अपने आसपास पानी जमा न होने दें और मच्छरों से बचाव के तमाम उपाय अपनाएं।






