वाराणसी — ग्राउंड ब्यूरो — काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में छात्र राजनीति एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने पिछले अठारह दिनों से चल रहे अपने आंदोलन के बाद सीधा कदम उठाया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज होकर सीधे मुख्य प्रशासनिक भवन यानी कुलपति कार्यालय पर ताला जड़ दिया। छात्रों का साफ कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है और जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है।
छात्र नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले कई हफ्तों से सिर्फ कागजी कार्रवाई के जरिए छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। आंदोलन कर रहे छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा। इस तालाबंदी के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल और सुरक्षा गार्डों की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
बीएचयू प्रशासन पर छात्रों को गुमराह करने का गंभीर आरोप
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया लेकिन हर बार उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी। छात्र संघ चुनाव की बहाली, हॉस्टल की समस्याओं और समय पर परीक्षा परिणाम घोषित करने जैसी बुनियादी मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। अठारह दिनों तक लगातार शांतिपूर्ण धरने और प्रदर्शन के बाद जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो छात्रों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर ही ताला लगा दिया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि छात्रों की कई मांगों पर पहले ही समिति गठित कर दी गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि ताला बंद करने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा बल्कि चर्चा के रास्ते ही बात बन सकती है। हालांकि, छात्र इस पुराने आश्वासन के मूड में बिल्कुल नहीं हैं और वे किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी से मौके पर आकर लिखित में वादा करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
ओडिशा और अन्य राज्यों में भी एबीवीपी की सक्रियता तेज
दूसरी ओर, केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी छात्र संगठनों की गतिविधियां सुर्खियों में बनी हुई हैं। ओडिशा में चल रहे छात्रसंघ चुनाव के माहौल के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एबीवीपी का एक प्रत्याशी अचानक अपने हॉस्टल से रहस्यमय तरीके से गायब हो गया है। इस घटना के बाद से स्थानीय पुलिस और छात्र संगठन दोनों में हड़कंप मच गया है। पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गायब होने के पीछे कोई राजनीतिक साजिश है या कोई अन्य व्यक्तिगत कारण जुड़ा हुआ है।
इसके अलावा, छात्रवृत्ति फॉर्म भरने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर भी एबीवीपी ने आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में छात्रों को ऑनलाइन फॉर्म भरने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह से अंतिम तिथि निकलने का डर सता रहा है। विद्यार्थी परिषद ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि को कम से कम एक महीने के लिए आगे बढ़ाया जाए ताकि कोई भी गरीब और जरूरतमंद छात्र इस वित्तीय मदद से वंचित न रह सके। इन सभी मुद्दों पर देश भर के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है।
महिला सुरक्षा और स्थानीय सियासत पर गरमाई राजनीति
इन तमाम शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों के बीच महिला सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर भी राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष के नेता एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम लगातार इन सभी घटनाओं पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि छात्रों की आवाज बिना किसी फिल्टर के पाठकों तक पहुंचे। आने वाले दिनों में इन प्रदर्शनों का दायरा और बढ़ सकता है क्योंकि छात्र अपनी मांगों को लेकर अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं।





