उत्तर प्रदेश की राजनीति में बढ़ा सियासी पारा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा सियासी हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव की कार्यशैली और उनकी कथित तौर पर मंगाई गई 20 करोड़ रुपये की लग्जरी गाड़ी को लेकर करारा तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए अखिलेश यादव की राजनीति को 'वर्क फ्रॉम होम' करार दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। सुभासपा प्रमुख अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और इस बार उन्होंने सीधे तौर पर सपा प्रमुख की जीवनशैली और जनता के बीच उनकी सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं। राजभर का यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर तमाम दल अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।
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'वर्क फ्रॉम होम' वाली राजनीति पर तीखा तंज
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि उनकी 'वर्क फ्रॉम होम' वाली राजनीति कैसी चल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एसी कमरे में बैठकर कंप्यूटर या लैपटॉप से काम करने का चलन तो कॉरपोरेट सेक्टर में सुना था, लेकिन अब राजनीति में भी इसका नया रूप देखने को मिल रहा है। राजभर के मुताबिक, जनता के बीच जाकर पसीना बहाने के बजाय घर से ही पार्टी चलाना और सोशल मीडिया के जरिए बयानबाजी करना सपा प्रमुख की आदत बन चुकी है।
मंत्री राजभर ने आगे कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समझ रही है कि कौन सा नेता जमीन पर उतरकर लोगों के सुख-दुख में शामिल होता है और कौन एयरकंडीशन कमरों से बाहर निकलने से बचता है। उन्होंने कहा कि जनता चुनाव के समय ऐसे नेताओं को करारा जवाब देती है जो केवल खास मौकों पर या चुनावी मौसम में ही जनता के बीच नजर आते हैं, जबकि बाकी समय एसी कमरों तक ही सीमित रहते हैं।
20 करोड़ की लग्जरी गाड़ी पर छिड़ा घमासान
इस सियासी हमले के केंद्र में अखिलेश यादव की एक कथित लग्जरी गाड़ी भी है। ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया है कि अखिलेश यादव ने करीब 20 करोड़ रुपये की बेहद महंगी 'हॉलीवुड टाइप' भगवा रंग की गाड़ी मंगाई है। राजभर ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर कभी चुनाव प्रचार के लिए घर से बाहर निकलना भी पड़े, तो भी सपा प्रमुख को गाड़ी के भीतर बिल्कुल घर जैसा और आरामदायक माहौल मिलता रहे, इसलिए इस तरह की बख्तरबंद और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस गाड़ी का इंतजाम किया गया है।
राजभर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि इतनी महंगी और हाई-टेक गाड़ी का इस्तेमाल करने वाले नेता आखिर जमीन से जुड़े होने का दावा कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब गाड़ी के भीतर ही सभी सुख-सुविधाएं मौजूद होंगी, तो सड़क की धूल और जनता की वास्तविक समस्याओं का अहसास कैसे होगा। यह गाड़ी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का एक बड़ा विषय बन गई है, जिस पर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं।
"अखिलेश जी, ‘वर्क फ्रॉम होम’ कैसा चल रहा है? एसी में बैठकर पीसी वाला वर्क फ्रॉम होम। गरीबों और दलितों से दूरी बनाने के लिए ही 20 करोड़ की लग्जरी गाड़ी मंगाई गई है, ताकि जनता के बीच जाने पर भी घर जैसा आराम मिलता रहे।" — ओम प्रकाश राजभर, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश
दलितों और पिछड़ों की राजनीति पर सवाल
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपने इस हमले में सामाजिक न्याय और दलित-पिछड़ों के मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख को गरीबों, दलितों और अति पिछड़ों के बीच जाने से डर लगता है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि शायद उन्हें इस बात का डर सताता है कि यदि कोई गरीब या दलित व्यक्ति उनसे हाथ मिला लेगा, तो उन्हें सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करना पड़ेगा। यही वजह है कि ऐसी लिफ्ट, रूफटॉप और सुरक्षित गाड़ियों का इंतजाम किया जा रहा है जिससे आम जनता सीधी दूरी पर रहे।
राजभर ने कहा कि जो नेता खुद को पिछड़ों और शोषितों का सबसे बड़ा मसीहा होने का दावा करते हैं, वे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब इन बातों को अच्छी तरह समझ चुकी है और किसी के दिखावे में आने वाली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की जनता इन तमाम मुद्दों पर अपना फैसला सुनाएगी और दिखावे की राजनीति करने वालों को नकार देगी।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक हलचल
ओम प्रकाश राजभर के इस तीखे हमले के बाद समाजवादी पार्टी की तरफ से भी पलटवार की संभावना जताई जा रही है। यूपी की राजनीति में बयानों के तीर चलना आम बात है, लेकिन व्यक्तिगत जीवनशैली और महंगी गाड़ियों को लेकर इस तरह के हमले सियासी सरगर्मी को और बढ़ा देते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान दोनों पक्षों के बीच वैचारिक और राजनीतिक दूरियों को और गहरा करते हैं।
एक तरफ जहां सत्ता पक्ष लगातार विपक्ष के नेताओं के आचरण और तौर-तरीकों पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भी सरकार की नीतियों और कामकाज को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। बहरहाल, 20 करोड़ की गाड़ी और 'वर्क फ्रॉम होम' के इस सियासी ड्रामे ने एक बार फिर से यूपी की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है, और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।





