राजस्थान के किसानों को बड़ी सौगात, अटकी हुई सब्सिडी का होगा भुगतान
राजस्थान के अन्नदाताओं के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रशासनिक पेचीदगियों और योजना के बंद होने के कारण अटकी पड़ी अटल भूजल योजना की करीब 158 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी राशि के भुगतान का रास्ता अब पूरी तरह से साफ हो चुका है। राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम उठाते हुए किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। जिन किसानों ने योजना के दिशा-निर्देशों के तहत तय समय सीमा में अपने खेतों में जल संरक्षण से जुड़े कार्य पूरे कर लिए थे, लेकिन उन्हें अब तक आर्थिक मदद नहीं मिल पाई थी, उनके खातों में जल्द ही यह राशि ट्रांसफर की जाएगी।
यह पूरा मामला उन किसानों से जुड़ा है जिन्होंने अपने स्तर पर कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी लगाकर खेतों में जल सरंक्षण और आधुनिक सिंचाई के साधन विकसित किए थे। लेकिन केंद्र सरकार के स्तर पर इस योजना की मियाद पूरी होने और प्रशासनिक स्वीकृतियों में आई देरी के कारण भुगतान अटक गया था। अब राज्य सरकार के इस ताजा फैसले से किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे खेती-किसानी को भी मजबूती मिलेगी।
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क्या है अटल भूजल योजना और कैसे ठप हुआ था भुगतान?
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की देखरेख में अटल भूजल योजना की शुरुआत की गई थी। राजस्थान के कुल 17 जिलों में यह महत्वाकांक्षी योजना 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी रूप से लागू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उन इलाकों में भूजल स्तर में सुधार लाना था जहां पानी की सबसे ज्यादा किल्लत थी। इसके तहत किसानों को जल संरक्षण, पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। योजना के प्रावधानों के मुताबिक किसानों को फार्म पॉन्ड, डिग्गी, सिंचाई पाइपलाइन, कृषि यंत्र, फव्वारा, मिनी स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई और फसल बदलाव मिनीकिट जैसी गतिविधियों पर भारी सब्सिडी दी जानी थी।
हालांकि, 15 अक्टूबर 2025 के बाद इस योजना का क्रियान्वयन बंद हो गया और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आई अड़चनों के कारण किसानों की सब्सिडी फाइलों का निस्तारण नहीं हो सका। नतीजतन, राजस्थान के विभिन्न जिलों में किसानों के लगभग 158 करोड़ रुपये फंस गए। इसमें कृषि विभाग के अंतर्गत आने वाली करीब 90.91 करोड़ रुपये की राशि और उद्यानिकी विभाग के तहत आने वाली लगभग 66.16 करोड़ रुपये की बड़ी रकम शामिल थी। लंबे समय से किसान इस राशि के मिलने का इंतजार कर रहे थे ताकि वे अपने कृषि कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ा सकें।
राज्य स्तर पर तलाशा गया समाधान, मुख्यमंत्री ने लिया बड़ा निर्णय
किसानों के इस लंबे चौड़े बकाए को चुकाने के लिए राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से कई बार पत्राचार किया। राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, उद्यानिकी मंत्री और मुख्य स्तर के अधिकारियों ने केंद्र के सामने पुरजोर तरीके से यह मामला उठाया। लेकिन योजना के बंद होने और प्रशासनिक नियमों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की तरफ से इस लंबित भुगतान को करने में असमर्थता जता दी गई। इसके बाद राज्य सरकार ने खुद अपने स्तर पर इस समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाशने का बीड़ा उठाया।
किसानों की समस्याओं और आर्थिक संकट को समझते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के संसाधनों से ही इस बकाया का भुगतान करने का साहसिक निर्णय लिया। इसके लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) का उपयोग करने का फैसला किया गया। इस फंड के जरिए उन तमाम पात्र किसानों के खातों में पैसे भेजे जाएंगे जिन्होंने नियम मुताबिक अपने कार्य पूरे कर लिए थे लेकिन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से उनकी सब्सिडी अटक गई थी।
"राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अटल भूजल योजना के तहत जिन किसानों ने मेहनत कर जल संरक्षण के कार्य पूरे किए थे, उनका एक-एक पैसा वापस दिलाया जाएगा। इसके लिए एसडीएसएफ फंड से बजट जारी कर दिया गया है ताकि किसी भी किसान को असुविधा न हो।" — राजस्थान सरकार के कृषि विभाग के अधिकारी
वित्त विभाग की मंजूरी के बाद कृषि आयुक्त ने जारी किए आदेश
राज्य सरकार द्वारा नीतिगत निर्णय लिए जाने के बाद वित्तीय प्रक्रियाएं भी तेजी से पूरी की गईं। वित्त विभाग की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद कृषि आयुक्त नरेश गोयल ने प्रदेश के सभी संबंधित जिला परिषदों और जिला कृषि अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही जिलों को बजट का आधिकारिक आवंटन भी कर दिया गया है ताकि जमीनी स्तर पर काम में कोई ढिलाई न बरती जाए।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना किसी विलंब के पात्र किसानों के दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) का काम युद्धस्तर पर पूरा करें। वर्तमान में कृषि विभाग के हिस्से की 90.91 करोड़ रुपये की राशि के वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही, उद्यानिकी विभाग से जुड़ी करीब 66.16 करोड़ रुपये की बकाया राशि के लिए भी अलग से फाइल तैयार कर ली गई है और जल्द ही उसका भी आवंटन कर दिया जाएगा ताकि कोई भी पात्र किसान इस लाभ से वंचित न रह जाए।
सूक्ष्म सिंचाई और जल संरक्षण को मिलेगा नया प्रोत्साहन
इस पूरी प्रक्रिया से न केवल किसानों को व्यक्तिगत रूप से आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि राजस्थान में जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई आधारित खेती के आंदोलन को भी एक नई ऊर्जा मिलेगी। आज के दौर में जब भूजल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर, फार्म पॉन्ड और डिग्गी जैसे साधन वरदान साबित हो रहे हैं। इन कार्यों के लिए समय पर सब्सिडी मिलने से किसानों का सरकार और सरकारी योजनाओं पर भरोसा मजबूत होता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के फंसे हुए पैसे वापस मिलने से वे आगामी रबी या खरीफ सीजन में अपनी खेती में बेहतर निवेश कर सकेंगे। वे खाद, बीज और आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद आसानी से कर पाएंगे। सरकार के इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी और किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को ठोस बल मिलेगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही किसानों के खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे पैसे पहुंचने शुरू हो जाएंगे।





