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33 साल बाद 'रिटायर' हुआ जंतर-मंतर! बोट क्लब से रामलीला मैदान तक कैसे बदलता रहा विरोध-प्रदर्शनों का पता

देश की राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के ऐतिहासिक ठिकानों में बड़ा बदलाव हुआ है। गृह मंत्रालय ने 33 साल पुरानी व्यवस्था को बदलते हुए जंतर-मंतर को डी-नोटिफाई कर दिया है, और अब प्रदर्शनों के लिए तीन नए ठिकाने तय किए गए हैं।
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राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
प्रादेशिक एवं राज्य ब्यूरो•12 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•25
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33 साल बाद 'रिटायर' हुआ जंतर-मंतर! बोट क्लब से रामलीला मैदान तक कैसे बदलता रहा विरोध-प्रदर्शनों का पता
📷 33 साल बाद 'रिटायर' हुआ जंतर-मंतर! बोट क्लब से रामलीला मैदान तक कैसे बदलता रहा विरोध-प्रदर्शनों का पता — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • गृह मंत्रालय ने सुरक्षा और यातायात कारणों से जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किया है।
  • अस्सी के दशक में बोट क्लब आंदोलनों का प्रमुख केंद्र था, जिसे 1993 में किसानों के बड़े आंदोलन के बाद बंद कर दिया गया था।
  • अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) को नए ठिकाने के रूप में तय किया गया है।

देश की राजधानी दिल्ली सिर्फ सत्ता के गलियारों के लिए नहीं, बल्कि जन-आंदोलनों की आवाज के लिए भी जानी जाती है। भारतीय लोकतंत्र में सरकारों के फैसलों का विरोध करने और अपनी मांगें रखने के लिए विरोध-प्रदर्शनों का एक लंबा इतिहास रहा है। हालांकि, सुरक्षा कारणों, वीवीआईपी ट्रैफिक और अदालती आदेशों के चलते समय-समय पर प्रदर्शनों के ठिकाने बदलते रहे हैं। अब एक बार फिर प्रोटेस्ट साइट को बदल दिया गया है और 33 साल पुराने ठिकाने को अलविदा कह दिया गया है।

जब बोट क्लब होता था आंदोलनों का मुख्य गढ़

आजादी के बाद से अस्सी के दशक तक इंडिया गेट के पास स्थित 'बोट क्लब' विरोध-प्रदर्शनों का सबसे पसंदीदा और प्रभावशाली केंद्र हुआ करता था। इंडिया गेट और विजय चौक के बीच फैला यह इलाका संसद भवन के बेहद करीब होने के कारण सत्ता की नाक के नीचे अपनी आवाज पहुँचाने का सबसे बड़ा जरिया था। अक्टूबर 1988 में भारतीय किसान यूनियन के नेता चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में लाखों किसानों ने बोट क्लब पर डेरा डाल दिया था। विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक पूरा इलाका करीब एक हफ्ते तक किसानों के कब्जे में रहा। इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद सुरक्षा कारणों से केंद्र सरकार ने बोट क्लब पर रैलियों और प्रदर्शनों पर स्थायी रोक लगा दी थी।

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1993 में जंतर-मंतर बना नया 'हॉटस्पॉट'

बोट क्लब पर पाबंदी लगने के बाद 1993 में टॉल्स्टॉय मार्ग स्थित जंतर-मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल तय किया गया। अगले तीन दशकों तक यह सड़क देश भर के आंदोलनकारियों का मुख्य केंद्र बनी रही।किसानों के प्रदर्शन से लेकर अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन, निर्भया आंदोलन और हाल ही में पहलवानों के धरने तक, तमाम बड़े जन-आंदोलन यहीं से शुरू हुए। हालांकि, अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई कर दिया है, यानी अब यहां धरना-प्रदर्शन नहीं हो सकेगा।

अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड नए पते

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई समिति की सिफारिशों के बाद विरोध-प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड (CBD Ground) शामिल हैं। प्रदर्शन स्थलों का यह बदलाव यह दिखाता है कि कैसे बढ़ते शहरीकरण और सुरक्षा प्राथमिकताओं के साथ लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के तरीके और स्थान बदलते रहे हैं। बोट क्लब की ऐतिहासिक रैलियों से लेकर जंतर-मंतर के सांकेतिक धरनों और रामलीला मैदान के विशाल सम्मेलनों तक, पते भले बदल गए हों, लेकिन जनता की आवाज उठाने की परंपरा आज भी उतनी ही मजबूत बनी हुई है।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।

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