रियाद/नई दिल्ली — सऊदी अरब में भारतीय समुदाय ने अपने राजदूत डॉ. सुहेल एजाज खान के लिए एक भव्य विदाई कार्यक्रम रखा। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में भारतीय नागरिक शामिल हुए। सऊदी अरब की राजधानी रियाद और जेद्दा में रहने वाले प्रवासियों ने उनके काम की जमकर तारीफ की। राजदूत के तौर पर उनके कार्यकाल में भारतीय कामगारों की मदद के लिए कई बड़े फैसले लिए गए थे। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में बहुत मजबूत हुए हैं। इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और आम कामगारों ने हिस्सा लिया।
सऊदी अरब में इस समय करीब छब्बीस लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लोगों की संख्या काफी अधिक है। दक्षिण भारत के राज्यों में इस कार्यक्रम को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली। तेलुगु भाषी समाज के लोगों ने राजदूत के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि मुश्किल वक्त में दूतावास ने हमेशा प्रवासियों के दरवाजे खोले रखे। जब भी किसी मजदूर को कानूनी या कागजी दिक्कत हुई, तब दूतावास की टीम आगे आई।
भारतीय कामगारों की समस्याओं पर दूतावास की त्वरित पहल
विदाई समारोह के दौरान राजदूत के कार्यकाल के मुख्य कामों को याद किया गया। सऊदी अरब में काम करने वाले कई मजदूरों को भाषा की दिक्कत होती है। इसके लिए दूतावास ने कई क्षेत्रीय भाषाओं में हेल्पलाइन शुरू की थी। किसी भी कामगार के बीमार होने या हादसे का शिकार होने पर तुरंत मदद दी गई। पासपोर्ट नवीनीकरण और वीजा संबंधी दिक्कतों को दूर करने के लिए विशेष कैंप लगाए गए। रियाद से दूर रहने वाले मजदूरों तक भी मोबाइल वैन के जरिए सेवाएं पहुंचाई गईं।
भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने बताया कि पिछले तीन सालों में दूतावास का काम बहुत पारदर्शी रहा। कंपनी से विवाद होने पर कामगारों को कानूनी सलाह मुफ्त दी गई। जेलों में बंद निर्दोष लोगों को छुड़ाने के लिए भी दूतावास ने सऊदी प्रशासन से लगातार बात की। इस दौरान कई ऐसे कामगार सुरक्षित अपने घर लौटे, जो सालों से फंसे हुए थे। इन प्रयासों की वजह से आम भारतीय नागरिकों का अपने दूतावास पर भरोसा काफी बढ़ा है।
भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्ते
भारत और सऊदी अरब के बीच केवल कामगारों का रिश्ता नहीं है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश भी तेजी से बढ़ा है। सऊदी अरब भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ा भागीदार है। कच्चे तेल के साथ-साथ अब दोनों देश तकनीक और बुनियादी ढांचे में भी मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय कंपनियों ने सऊदी अरब में बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। वहीं सऊदी अरब भी भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ा निवेश कर रहा है।
आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों की साझेदारी अब एक नए मुकाम पर पहुंच चुकी है। स्थानीय बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। सऊदी अरब के विजन 2030 के तहत वहां कई नए शहर बन रहे हैं। इन बड़े प्रोजेक्ट्स में भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर और कुशल मजदूर बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। राजदूत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करता है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और नई नीतियां
सऊदी अरब में काम के नियम पिछले कुछ सालों में काफी बदले हैं। कफाला सिस्टम में बदलाव के बाद मजदूरों को अपनी नौकरी बदलने में आसानी हुई है। इस सुधार का सीधा फायदा वहां रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों को मिला है। भारतीय दूतावास ने इन नए नियमों को समझाने के लिए कई जागरूकता सत्र आयोजित किए थे। इससे मजदूरों का शोषण काफी हद तक कम हुआ है। कामगार अब सीधे अपनी शिकायतें ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।
समारोह के आखिर में प्रवासियों ने नए आने वाले राजदूत से भी ऐसी ही उम्मीद जताई। भारतीय समुदाय ने एक स्वर में कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले हर नागरिक की सुरक्षा सबसे ऊपर है। केंद्र सरकार भी खाड़ी देशों में रहने वाले अपने लोगों के हितों को लेकर काफी सतर्क रहती है। इस विदाई समारोह ने यह साफ कर दिया कि विदेश में रहने वाले भारतीय अपने देश और दूतावास से बेहद मजबूती से जुड़े हुए हैं।











