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महंगे हुए स्मार्टफोन: 10 हजार रुपये वाला 5G फोन हुआ गायब, बढ़ गई जेब की टेंशन

देश में स्मार्टफोन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम आदमी के लिए 10 हजार रुपये से कम कीमत में 5G फोन खरीदना मुश्किल हो गया है। मेमोरी पार्ट्स महंगे होने और रुपये की कमजोरी के कारण मोबाइल बाजार का पूरा गणित बदल चुका है।
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तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•30 सितंबर 2026 • अपडेटेड•33
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महंगे हुए स्मार्टफोन: 10 हजार रुपये वाला 5G फोन हुआ गायब, बढ़ गई जेब की टेंशन
📷 महंगे हुए स्मार्टफोन: 10 हजार रुपये वाला 5G फोन हुआ गायब, बढ़ गई जेब की टेंशन — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • वर्ष 2026 की पहली छमाही में देश में मोबाइल फोन की कीमतों में औसतन 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • दस हजार रुपये से कम कीमत वाले बजट सेगमेंट के स्मार्टफोन्स में सबसे ज्यादा 32 प्रतिशत तक की तेजी आई है।
  • रैम और स्टोरेज यानी DRAM और NAND जैसे मेमोरी कंपोनेंट्स महंगे होने से कंपनियों पर लागत का भारी दबाव बढ़ गया है।

बदल गया मोबाइल बाजार का समीकरण, बजट फोन खरीदने वालों को लगा तगड़ा झटका

भारतीय स्मार्टफोन बाजार इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कुछ समय पहले तक जो ग्राहक दस हजार रुपये के सीमित बजट में बेहतरीन फीचर्स और 5G कनेक्टिविटी वाला फोन आसानी से खरीद लेते थे, उनके लिए अब यह सपना जैसा हो गया है। आज के समय में इस बजट में किसी अच्छे ब्रांड का नया 5G स्मार्टफोन ढूंढना बेहद कठिन चुनौती बन चुका है। यदि किसी यूजर को शानदार कैमरा, दमदार बैटरी, पर्याप्त रैम और स्टोरेज का बेहतरीन कॉम्बिनेशन चाहिए, तो उसे अपनी जेब ढीली करके बजट को सीधे पंद्रह से बीस हजार रुपये तक पहुंचाना पड़ रहा है।

बाजार के इस बदलते मिजाज का अंदाजा वीवो जैसी बड़ी कंपनियों के मॉडल्स से लगाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, कुछ समय पहले लॉन्च हुए बजट स्मार्टफोन और हालिया मॉडल्स की शुरुआती कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। हालांकि तकनीक में अपग्रेड हुआ है, लेकिन सबसे बड़ा संकट यह है कि आम आदमी के लिए किफायती सेगमेंट में अब विकल्प लगभग नगण्य होते जा रहे हैं। यही हाल सैमसंग, रियलमी, पोको, शाओमी और नथिंग जैसे तमाम लोकप्रिय ब्रांड्स का भी है, जिनके प्रोडक्ट्स पिछले कुछ महीनों में लगातार महंगे हुए हैं।

क्यों आसमान छू रहे हैं मोबाइल के दाम? रैम और स्टोरेज ने बदला पूरा गणित

आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्मार्टफोन अचानक इतने महंगे हो गए? क्या टेक कंपनियां अपनी मर्जी से मुनाफाखोरी कर रही हैं या इसके पीछे कोई गहरी तकनीकी वजह छिपी हुई है? इन सवालों के जवाब तलाशने पर बाजार के जानकारों का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्मार्टफोन के भीतर इस्तेमाल होने वाले मुख्य कंपोनेंट्स की लागत में बेतहाशा वृद्धि है। आपके मोबाइल में स्मूथ परफॉर्मेंस और डेटा सेव करने के लिए जिस DRAM और NAND जैसी रैम और स्टोरेज मेमोरी का उपयोग किया जाता है, उनकी ग्लोबल कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं।

काउंटरपॉइंट रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 के दौरान मेमोरी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिसका सीधा असर फोन की निर्माण लागत पर पड़ रहा है। खासकर बजट और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स में मेमोरी अब कुल हार्डवेयर लागत का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन चुकी है। कम कीमत वाले फोन्स की बिल ऑफ मैटेरियल्स यानी BOM लागत में करीब सत्तर प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रुपये की कमजोरी और आयात शुल्क का डबल अटैक, लोकल मैन्युफैक्चरर्स की बढ़ी मुश्किलें

केवल ग्लोबल मेमोरी संकट ही नहीं, बल्कि भारतीय बाजार के लिए घरेलू आर्थिक कारक भी बड़ी मुसीबत बने हुए हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार आ रही कमजोरी ने स्मार्टफोन निर्माताओं की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं। चूंकि ज्यादातर मोबाइल कंपोनेंट्स का आयात किया जाता है, इसलिए कमजोर रुपये के कारण इम्पोर्ट की लागत काफी बढ़ गई है। इसका सबसे बुरा असर लोकल असेंबलर्स और मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ा है, जिन्हें मजबूरन बढ़े हुए खर्च का बोझ ग्राहकों की जेब पर डालना पड़ रहा है।

मार्केट रिसर्च फर्म के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल की दूसरी तिमाही के दौरान देश में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत बढ़कर रिकॉर्ड इकतीस अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 318 डॉलर तक पहुंच गई है। इम्पोर्टेड पार्ट्स के महंगे होने और सप्लाई चेन में लगातार बने दबाव के कारण कंपनियों के पास कीमतें बढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

सस्ते सेगमेंट की हो रही है विदाई, प्रीमियम फोन्स की तरफ भाग रहे ग्राहक

कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर बाजार के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है। दस हजार रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में साल-दर-साल के आधार पर शिपमेंट में पैंसठ प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, दस से पंद्रह हजार रुपये तक के मिड-रेंज सेगमेंट में भी बीस प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसे कभी भारतीय स्मार्टफोन बाजार की रीढ़ माना जाता था। इसके विपरीत, बीस हजार रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम और महंगे स्मार्टफोन्स की बिक्री में लगातार तेजी बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां अब कम मार्जिन वाले बजट फोन्स की बजाय अधिक मुनाफे वाले प्रीमियम मॉडल्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं। ट्रेड-इन ऑफर्स और आसान फाइनेंस स्कीमों के सहारे ग्राहक भी अब मजबूरी में महंगे फोन खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कब राहत मिलने की उम्मीद? जानकारों की भविष्यवाणी ने बढ़ाई चिंता

आम स्मार्टफोन खरीदारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में उन्हें इस महंगाई से कोई राहत मिल पाएगी? क्या दोबारा दस हजार रुपये के भीतर अच्छे 5G स्मार्टफोन्स बाजार में वापसी कर पाएंगे? इस बारे में टेक और मार्केट एक्सपर्ट्स की राय बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं है।

"वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप्स की भारी मांग और सप्लाई चेन की बाधाओं को देखते हुए ऐसा लगता है कि वर्ष 2028 से पहले मोबाइल मेमोरी की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है। रुपये की कमजोरी के चलते आयात लागत का दबाव भी निकट भविष्य में बना रहेगा।" — बाजार विश्लेषक, काउंटरपॉइंट रिसर्च

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि आने वाले कुछ वर्षों तक स्मार्टफोन बाजार में मंहगाई का यह दौर जारी रहने की पूरी आशंका है। यदि आप नया फोन खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपको अपने बजट को थोड़ा बढ़ाकर ही चलना होगा, क्योंकि पुराने जैसी कम कीमत में बेहतरीन फीचर्स पाने का दौर फिलहाल पीछे छूट चुका है।

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