संसद मार्ग थाने के बाहर रातभर चला विरोध प्रदर्शन
देश की राजधानी नई दिल्ली इन दिनों लगातार राजनीतिक और छात्र आंदोलनों का केंद्र बनी हुई है। इसी कड़ी में गुरुवार देर रात संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता अपने साथियों और खासकर महिला सदस्यों के साथ हुई कथित मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और कई अन्य पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, संगठन के सदस्य पिछले कुछ दिनों से लगातार यह मांग कर रहे थे कि हालिया प्रदर्शन के दौरान उनके साथियों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। लेकिन कई घंटे बीत जाने के बाद भी जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया और अंततः कई नेताओं को हिरासत में लेकर गाड़ी में बैठा लिया गया।
महिला कार्यकर्ताओं से मारपीट और अंधेरे कमरे में ले जाने का गंभीर आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ में 10 अक्टूबर को हुआ एक विरोध प्रदर्शन है। NSUI का आरोप है कि उस दिन पुलिस बल के साथ झड़प के दौरान उनकी महिला कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया और उनके साथ अत्यंत अमानवीय व्यवहार किया गया। संगठन के नेताओं ने दावा किया कि कुछ महिला सदस्यों को जबरन एक अंधेरे कमरे में ले जाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई और जूते-बूटों से हमला किया गया।
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मीडिया के सामने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे लोग केवल अपनी महिला कार्यकर्ताओं के लिए न्याय और कानून के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। जाखड़ ने आरोप लगाया, “हम यहां न्याय मांगने आए थे, लेकिन डीसीपी स्तर के अधिकारी न तो हमारी बात सुनने को तैयार हैं और न ही मिलने का समय दे रहे हैं। क्या अपनी साथी महिलाओं के लिए आवाज उठाना कोई बड़ा अपराध है?”
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और पीड़ित छात्रों का दर्द
यह मामला केवल सड़क पर चल रहे धरने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक हलचल तेज कर चुका है। इस घटना से ठीक पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसमें वे खुद उन पीड़ित NSUI कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स को अपने साथ लेकर आए थे, जिन्होंने पुलिस की कथित ज्यादती का सामना किया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित छात्रों ने अपनी आपबीती सुनाई। दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा अदिरा ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि पुलिस की बर्बर पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता पूरी तरह प्रभावित हो गई है। वहीं अन्य छात्रों ने भी गंभीर आरोप लगाए कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं को निशाना बनाकर डराया-धमकाया जा रहा है। कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व ने इन छात्रों का समर्थन करते हुए साफ कर दिया है कि वे इस लड़ाई में पीछे नहीं हटेंगे।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल और संगठन की कड़ी चेतावनी
NSUI के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रवि पांडे ने विनोद जाखड़ और अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी की कड़ी शब्दों में निंदा की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय, न्याय की गुहार लगाने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है। संगठन का यह भी आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और अपने कर्मियों को बचाने की कोशिश में जुटी हुई है।
"हम यहां सिर्फ एफआईआर दर्ज कराने आए थे, लेकिन पुलिस हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। क्या महिला कार्यकर्ताओं के लिए न्याय मांगना अपराध है? हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती।" — विनोद जाखड़, राष्ट्रीय अध्यक्ष, NSUI
छात्र संगठन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लेने से उनका मनोबल टूटने वाला नहीं है। यदि पुलिस प्रशासन ने जल्द से जल्द उनकी शिकायतों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की, तो इस आंदोलन को दिल्ली से लेकर पूरे देश में और अधिक आक्रामक रूप से फैलाया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्षी दल लगातार इस मामले को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।











