जकार्ता — 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दुनिया का एक बड़ा हिस्सा मौसम के अजीब और खतरनाक मिजाज से जूझ रहा है। इंडोनेशिया इस वक्त अल-नीनो की भारी मार झेल रहा है। देश के घने जंगलों में भयंकर आग लग चुकी है। आग इतनी तेज है कि दूर-दूर तक आसमान में धुएं का गुबार फैल गया है। आसमान का प्राकृतिक नीला रंग पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वहां सिर्फ पीला और नारंगी रंग ही दिखाई दे रहा है। हालात इतने डरावने हो गए हैं कि लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
स्थानीय मौसम विभाग और पर्यावरण एजेंसियों के अनुसार, यह संकट बहुत तेजी से फैल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से बारिश न होने के कारण जमीन पूरी तरह सूख चुकी है। सूखे पत्तों और लकड़ियों की वजह से जंगलों में आग बहुत तेजी से पकड़ रही है। दमकल विभाग की टीमें आग बुझाने की कोशिश में जुटी हैं। लेकिन घना धुआं और तेज हवाएं राहत कार्य में बड़ी रुकावट बन रही हैं। आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है।
पीले और नारंगी आसमान से ढका पूरा इलाका
इंडोनेशिया के कई बड़े शहरों में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। आसमान में छाए घने धुएं की वजह से सूरज की रोशनी तक जमीन तक नहीं पहुंच पा रही है। दोपहर के समय भी रात जैसा अंधेरा और पीलापन छाया रहता है। लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर रहने और मास्क पहनने की सख्त सलाह दी है। स्कूल और दफ्तरों के कामकाज पर भी इसका बुरा असर पड़ा है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि यह संकट केवल इंडोनेशिया तक सीमित नहीं है। जंगलों के जलने से भारी मात्रा में कार्बन गैसें निकल रही हैं। इससे ग्लोबल वार्मिंग का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। जंगली जानवरों और पक्षियों का जीवन भी खतरे में आ गया है। कई दुर्लभ प्रजातियां इस भीषण आग की चपेट में आ चुकी हैं। सरकार ने प्रभावित इलाकों में आपातकाल जैसे हालात घोषित कर दिए हैं। राहत शिविरों में लोगों को सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है।
दुनियाभर में अल-नीनो का कहर और सूखे की मार
अल-नीनो का असर केवल इंडोनेशिया के जंगलों तक ही सीमित नहीं है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इसका भारी असर देखने को मिल रहा है। कहीं सड़कें धंस रही हैं तो कहीं बाढ़ का पानी अस्पतालों तक पहुंच रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों के पास पशुओं को खिलाने के लिए चारा तक नहीं बचा है। चारे की कमी के कारण पशुपालक अपनी गायों को आधी कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कृषि बाजार पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
जमीनी स्तर पर काम कर रहे विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम का यह बदलाव इंसानों के लिए बड़ी चेतावनी है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति संभल नहीं पाएगी। इंडोनेशियाई प्रशासन आग बुझाने और लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद के हाथ बढ़ाए जा रहे हैं। लेकिन जब तक आसमान से बारिश की एक बूंद नहीं गिरती, तब तक इस आग और धुएं से राहत मिलना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है।
प्रशासन की तैयारी और आगे की चुनौती
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को तैनात कर दिया है। लोगों को मुफ्त दवाइयां और ऑक्सीजन मास्क बांटे जा रहे हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि किसान खेतों में कचरा न जलाएं क्योंकि इससे आग और भड़क सकती है। सुरक्षा बलों को भी राहत कार्यों में लगा दिया गया है। 'द फ्रीलान्स' की टीम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख क्या होगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।












