इन दिनों मौसम बदलने के साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याएं तेजी से पांव पसार रही हैं। अस्पतालों और क्लीनिक्स में इन दिनों सबसे ज्यादा भीड़ आंखों के संक्रमण यानी 'आई फ्लू' के मरीजों की देखने को मिल रही है। लोग एक के बाद एक इस वायरल या बैक्टीरियल चपेट में आ रहे हैं। लेकिन सबसे चिंताजनक बात यह है कि अधिकांश लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर रहे हैं या फिर खुद ही डॉक्टर बनकर मेडिकल स्टोर से सीधे दवाइयां खरीदकर इस्तेमाल कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी, बढ़ रहा है ड्रग रेजिस्टेंस का खतरा
जब भी किसी को आंखों में चुभन, लाचारी, लालिमा या कीचड़ आने जैसी समस्याएं होती हैं, तो लोग तुरंत केमिस्ट के पास जाकर कोई भी आई ड्रॉप मांग लेते हैं। कई बार लोग सीधे तौर पर स्टेरॉयड या तेज एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी चिकित्सकीय जांच के इस तरह की दवाइयों का अंधाधुंध इस्तेमाल आंखों की रोशनी के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इससे न केवल आंखों का संक्रमण और अधिक बढ़ जाता है, बल्कि शरीर और बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता यानी 'ड्रग रेजिस्टेंस' विकसित होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सही उपचार न मिलने के कारण मरीजों को ठीक होने में सामान्य से अधिक यानी 15 से 20 दिन तक का लंबा समय लग रहा है। यही वजह है कि डॉक्टर बार-बार यह सलाह दे रहे हैं कि घर पर खुद से इलाज करने के बजाय किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श करना चाहिए। यह पहचान करना बेहद जरूरी है कि संक्रमण वायरल है या फिर बैक्टीरियल, और उसी के आधार पर डॉक्टर की देखरेख में ही आंखों की दवा या आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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डायरेक्ट आई फ्लू के दौरान डायबिटीज मरीज रखें सबसे ज्यादा एहतियात
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति पहले से ही किसी गंभीर या दीर्घकालिक बीमारी से पीड़ित है, तो उसके लिए आई फ्लू जैसी समस्याएं और भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। विशेष तौर पर डायबिटीज यानी मधुमेह के मरीजों को इस दौरान अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। संक्रमण के शरीर में प्रवेश करते ही ब्लड शुगर लेवल असंतुलित होने का खतरा रहता है, जिससे मरीज की ओवरऑल परेशानी काफी हद तक बढ़ सकती है।
ऐसे मरीजों को चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए और नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की मॉनिटरिंग करनी चाहिए। डॉक्टरों का सुझाव है कि आई फ्लू से पीड़ित होने पर डायबिटीज के मरीजों को अपने ग्लूकोज लेवल को हर हाल में 200 से नीचे रखने का विशेष प्रयास करना चाहिए। यदि शुगर कंट्रोल में नहीं रहता है, तो आंखों के घाव या इन्फेक्शन को ठीक होने में बहुत अधिक समय लग सकता है और कॉर्निया पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
खानपान का रखें विशेष ध्यान और भूलकर भी न रहें भूखे
किसी भी प्रकार के संक्रमण या बीमारी की स्थिति में शरीर को ऊर्जा की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। आई फ्लू के मरीजों को भी इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वे बीमारी के दौरान बिल्कुल भी भूखे न रहें। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखने के लिए समय पर पौष्टिक भोजन लेना बेहद जरूरी है।
भोजन के साथ-साथ अपनी डाइट में ताजे फलों, हरी सब्जियों और प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों को शामिल करना चाहिए। विटामिन और मिनरल्स से भरपूर आहार लेने से शरीर को अंदरूनी ताकत मिलती है और किसी भी प्रकार के वायरल इन्फेक्शन से लड़ने में मदद मिलती है। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और रिकवरी प्रक्रिया तेज होती है।
आंखों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स
आई फ्लू के दौरान आंखों की देखभाल बहुत सावधानी से करनी चाहिए। कई लोगों की आदत होती है कि वे बार-बार आंखों पर पानी के छींटे मारते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है। जानकारों के अनुसार, ऐसा करने से आंखों की नेचुरल यानी प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित हो सकती है और इन्फेक्शन और अधिक फैल सकता है।
"आई फ्लू होने पर खुद से मेडिकल स्टोर से दवाएं न लें। बिना जांच के स्टेरॉयड ड्रॉप्स डालने से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों को विशेष रूप से सतर्क रहकर अपना ब्लड शुगर कंट्रोल में रखना चाहिए।" — डॉ. विवेक भंडारी, नेत्र रोग विशेषज्ञ
इसके अलावा, आंखों में खुजली या जलन होने पर उन्हें बार-बार रगड़ने से बचना चाहिए। यदि आंखों में लगातार पानी आ रहा है, सूजन बढ़ रही है या देखने में धुंधलापन महसूस हो रहा है, तो बिना एक पल भी गंवाए किसी अनुभवी नेत्र चिकित्सक से अपनी आंखों की पूरी जांच करवानी चाहिए। छोटी सी सावधानी अपनाकर आप अपनी बहुमूल्य आंखों को किसी भी बड़े खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं।






