कैरेबियाई देश में चुनाव से पहले गहराया खौफ का साया
कैरेबियाई क्षेत्र के अहम देश हैती में इस वक्त हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। एक लंबे अरसे के बाद देश में लोकतांत्रिक आम चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई थी, लेकिन ठीक इसी नाजुक मोड़ पर आपराधिक गिरोहों ने अपनी हिंसक गतिविधियों को कई गुना बढ़ा दिया है। राजधानी पोर्ट ऑ प्रिंस समेत कई प्रमुख इलाके इन दिनों गिरोहों की खुली दहशत के साए में जी रहे हैं। आम जनता से लेकर देश के बड़े प्रशासनिक अधिकारी और प्रतिष्ठित लोग तक सुरक्षित नहीं हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों और मानवाधिकार संगठनों द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स बताती हैं कि अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से अपहरण को अपनी मुख्य आय और दबाव बनाने का जरिया बना लिया है। देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन कुख्यात गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने की है, जो लगातार आम नागरिकों और खास हस्तियों को बंधक बनाकर भारी फिरौती वसूल रहे हैं।
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रक्षा मंत्रालय के निदेशक और हाई-प्रोफाइल हस्तियां भी नहीं सुरक्षित
अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे देश के शीर्ष अधिकारियों को भी खुलेआम निशाना बना रहे हैं। हाल ही में हुई घटनाओं के तहत, रक्षा मंत्रालय के कैबिनेट निदेशक जेम्स बोयार्ड को दिनदहाड़े राजधानी के एक ऐसे इलाके से अगवा कर लिया गया जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता था। इसके अलावा, देश के जाने-माने वकील और प्रशासनिक पदों पर बैठे अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इन गिरोहों की गिरफ्त में आ चुके हैं।
स्थानीय जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई पीड़ित परिवार डर के साए में जीने को मजबूर हैं और अपराधियों के प्रतिशोध के खौफ से पुलिस के पास औपचारिक शिकायत तक दर्ज नहीं कराते। इस खौफ के माहौल ने देश के प्रशासनिक ढांचे को अंदर से खोखला कर दिया है, जिससे सरकार की प्रशासनिक पकड़ कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
राजनीतिक अस्थिरता और राष्ट्रपति की हत्या के बाद बिगड़े हालात
हैती में मौजूदा अराजकता की जड़ें साल 2021 की गर्मियों में जुड़ी हैं, जब तत्कालीन राष्ट्रपति जोवेनेल मोइज़ की उनके ही निजी आवास पर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उस बड़ी राजनीतिक घटना के बाद से देश में कोई स्थायी राष्ट्रपति नहीं है और लगातार राजनीतिक शून्य की स्थिति बनी हुई है। इस वैक्यूम का फायदा उठाकर विभिन्न अपराधी गिरोहों ने देश के बड़े भू-भाग पर अपना अवैध कब्जा जमा लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी देश में चुनावों जैसी बड़ी राजनीतिक प्रक्रियाएं नजदीक आती हैं, ये गिरोह अपनी ताकत का अहसास कराने के लिए सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देते हैं। उनका मकसद देश की सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज करना और अपनी समानांतर सत्ता स्थापित करना होता है।
"चुनावी सरगर्मियों के बीच हर एक बड़ी घटना का इस्तेमाल ये गिरोह अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचने और सरकार को पंगु बनाने के लिए करते हैं। ऐसे में आम जनता का जीवन पूरी तरह दांव पर लग गया है।" — रोमेन ले कूर, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ
बढ़ते अपराध के आंकड़े और खौफनाक वारदातें
बीते कुछ वर्षों में अपहरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की भयावहता साफ नजर आती है। वर्ष 2020 में जहां अपहरण के कुछ सौ मामले सामने आए थे, वहीं आने वाले सालों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर हजारों में पहुंच गया। गिरोहों ने न सिर्फ वीवीआईपी बल्कि ग्रामीण इलाकों और रिहायशी बस्तियों को भी अपने आतंक का केंद्र बना लिया है।
हाल के महीनों में केंसकॉफ और पेटिट रिविएर जैसे इलाकों में गिरोहों ने सामूहिक हमलों को अंजाम दिया है। कई नागरिकों की निर्मम हत्या के साथ-साथ दर्जनों लोगों को बंधक बनाए जाने की खबरें अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रही हैं। कई मामलों में तो अपराधियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर वारदातों को अंजाम दिया है, जिससे आम जनता के लिए असली और नकली पुलिस के बीच फर्क करना भी मुश्किल हो गया है।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की कवायद और भविष्य की चुनौतियां
बढ़ते संकट के बीच हैती के प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स एमे की सरकार ने सुरक्षा तंत्र को पटरी पर लाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास शुरू किए हैं। प्रशासन की योजना आने वाले महीनों में हजारों नए पुलिसकर्मियों और सैन्य बलों को प्रशिक्षित कर मैदान में उतारने की है। इसके साथ ही, बंधक संकट से निपटने के लिए विशेष वार्ताकारों और प्रशिक्षित अधिकारियों की एक नई टीम तैयार की जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र समर्थित अंतरराष्ट्रीय बल भी हैती के स्थानीय सुरक्षा बलों की मदद के लिए लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। हालांकि, गिरोहों के पास मौजूद अत्याधुनिक हथियारों और उनके गहरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद करना एक लंबी और कठिन चुनौती साबित होने वाला है। देश के नागरिकों की निगाहें अब आगामी चुनावों और सरकारी सुरक्षा सुधारों पर टिकी हैं।








