राजधानी में तेजी से बढ़ रहा डेंगू का खतरा, तीन सौ के पार पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा
देशभर में मौसम के बदलाव के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी तेज होने लगा है। खासकर स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक बार फिर वेक्टर जनित बीमारियां लोगों की परेशानी का सबब बन रही हैं। इसी कड़ी में बिहार की राजधानी में डेंगू के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान जिस रफ्तार से नए मरीज सामने आए हैं, उसने अधिकारियों को एहतियाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। आंकड़े गवाह हैं कि चंद दिनों के भीतर ही संक्रमण ने कई गुना तेजी पकड़ी है, जिससे आम नागरिकों के बीच भी डर का माहौल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के बाद जमा हुआ पानी और उमस भरा मौसम मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है। यही वजह है कि शहर के विभिन्न इलाकों से लगातार बुखार और शरीर दर्द से पीड़ित लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, जिन्हें डॉक्टरों द्वारा तुरंत डेंगू और चिकनगुनिया की जांच कराने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शुरुआती दौर में ही सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक विकट हो सकती है।
प्रशासनिक स्तर पर हालात से निपटने के लिए दावों का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर मच्छरों के सफाए के लिए चलाए जाने वाले एंटी-लार्वाल स्प्रे और फॉगिंग के काम को लेकर जनता में अभी भी असंतोष है। लोग लगातार यह शिकायत कर रहे हैं कि उनके मोहल्लों और गलियों में नियमित रूप से दवा का छिड़काव नहीं किया जा रहा है, जिसकी वजह से मच्छरों का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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अस्पतालों में बढ़ी हलचल, मरीजों के लिए आरक्षित किए गए विशेष वार्ड
संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे को ध्यान में रखते हुए शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों ने अपनी तैयारियों को चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के वरिष्ठ प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए युद्ध स्तर पर तैयारियां की हैं। अस्पताल प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को बिना किसी विलंब के भर्ती किया जा रहा है ताकि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जा सके।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मौजूदा सीजन के दौरान अब तक दर्जनों मरीजों को अस्पताल में दाखिल कर उनका सफल उपचार किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुविधा और संक्रमण को अन्य लोगों तक फैलने से रोकने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।
"हमारे अस्पताल में डेंगू के गंभीर मरीजों के लिए विशेष रूप से बीस बेड का एक अलग वार्ड तैयार किया गया है। यहां भर्ती होने वाले सभी लोगों को मच्छरों के डंक से सुरक्षित रखने के वास्ते मच्छरदानियों का पूरा इंतजाम किया गया है। साथ ही प्लेटलेट्स और अन्य जरूरी जांचों की सुविधा भी चौबीस घंटे उपलब्ध है।" — डॉ. राजीव कुमार सिंह, अधीक्षक, PMCH
इसी तरह, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भी बड़ी संख्या में मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया गया है। हालांकि, वहां संसाधनों की कुछ सीमित स्थिति जरूर सामने आई है, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ मरीजों की देखभाल में जुटी हुई है ताकि किसी भी अनहोनी से समय रहते निपटा जा सके।
प्लेटलेट्स गिरने की समस्या और मरीजों की बढ़ती मुश्किलें
डेंगू के इस नए दौर में जो सबसे डरावनी बात सामने आ रही है, वह है मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स काउंट का तेजी से नीचे गिरना। कई मामलों में संक्रमण इतना गंभीर रूप ले रहा है कि मरीजों को अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टियां होने, और तेज पेट दर्द जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है।
चिकित्सकों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार के साथ शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों में असहनीय दर्द महसूस हो, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह डेंगू का शुरुआती संकेत हो सकता है। समय रहते यदि डॉक्टर से परामर्श कर लिया जाए और खून की आवश्यक जांच करा ली जाए, तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता उन्हीं मरीजों को पड़ती है जिनमें ब्लीडिंग के लक्षण या काउंट बहुत ज्यादा कम हो जाते हैं।
अस्पतालों में ब्लड बैंकों को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (SDP) और रैंडम डोनर प्लेटलेट्स (RDP) की आपूर्ति समय पर की जा सके। स्वास्थ्य विभाग लगातार रक्तदाताओं से भी अपील कर रहा है कि वे आगे आएं ताकि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए रक्त की कमी न होने पाए।
शहर के ये इलाके बने सबसे बड़े हॉटस्पॉट, प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें
कीड़ों और मच्छरों के पनपने के लिहाज से शहर के कुछ खास इलाके इस बार सबसे ज्यादा संवेदनशील साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न अंचलों के कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां से सबसे अधिक संख्या में डेंगू के मरीज रिपोर्ट किए गए हैं। इन इलाकों में संक्रमण फैलने की रफ्तार बाकी हिस्सों की तुलना में काफी तेज है।
कंकड़बाग अंचल के अंतर्गत आने वाले हनुमान नगर, भागवत नगर, पोस्टल पार्क, योगीपुर, जक्कनपुर और भूतनाथ रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाके इस बीमारी के प्रमुख केंद्र बन गए हैं। इसके अलावा बांकीपुर अंचल के बाजार समिति, मुसल्लहपुर घाट, सुलतानगंज, संदलपुर, कदमकुआं, महेंद्रू और भिखनापहाड़ी जैसे छात्र बहुल क्षेत्रों में भी खतरा मंडरा रहा है।
पाटलिपुत्र अंचल के बोरिंग रोड, राजाबाजार, इंद्रपुरी, आशियाना, दीघा और एसकेपुरी जैसे पॉश इलाकों के साथ-साथ नूतन राजधानी और अजीमाबाद अंचल के कई हिस्से भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर जलभराव और निर्माण कार्यों के कारण मच्छरों का प्रजनन तेजी से हो रहा है, जिसपर रोक लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन को अब और अधिक कड़े कदम उठाने की सख्त जरूरत महसूस हो रही है.






