68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, मंत्री आवास पर किया जोरदार हंगामा
उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से चली आ रही 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। इस भर्ती में आरक्षण विसंगतियों को दूर करने और अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करवाने के लिए राज्यभर के युवा और दिव्यांग अभ्यर्थी राजधानी लखनऊ पहुंचे। सोमवार को इन अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
सुबह से ही मंत्री आवास के बाहर जुटना शुरू हुए अभ्यर्थियों के तेवर काफी आक्रामक नजर आए। विरोध जताने का उनका अंदाज भी बेहद अनोखा था। प्रदर्शनकारियों ने अपने सिर पर 'आरक्षण घोटाला' लिखी हुई विशेष टोपियां पहन रखी थीं और हाथों में तख्तियां ले रखी थीं। मंत्री आवास के ठीक सामने सड़क पर लेटकर और लगातार सीटी बजाकर उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए। इस अनोखे और उग्र प्रदर्शन के कारण मौके पर सुरक्षा बलों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह प्रदर्शन करीब 45 मिनट तक अनवरत जारी रहा। इस दौरान पुलिस और आंदोलनरत युवाओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। अभ्यर्थियों का आरोप था कि पुलिस प्रशासन ने उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया और उनके साथ अनुचित व्यवहार किया। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था जिसने अंततः सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और बसों में भरकर इको गार्डन भेज दिया।
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आयोग के आदेशों का पालन न होने का आरोप, 8 साल से भटक रहे हैं अभ्यर्थी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं का कहना है कि 2018 में शुरू हुई इस शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी रही है और नियमों को ताक पर रखकर आरक्षित वर्ग के अधिकारों का हनन किया गया है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग दोनों ने ही इस भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी गड़बड़ियों को स्वीकार किया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमों का पालन करते हुए संशोधित चयन सूची जारी की जानी चाहिए।
सीतापुर से लखनऊ प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे एक अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि वे पिछले आठ वर्षों से रोजगार और न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में साफ तौर पर यह माना गया है कि ओबीसी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ चयन प्रक्रिया में नाइंसाफी हुई है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और न ही पीड़ितों को उनकी नियुक्ति दी जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं के सुर में भारी निराशा और आक्रोश साफ झलक रहा था। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया तो उनका यह संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले लेगा। आंदोलनकारियों का कहना था कि अब उनके पास या तो न्याय पाने का विकल्प बचा है या फिर इस लंबी लड़ाई में अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करने का संकल्प है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों की भागीदारी और 'ऐसी क्या मजबूरी है' के गूंजे नारे
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें सामान्य अभ्यर्थियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में दिव्यांग युवा भी शामिल हुए, जिन्हें भर्ती प्रक्रिया के दौरान तय मानकों के तहत उचित लाभ नहीं मिलने की शिकायत है। सिर पर टोपियां लगाए और सीटी बजाते हुए इन युवाओं ने मंत्री आवास के बाहर ऐसा माहौल बना दिया कि स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
आंदोलन स्थल पर गूंज रहे नारों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। युवाओं ने 'ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है', 'पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है', और 'संदीप भैया न्याय करो' जैसे नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उनका कहना था कि जब सक्षम आयोग ने विसंगतियों की पुष्टि कर दी है, तो फिर सरकार संशोधित परिणाम घोषित करने में क्यों आनाकानी कर रही है?
"हम पिछले 8 साल से लगातार नौकरी के लिए भटक रहे हैं। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर आरक्षण में गड़बड़ी की गई है। राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी इसे माना है, लेकिन इसके बावजूद हमें न्याय नहीं मिल रहा है।" — आशुतोष वर्मा, प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी (सीतापुर)
पुलिस कार्रवाई और इको गार्डन में नजरबंदी
प्रदर्शनकारियों के आक्रामक रुख को देखते हुए लखनऊ पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त बलों को मौके पर बुला लिया। मंत्री आवास के चारों ओर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया। जब अभ्यर्थियों ने वहां से हटने से इनकार कर दिया और लगातार नारेबाजी जारी रखी, तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें सड़क से हटाना शुरू कर दिया।
इस दौरान पुलिस कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक खींचतान चलती रही। कई अभ्यर्थियों ने जमीन पर लेटकर विरोध जताना चाहा, जिन्हें पुलिस ने बलपूर्वक उठाया। सुरक्षा अधिकारियों का कहना था कि वीआईपी क्षेत्र में इस तरह का उग्र प्रदर्शन कानून व्यवस्था के नियमों के खिलाफ है। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर राजधानी के निर्धारित धरना स्थल इको गार्डन भेज दिया गया, जहां उन्हें हिरासत में रखा गया है।
भविष्य की रणनीति और न्याय की आस
इको गार्डन भेजे जाने के बाद भी अभ्यर्थियों का हौसला पस्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती और 2018 की इस भर्ती में हुई विसंगतियों को दूर करते हुए संशोधित सूची जारी नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन शांतिपूर्ण या उग्र रूप में जारी रहेगा।
शिक्षा विभाग के गलियारों में इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर इतने लंबे समय से लंबित इस शिक्षक भर्ती विवाद का स्थायी समाधान कब और कैसे निकलेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें बेसिक शिक्षा मंत्री और शासन स्तर से आने वाले अगले आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं।







