अंकिता भंडारी के माता-पिता ने दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों से की मुलाकात
बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में न्याय की आस लिए पीड़ित माता-पिता ने दिल्ली स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मुख्यालय का रुख किया। शुक्रवार को अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी भी मौजूद रहे। माता-पिता ने जांच एजेंसी के अधिकारियों को घटना से जुड़े कई अहम बिंदुओं और अनसुलझे पहलुओं की जानकारी दी।
मुलाकात के दौरान सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि इस मामले से जुड़े हर एक पहलू की गहराई से जांच की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और न्यायसंगत होगी, ताकि दोषियों को उनके किए की सजा मिल सके और परिवार को न्याय मिल सके। परिवार का संघर्ष पिछले काफी समय से लगातार जारी है, और वे इस मामले में हर स्तर पर पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की मौजूदगी में हुई इस उच्चस्तरीय मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और परिजनों की लंबे समय से यह मांग रही है कि इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाई जाए। सीबीआई के इस आश्वासन के बाद परिवार को एक बार फिर उम्मीद बंधी है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
देहरादून की सड़कों पर उतरा कांग्रेस का जनसैलाब, निकाली गई बाइक रैली
एक तरफ जहां माता-पिता दिल्ली में न्याय की गुहार लगा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस पार्टी ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक विशाल बाइक और स्कूटर रैली निकाली। यह रैली शिमला बाईपास चौक से शुरू होकर सहारनपुर चौक और प्रिंस चौक होते हुए घंटाघर तक पहुंची। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग के साथ-साथ दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध करना था। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस प्रकरण में जिस व्यक्ति का नाम सार्वजनिक चर्चाओं में आया था, उसे इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठाना जनता की भावनाओं को आहत करने जैसा है। पार्टी ने इस नियुक्ति को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
"उत्तराखंड की जनता और यहां की बेटियां इस गंभीर मुद्दे को अपने मान-सम्मान से जोड़कर देख रही हैं। सरकार संबंधित व्यक्ति को बचाने का प्रयास कर रही है, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।"— कुमारी शैलजा, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी
घंटाघर पर दिग्गज नेताओं का जमावड़ा, स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं पर दी श्रद्धांजलि
देहरादून के घंटाघर पहुंचने पर कांग्रेस की इस आक्रोश रैली ने एक बड़े सभा का रूप ले लिया। यहां कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपनी बेटियों के सम्मान के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार है।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में जनता के मन में उठ रहे सवालों का आज तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। पार्टी का कहना है कि मामले से जुड़े कथित ऑडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है, इसकी प्रगति रिपोर्ट सरकार को सार्वजनिक करनी चाहिए। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनकी बेटी को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है।
हरिद्वार में भी कैंडल मार्च निकालकर उठाई गई निष्पक्ष जांच की मांग
राजधानी देहरादून के अलावा राज्य के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। हरिद्वार में जिला महानगर कांग्रेस कमेटी की ओर से सुखी नदी से भीमगोड़ा तक एक विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और विभिन्न संगठनों के लोगों ने हिस्सा लिया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि पूरे समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भरोसे को बचाने की लड़ाई है।
हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंकिता के परिवार द्वारा उठाए जा रहे सवालों को नजरअंदाज करके सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकती। राजनीतिक प्रभावों से पूरी तरह मुक्त होकर निष्पक्ष जांच करना ही एकमात्र विकल्प है, जिससे पीड़ित परिवार को सांत्वना मिल सके। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत के केंद्र में आ गया है। दिल्ली में सीबीआई जांच के मोर्चे पर और राज्य की सड़कों पर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने इस मामले को तूल दे दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसी अपनी रिपोर्ट में क्या खुलासे करती है और सरकार इस जनदबाव के बाद क्या कदम उठाती है।









