काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सजा पशुपालकों का बड़ा दरबार
उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में इन दिनों अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के हेलीपैड मैदान में दो दिवसीय ‘रंगीलो- ग्रामीण उत्सव 2026’ का शानदार आगाज हुआ है। इस आयोजन की गूंज केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर के पशुपालक और डेरी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ इसमें हिस्सा लेने के लिए वाराणसी पहुंचे हैं। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (NDDB) और एनडीडीबी डेरी सर्विसेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को एक मंच पर ला खड़ा किया है।
कार्यक्रम के पहले दिन से ही मेले में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए किसानों और पशुपालकों के चेहरों पर एक अलग ही उत्साह साफ झलक रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से आए पशुपालक अपने साथ उन्नत नस्ल के दुधारू पशु लेकर पहुंचे हैं। बीएचयू का यह परिसर इस समय किसी बड़े ग्रामीण उत्सव का रूप ले चुका है, जहां आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक पशुपालन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
इस दो दिवसीय उत्सव का मुख्य उद्देश्य देश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें पशुपालन के आधुनिक तरीकों से रूबरू कराना है। कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे नए बदलावों को आम किसानों तक पहुंचाने के लिए यह मंच बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। विशेषज्ञ, शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि भी इस महाकुंभ में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके।
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उत्तर प्रदेश सरकार और एनडीडीबी की साझा पहल
इस दो दिवसीय भव्य उत्सव की रूपरेखा केंद्र और राज्य सरकार की साझा प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेरी विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से डेरी का संचालन और देशी पशु नस्लों का सुधार आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए पशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर राज्य के कई प्रमुख जिलों में डेरी संयंत्रों के पुनरुद्धार और संचालन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वाराणसी, कानपुर, कन्नौज, गोरखपुर और अंबेडकर नगर जैसे शहरों में डेरी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित और सतत मूल्य मिल सके। सरकार की विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं और पशुधन संरक्षण पहलों की जानकारी भी यहां किसानों को दी जा रही है।
दुग्ध आयुक्त श्रीमती धनलक्ष्मी के. ने इस मौके पर राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में डेरी सेक्टर की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। सरकार और सहकारिता के इस तालमेल से आने वाले दिनों में डेरी किसानों की तकदीर बदलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
विभिन्न राज्यों से पहुंचे पशुपालक और उन्नत नस्ल के पशु
‘रंगीलो ग्रामीण उत्सव 2026’ की सबसे बड़ी खासियत देश भर से आए अनूठे पशु हैं। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे करीब 10 से 12 राज्यों के पशुपालक अपने सबसे बेहतरीन पशुओं के साथ इस आयोजन का हिस्सा बने हैं। मेले में लाई गई गाय, भैंस, बकरियां और घोड़ों की उन्नत नस्लें वहां आने वाले हर दर्शक और कृषि प्रेमी को आकर्षित कर रही हैं।
गुरु रविदास आश्रम काशी से जुड़े संत प्रकाशानंद ने इस आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अलग-अलग राज्यों के पशुपालक अपने क्षेत्र की नामचीन प्रजातियों को लेकर प्रतियोगिता में उतरे हैं। पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता, उनके शारीरिक गठन और स्वास्थ्य मानकों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जा रहा है। कई पशुपालक तो अपने इन अनमोल पशुओं को दो दिन पहले ही वाराणसी लेकर पहुंच गए थे ताकि वे माहौल के अनुकूल खुद को ढाल सकें।
"इस आयोजन के माध्यम से पशुपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का डेयरी फार्म इस समय देशभर के पशुपालकों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।" — संत प्रकाशानंद, रविदास मठ
अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग पर मंथन
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह के आयोजन का एक बड़ा अकादमिक पहलू भी है। बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और एनडीडीबी के निदेशक मंडल के सदस्य श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने डेरी सेवाओं और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और गहरा करने की बात कही। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का कृषि विज्ञान संस्थान और पशु चिकित्सा विज्ञान विभाग मिलकर इस दिशा में बड़े पैमाने पर शोध कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अकादमिक रिसर्च जमीनी स्तर के किसानों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकते। इस उत्सव के दौरान आयोजित कार्यशालाओं में वैज्ञानिकों ने पशुओं के संतुलित आहार, कृत्रिम गर्भाधान की आधुनिक तकनीकों और दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण पर विस्तार से जानकारी दी। युवाओं को कृषि स्टार्टअप्स और डेरी मैनेजमेंट के क्षेत्र में आगे आने के लिए भी प्रेरित किया गया ताकि वे लीक से हटकर नए रास्ते तलाश सकें।
प्रतियोगिता और पुरस्कारों के जरिए पशुपालकों का हौसला अफजाई
किसी भी मेले या उत्सव का रोमांच तब और बढ़ जाता है जब उसमें प्रतियोगिता और पुरस्कार शामिल हों। इस दो दिवसीय पशु मेले में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को सम्मानित करने की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतियोगिता के दौरान सर्वाधिक दूध देने वाले पशुओं और उनकी बेहतरीन नस्ल के आधार पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी।
विजेता पशुपालकों को नकद पुरस्कारों के साथ-साथ प्रशस्ति पत्र और विशेष प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि इस तरह की प्रतिस्पर्धा से पशुपालकों में अपने पशुओं की बेहतर देखभाल करने की प्रेरणा जागती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी पैदा होती है, जिससे अंततः देश के कुल दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है।
निष्कर्ष: ग्रामीण भारत की आर्थिक तरक्की की नई इबारत
वाराणसी के बीएचयू परिसर में आयोजित ‘रंगीलो ग्रामीण उत्सव 2026’ केवल एक पशु मेला भर नहीं है, बल्कि यह देश के ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। सरकार, सहकारिता संस्थाओं और विश्वविद्यालयों के इस साझा प्रयास से यह साफ जाहिर होता है कि आने वाले समय में पशुपालन सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में और भी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। किसानों के चेهرों पर दिख रही उम्मीद और उत्साह इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यदि सही तकनीक और मंच मिले, तो हमारे पशुपालक देश को दुग्ध उत्पादन के मामले में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।






