नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। पिछले कुछ दिनों से गूगल ट्रेंड्स पर 'जंतर-मंतर दिल्ली प्रोटेस्ट' विषय काफी तेजी से उभर रहा है, जिसके पीछे कई बड़े कारण हैं। सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस यानी सीजेपी संगठन ने एक बार फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संगठन के लोग जल्द ही दिल्ली पुलिस से मिलकर तारीख की मांग करने वाले हैं। हालांकि, दूसरी तरफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों और धरनों को लेकर नियमों में बदलाव और सुरक्षा के कड़े इंतजामों की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं।
राजधानी दिल्ली के इस प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम साफ देखे जा सकते हैं। जंतर-मंतर के आसपास पुलिस बल तैनात है और सुरक्षा से जुड़े कई तरह के दृश्य सामने आए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि देश की राजधानी में किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन अब बहुत ज्यादा सख्ती बरत रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ समय में जिस तरह के हालात बने हैं, उसके बाद से सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढील देने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।
33 साल पुराना इतिहास और अब नए नियमों की सुगबुगाहट
जंतर-मंतर का इतिहास बहुत पुराना और आंदोलनों से जुड़ा रहा है। आज से करीब 33 साल पहले सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस जगह को धरना-प्रदर्शन के लिए इजाजत दी थी। बीते तीन दशकों में इस ऐतिहासिक जमीन ने कई बड़े आंदोलनों को अपनी आंखों से देखा है। इसमें साल 2011 का चर्चित अन्ना आंदोलन हो या फिर देश का नाम रोशन करने वाले पहलवानों का जंतर-मंतर पर दिया गया धरना, हर बड़ा विरोध प्रदर्शन यहीं की जमीन से अपनी आवाज बुलंद कर चुका है। लेकिन अब प्रशासनिक स्तर पर हो रही चर्चाओं के बाद ऐसा लग रहा है कि इस ऐतिहासिक परंपरा पर विराम लग सकता है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और विश्लेषकों के अनुसार, सरकार और प्रशासन अब जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर दिल्ली में तीन नए स्थानों को तय करने पर विचार कर रहे हैं। खबर है कि भविष्य में दिल्ली के पारंपरिक जंतर-मंतर पर बड़े धरने और प्रदर्शन शायद देखने को न मिलें और इसके लिए शहर के बाहरी हिस्सों में नए स्थान पक्के किए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि वीआईपी इलाकों में यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर ये कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, आम जनता और सामाजिक संगठनों का एक बड़ा वर्ग इन नए नियमों को लेकर अपनी नाराजगी भी जता रहा है।
सीजेपी की नई रणनीति और पुलिस प्रशासन का रुख
दूसरी तरफ, सीजेपी जैसे संगठनों का कहना है कि अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। संगठन के सदस्यों का प्लान है कि वे दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात कर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए नए सिरे से बातचीत करेंगे। देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन उनकी इस मांग पर क्या फैसला लेता है क्योंकि हालिया सुरक्षा इंतजामों को देखकर यह साफ है कि अनुमति मिलना इतना आसान नहीं होगा। टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया पर भी इस बात पर लंबी बहस चल रही है कि क्या राजधानी में विरोध प्रदर्शन के अधिकारों का दायरा लगातार सीमित किया जा रहा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब जंतर-मंतर के आसपास के हालात का जायजा लिया, तो वहां आम दिनों के मुकाबले भारी पुलिस बल तैनात मिला। स्थानीय दुकानदारों और आसपास के लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और सुरक्षा बैरिकेडिंग की वजह से उनके रोजमर्रा के काम-धंधे पर भी असर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का तर्क है कि लोकतंत्र में विरोध जताने की जगह को शहर से दूर धकेलना सही नहीं है। कुल मिलाकर, जंतर-मंतर का यह नया विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है और इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।









