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देश के सबसे विकसित और साक्षर जिलों में शामिल हुआ झारखंड का रांची, शिक्षा और रोजगार में दर्ज की बड़ी सफलता

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार झारखंड की राजधानी रांची ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले शीर्ष 100 जिलों में अपनी मजबूत जगह बनाई है। शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण के मोर्चे पर रांची ने बेंगलुरु और कोयंबटूर जैसे महानगरों को कड़ी टक्कर दी है।
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21 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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देश के सबसे विकसित और साक्षर जिलों में शामिल हुआ झारखंड का रांची, शिक्षा और रोजगार में दर्ज की बड़ी सफलता
📷 देश के सबसे विकसित और साक्षर जिलों में शामिल हुआ झारखंड का रांची, शिक्षा और रोजगार में दर्ज की बड़ी सफलता — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • रांची देश के सर्वाधिक आबादी वाले 100 जिलों में शिक्षा, रोजगार और प्रशिक्षण के मामले में शीर्ष पायदानों पर शामिल हुआ है।
  • जिले में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के केवल 16.5 प्रतिशत युवा ही NEET यानी शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से वंचित हैं।
  • पश्चिमी सिंहभूम जिले ने राज्य में सबसे अधिक श्रमबल सहभागिता दर (68.3%) दर्ज कर नया मुकाम हासिल किया है।
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शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर रांची ने गाड़े सफलता के झंडे

झारखंड की राजधानी रांची ने देश भर में एक बार फिर अपनी शैक्षणिक और आर्थिक क्षमता का लोहा मनवाया है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) द्वारा जारी की गई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रांची देश के सबसे अधिक आबादी वाले उन चुनिंदा 100 जिलों में शुमार हो गया है, जहां पढ़ाई, काम या कौशल प्रशिक्षण से दूर रहने वाले युवाओं की संख्या बेहद कम है। इस शानदार उपलब्धि ने न केवल राज्य का मान बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि यहां के युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद जागरूक और सक्रिय हैं।

जारी की गई रिपोर्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिण भारत के बड़े महानगरों जैसे केरल के एर्नाकुलम, तमिलनाडु के कोयंबटूर और कर्नाटक के बेंगलुरु के ठीक बाद झारखंड के रांची जिले ने अपनी जगह बनाई है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि देश के शीर्ष महानगरों की सूची में रांची ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह सफलता झारखंड के युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणा स्रोत के रूप में सामने आई है, जो लगातार विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

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क्या है NEET दर और रांची का आंकड़ा?

सांख्यिकी संगठन की इस रिपोर्ट में एनईईटी (NEET - Not in Education, Employment, or Training) यानी ऐसे युवाओं की दर का आकलन किया गया है जो न तो किसी स्कूल-कॉलेज में पढ़ रहे हैं, न ही किसी नौकरी या रोजगार से जुड़े हैं और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस मामले में रांची का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, रांची में 15 से 29 वर्ष की आयु के महज 16.5 प्रतिशत युवा ही इस श्रेणी में आते हैं। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि इस आयु वर्ग की कुल आबादी का 83.5 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी रूप में शिक्षा, रोजगार या कौशल विकास से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। पूरे झारखंड राज्य की औसत स्थिति को देखें तो राज्य स्तर पर 79 प्रतिशत आबादी इस सकारात्मक दायरे में आती है, जबकि पूरे झारखंड में एनईईटी दर 21 प्रतिशत दर्ज की गई है।

पश्चिमी सिंहभूम और अन्य जिलों का चौंकाने वाला प्रदर्शन

रांची के अलावा झारखंड के अन्य जिलों ने भी श्रम बल और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रांची से भी बेहतर एनईईटी दर पश्चिमी सिंहभूम जिले की है, जहां यह दर महज 10.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, देश के सबसे अधिक आबादी वाले 100 जिलों की श्रेणी में रांची ने अपनी मजबूत आबादी और बड़े पैमाने पर उपलब्ध अवसरों के कारण विशिष्ट स्थान बनाया है।

इसके विपरीत, झारखंड के देवघर जिले में एनईईटी दर सबसे अधिक 32.4 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उन क्षेत्रों में युवाओं को शिक्षा और रोजगार के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अभी और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकार भविष्य की नीतियां तय कर सकती है ताकि पिछड़े जिलों की स्थिति में भी तेजी से सुधार किया जा सके.

श्रमबल और कार्यबल सहभागिता में पश्चिमी सिंहभूम सबसे आगे

झारखंड के भीतर जिलों की स्थिति का विश्लेषण करें तो पश्चिमी सिंहभूम ने कई मामलों में बाजी मारी है। इस जिले में सबसे अधिक श्रमबल सहभागिता दर (LFPR) 68.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके साथ ही कार्यबल सहभागिता दर (WPR) भी इसी जिले में सबसे अधिक 67.1 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है। महिलाओं की भागीदारी के मामले में भी पश्चिमी सिंहभूम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जहां महिला श्रमबल सहभागिता दर 55.7 प्रतिशत है। हालांकि, सबसे अधिक महिला कार्यबल सहभागिता दर का रिकॉर्ड गिरिडीह जिले (54.4 प्रतिशत) के नाम दर्ज हुआ है।

पूरे झारखंड राज्य की बात करें तो कुल श्रमबल सहभागिता दर 59.8 प्रतिशत और कार्यबल सहभागिता दर 58.2 प्रतिशत आंकी गई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ये आंकड़े राज्य के भीतर मजबूत हो रही आर्थिकी और श्रम बाजार में बढ़ती सक्रियता का स्पष्ट प्रमाण हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में लोग अब रोजगार के प्रति अधिक गंभीर नजर आ रहे हैं।

बेरोजगारी दर और बड़े महानगरों से रांची की तुलना

बेरोजगारी दर के मोर्चे पर भी झारखंड के विभिन्न जिलों में अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलती हैं। राज्य में पलामू जिला सबसे कम बेरोजगारी दर वाला जिला रहा, जहां यह दर मात्र 1.1 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, बोकारो जिले में बेरोजगारी दर सबसे अधिक 8.6 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई। पूरे झारखंड राज्य की औसत बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, और दिलचस्प बात यह है कि राजधानी रांची में भी बेरोजगारी दर ठीक इसी राष्ट्रीय और प्रांतीय औसत के आसपास ही बनी हुई है।

देश के शीर्ष 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों के व्यापक आकलन में तिरुवनंतपुरम, कोलकाता और बेंगलुरु शहरी जैसे क्षेत्रों ने 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में सबसे कम बेरोजगारी दर दिखाई है। इस मामले में रांची की स्थिति सीधे तौर पर देश के आईटी हब बेंगलुरु शहरी के लगभग समान स्तर पर खड़ी नजर आती है, जो रांची के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

"श्रम बल सर्वेक्षण के ये जिला स्तरीय आंकड़े न केवल हमारी नीतियों की सटीकता को परखने का अवसर देते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि राज्य के युवा अपनी आजीविका और शिक्षा को लेकर कितने संजीदा हैं। रांची और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों का प्रदर्शन यह साबित करता है कि सही दिशा में प्रयास करने से सकारात्मक बदलाव निश्चित रूप से आते हैं।"— श्रम नियोजन विशेषज्ञ, झारखंड सरकार

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा पहली बार जारी किए गए इन जिला स्तरीय अनुमानों ने झारखंड की तस्वीर को एक नए और सकारात्मक नजरिए से देश के सामने रखा है। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में रांची का देश के शीर्ष जिलों में शुमार होना यह बताता है कि आने वाले समय में यह शहर देश के प्रमुख बौद्धिक और आर्थिक केंद्रों में अपनी जगह और अधिक मजबूत करेगा। हालांकि जिन जिलों में अभी भी एनईईटी दर अधिक है या बेरोजगारी की चुनौती बनी हुई है, वहां स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक गति देने की आवश्यकता है ताकि पूरे राज्य का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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