लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन कोई सालाना मेला या शादी का रिसेप्शन नहीं होता कि लोग शहर की सीमा पर खाली मैदान तलाशें। विरोध का मूल मकसद ही यह होता है कि सत्ता के दरवाजे पर दस्तक दी जाए और हुक्मरानों को जनता की नाराजगी सुनाई दे। लेकिन हालिया प्रशासनिक फैसलों ने यह साफ कर दिया है कि देश की राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों का सबसे प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर अब इस भूमिका से बेदखल किया जा रहा है। विरोध-प्रदर्शनों के लिए तयशुदा जगहों की सूची से जंतर-मंतर को हटाने की कवायद असंतोष को सत्ता के गलियारों से दूर करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
बोट क्लब से जंतर-मंतर और अब बुराड़ी: असंतोष को दूर धकेलने का इतिहास
अगर इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई पहला मौका नहीं है जब विरोध की जगह को सत्ता के केंद्रों से दूर किया गया हो। 1990 के दशक से पहले राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रायसीना हिल्स के करीब बोट क्लब के लॉन हुआ करते थे। जब वहां की आवाजें हुक्मरानों को असहज करने लगीं, तो प्रदर्शनकारियों को धकेलकर जंतर-मंतर की सड़क पर भेज दिया गया। अब तीन दशक बाद, उसी असंतोष को शहर के सुदूर कोनों जैसे बुराड़ी या सीबीडी ग्राउंड की तरफ भेजने की तैयारी है।
- 1990 से पहले: संसद और मंत्रालयों के ठीक सामने बोट क्लब पर होता था सीधा संवाद।
- 1993 के बाद: प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित दायरे में रखकर जंतर-मंतर पर सीमित किया गया।
- वर्तमान स्थिति: राजधानी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शन स्थल तय कर असंतोष की गूंज को खत्म करने की कोशिश।
लालफीताशाही और प्रदर्शन के अधिकार की जटिलताएं
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए पहले से ही 10 दिन पूर्व पुलिस अनुमति और सीमित संख्या जैसी कड़ी शर्तें लागू थीं। लोकतंत्र में विरोध का जन्म तात्कालिक घटनाओं और जनआक्रोश से होता है, जिसे सरकारी फाइलों की मंजूरियों के अधीन बांधना व्यावहारिक नहीं है। अब जब इसे बुराड़ी जैसे सुदूर इलाकों में धकेला जा रहा है, तो सवाल यह है कि जनता अपनी शिकायत लेकर किसके पास जाएगी? संसद, मंत्रालयों और नीति-निर्माताओं के सामने अपनी बात रखे बिना दूरदराज के मैदानों में दिया गया धरना महज औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
शोर लोकतंत्र की खूबी है, कोई खामी नहीं
निसंदेह, नई दिल्ली के रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों की ट्रैफिक और ध्वनि प्रदूषण को लेकर वास्तविक समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन जीवंत लोकतंत्र स्वभाव से ही मुखर और जीवंत होता है। जब जनता के असंतोष को दबाने या उसे अनदेखा करने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ता है। जनता अपनी बात उस सत्ता तक पहुंचाना चाहती है जिससे उसकी नीतियां तय होती हैं, न कि किसी अनजान कोने में सिर्फ प्रतीकात्मक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।
राज्य एवं प्रादेशिक ब्यूरो, द फ्रीलांस
सत्यापित संपादकीय डेस्कउत्तर प्रदेश व प्रादेशिक विकास रिपोर्टिंग टीम
द फ्रीलांस का प्रादेशिक ब्यूरो उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के जमीनी मुद्दों, विकास योजनाओं, प्रशासनिक कार्रवाइयों और ग्रामीण-शहरी समस्याओं की निष्पक्ष और वास्तविक रिपोर्टिंग करता है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करना हुआ महंगा, रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक बुकिंग फुल और फीस भी लाख पार
अगली खबरजंतर-मंतर पर रोक के बाद अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, बोले- 'जहाँ बैठेंगे, वहीं बन जाएगी धरने की जगह'
संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

स्वास्थ्य मंत्री दाओ होंग लैन ने अंगदान करने वाले परिवारों को स्मृति पदक प्रदान किए। फोटो: स्वास्थ्य मंत्रालय।

Moradabad News: पीतलनगरी के हस्तशिल्प उत्पाद ने खरीदारों का खींचा ध्यान, निर्यातकों को नए बाजार की उम्मीद

मोहनलाल ने अजय देवगन की 'दृश्यम 3' की तारीफ की: बोले- मैं सच में इम्प्रेस हूं; फिल्म की कमाई 489.74 करोड़ र...

'धुरंधर' के लिए यामी गौतम को मिली थी मोटी फीस? एक्ट्रेस ने तोड़ी चु्प्पी
‘जंतर-मंतर’ व राज्य से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें
STATESदिल्ली में विरोध प्रदर्शन करना हुआ महंगा, रामलीला मैदान में अगले ढाई महीने तक बुकिंग फुल और फीस भी लाख पार
STATESजंतर-मंतर पर रोक के बाद अखिलेश यादव का बड़ा ऐलान, बोले- 'जहाँ बैठेंगे, वहीं बन जाएगी धरने की जगह'
STATESजंतर-मंतर अब नहीं रहा 'प्रोटेस्ट साइट', गृह मंत्रालय ने लिया बड़ा फैसला; इन 3 जगहों पर ही हो सकेगा आंदोलन
STATESवीडियो: संसद से सड़क तक संग्राम, जंतर-मंतर बैन और 'वोट चोरी' के खिलाफ INDIA ब्लॉक की रणनीति तेज
STATESजंतर-मंतर बनेगा इतिहास? छात्र आंदोलनों से शुरू हुई इस जगह को धरना स्थलों की सूची से हटाने की तैयारी
STATESवीडियो: जंतर-मंतर प्रदर्शन से जोड़कर वायरल किया गया खाकी वर्दियों का यह वीडियो, जानें क्या है इसकी पूरी सच्चाई
STATESजंतर-मंतर पर बैन के बाद अब यहां होंगे बड़े प्रदर्शन, जानिए नए धरना स्थलों की राजधानी से दूरी और इतिहास
STATES