लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के सांसदों और विपक्षी नेताओं ने राजधानी दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए ये नेता जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। हालांकि, सुरक्षा कारणों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया, जिसके बाद वहां भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि वे मार्च रोक सकते हैं और बैठकों से इनकार कर सकते हैं, लेकिन वे देश की जनता और विपक्षी नेताओं की इच्छाशक्ति को कभी नहीं झुका सकते।
संविधान की कॉपी के साथ सड़क पर बैठीं प्रियंका गांधी
जंतर-मंतर से करीब एक किलोमीटर पहले अशोक रोड पर शांगरी-ला होटल के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा घेरा लगाकर बसों को आगे बढ़ने से रोका गया, जिसके बाद नेता बसों से उतरकर सड़कों पर आ गए। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपने हाथ में संविधान की एक कॉपी लेकर सड़क पर धरने पर बैठ गईं। इस दौरान विपक्षी दलों के कई अन्य सांसद और नेता भी सरकार विरोधी नारे लगाते नजर आए।
हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बढ़ने के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें मध्य दिल्ली के एक पुलिस थाने ले जाया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
इससे पहले अपने बयानों में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ता पक्ष के इशारे पर काम कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि विपक्ष जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस तानाशाही रवैये के खिलाफ डटकर मुकाबला करता रहेगा।
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