उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर अब पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की कड़ी जांच के बाद दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए गए हैं। इसके बाद अब चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 8 और समाजवादी पार्टी (सपा) के 2 उम्मीदवार ही शेष बचे हैं।
क्यों खारिज हुए निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे?
मिली जानकारी के अनुसार, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, जब निर्वाचन अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच की, तो दोनों के पर्चे में जरूरी प्रस्तावक संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं पाई गईं।
नियमों के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव में किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायकों के प्रस्तावक हस्ताक्षर होना अनिवार्य होता है। ये दोनों ही उम्मीदवार इस जरूरी शर्त को पूरा करने में असफल रहे। परिणाम यह हुआ कि नामांकन की जांच प्रक्रिया के दौरान ही दोनों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई।
बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार मैदान में
इन दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के बाहर होने के बाद अब मैदान में कुल उम्मीदवारों की संख्या घटकर सीटों की संख्या यानी 10 के बराबर आ गई है। वर्तमान स्थिति के अनुसार, बीजेपी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं। यदि नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद भी यही स्थिति बनी रहती है, तो इन सभी 10 सीटों पर चुनाव के लिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे।
अब राजनीतिक गलियारों की निगाहें नाम वापसी की अंतिम तिथि पर टिकी हुई हैं। इस दिन के बाद ही साफ हो पाएगा कि क्या सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित होते हैं या फिर कोई नया समीकरण सामने आता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और राजनीतिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह रिपोर्ट वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम पर आधारित है। साभार: संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स।









