कानून के रखवाले जब खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने लगें, तो अंजाम क्या होता है—इसकी एक बानोगी राजस्थान में देखने को मिली है। महिला बंदियों को जेल के नियमों को ताक पर रखकर अपने घर पर काम कराने के मामले में एक पूर्व महिला जेलर की गिरफ्तारी ने हर किसी को हैरान कर दिया है। सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जेल में वह कभी अधिकारी हुआ करती थीं, आज उसी जेल में वह एक कैदी के रूप में सलाखों के पीछे हैं।
जेल से घर और फिर सफाई का काम
यह पूरा मामला कुछ महीने पहले सामने आया था जब केंद्रीय कारागृह से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही और पद के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि तत्कालीन प्रभारी जेलर दिव्या चौधरी ने महिला प्रहरी सोनिया की मदद से दो निरुद्ध महिला बंदियों को अवैध रूप से जेल से बाहर निकाला। जेल के अन्य कर्मचारियों द्वारा इसका विरोध भी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद दोनों महिलाओं को जेलर के निजी आवास तक ले जाया गया।
पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि इन महिला बंदियों से वहां घरेलू काम और साफ-सफाई कराई जाती थी। मामला तूल पकड़ने के बाद जेल अधीक्षक की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद से ही आरोपी जेलर फरार चल रही थीं। पुलिस और खुफिया तंत्र लगातार उनकी तलाश में जुटे थे।
फरार चल रही पूर्व जेलर को कोटा से दबोचा
गिरफ्तारी से बचने के लिए दिव्या चौधरी लगातार अपनी ठिकाने बदल रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों की देखरेख में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस आखिरकार उनके ठिकाने तक पहुंचने में कामयाब रही।
पुलिस को सुराग मिला कि वह कोटा के एक आवासीय फ्लैट में छिपी हुई हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर उन्हें धर दबोचा। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है और सह-आरोपी महिला प्रहरी समेत अन्य संलिप्त लोगों की तलाश जारी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न रिपोर्ट्स पर सामने आए इस मामले के तथ्यों की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से समीक्षा करता है। यह प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से जुड़ा एक संवेदनशील मामला है। साभार: संबंधित पुलिस प्रशासन एवं मीडिया रिपोर्ट्स।









