उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बहुचर्चित '80-20' वाले बयान पर राज्य की राजनीति गर्मा गई है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस बयान पर कड़ा पलटवार करते हुए तीखा हमला बोला है. पार्टी के मध्य उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को ऐसी भाषा या आंकड़ेबाजी शोभा नहीं देती है.
संवैधानिक पद और '100% जनता' का मुद्दा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश की राजनीति में '80-20 की लड़ाई' का जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने 80 फीसदी को एनडीए और 20 फीसदी को विपक्षी गठबंधन के 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले से जोड़ा था. इस पर आपत्ति जताते हुए शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद पूरे प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए उन्हें केवल 80 फीसदी की नहीं बल्कि 100 फीसदी जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि 20 फीसदी आबादी को दरकिनार कर सिर्फ 80 फीसदी की राजनीति करना देश के संविधान की मूल भावना के अनुकूल नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि 20 फीसदी आबादी भी इसी देश का अहम हिस्सा है और देश की स्वतंत्रता संग्राम में सभी वर्गों ने मिलकर अंग्रेजों का सामना किया था.
बुलडोजर कार्रवाई और राजनीतिक फायदे के आरोप
AIMIM नेता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ 20 फीसदी आबादी की उपेक्षा की जा रही है, तो दूसरी तरफ उनकी संपत्तियों और धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर कार्रवाई जैसी नीतियां अपनाई जा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि चुनाव नजदीक आते ही इस तरह की बयानबाजी के जरिए राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट साधने की कोशिश की जाती है.
राजनीतिक गलियारों में इस बयान के बाद से लगातार बयानबाजी का दौर जारी है. विपक्षी दलों का मानना है कि इस तरह के बयानों से सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ता है, वहीं शासक दल का तर्क है कि यह जनता के मूड और विकास कार्यों के समर्थन को दर्शाता है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और राजनीतिक बयानों पर आधारित इस रिपोर्ट के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है. यह विषय राजनीतिक चर्चा और बहसों का हिस्सा बना हुआ है. सामग्री साभार: संबंधित राजनीतिक बयान और मीडिया रिपोर्ट्स।










