भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में ऐतिहासिक उछाल
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट के लिए सितंबर का महीना बेहद शानदार और रिकॉर्डतोड़ साबित हुआ है। देश भर के घरेलू बाजार में विभिन्न ऑटो कंपनियों ने मिलकर इस महीने 35 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री दर्ज की है। आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में ऑल-इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की कुल बिक्री 35,048 यूनिट्स तक पहुंच गई है। यदि पिछले साल इसी अवधि से तुलना की जाए, तो यह सालाना आधार पर लगभग 95.4 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़त को दर्शाता है। पिछले साल सितंबर महीने में सभी कंपनियों की कुल बिक्री 17,932 यूनिट्स पर सिमट कर रह गई थी।
मासिक आधार पर भी इस सेक्टर में लगातार सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल रही है। अगस्त महीने की तुलना में सितंबर में बिक्री में 10.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि अगस्त में इस सेगमेंट की कुल बिक्री 31,769 यूनिट्स दर्ज की गई थी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि त्योहारी सीजन की शुरुआत और ग्राहकों का इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ तेजी से झुकाव इस रिकॉर्ड बिक्री का सबसे बड़ा कारण है। विशेष रूप से शीर्ष तीन सबसे ज्यादा बिकने वाले ब्रांड्स ने अकेले ही इस अवधि के दौरान 27,816 कारें बेचकर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है।
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टाटा मोटर्स और महिंद्रा का दबदबा बरकरार
घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में टाटा मोटर्स अपनी लीडरशिप पोजीशन को बनाए रखने में पूरी तरह कामयाब रही है। कंपनी ने सितंबर महीने में कुल 14,792 इलेक्ट्रिक कारें बेची हैं, जो पिछले साल इसी महीने के मुकाबले 100.7 प्रतिशत अधिक हैं। पिछले साल सितंबर में टाटा ने 7,369 गाड़ियां बेची थीं। मासिक आधार पर भी कंपनी ने 7 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है, क्योंकि अगस्त में उसने 13,825 यूनिट्स बेची थीं। वर्तमान में भारतीय इलेक्ट्रिक कार बाजार में टाटा मोटर्स का कुल मार्केट शेयर 42.2 प्रतिशत है, जो इसे इस सेगमेंट का undisputed किंग बनाता है।
दूसरी तरफ, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने भी इस सेगमेंट में अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है और वह दूसरे पायदान पर मजबूती से काबिज है। महिंद्रा ने सितंबर के दौरान बाजार में 7,782 इलेक्ट्रिक कारें बेचीं। कंपनी की सालाना ग्रोथ 95.9 प्रतिशत दर्ज की गई है, क्योंकि पिछले साल सितंबर में उसने 3,973 गाड़ियां बेची थीं। महिंद्रा की मासिक बिक्री में भी 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में महिंद्रा की बॉर्न इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री का आंकड़ा 1 लाख के बड़े माइलस्टोन को पार कर चुका है, जो कंपनी की तकनीकी सफलता को बयां करता है।
जेएसडब्लू-एमजी और विनफास्ट का शानदार प्रदर्शन
शीर्ष दो कंपनियों के बाद, जेएसडब्लू-एमजी (JSW-MG) ने बाजार में अपना तीसरा स्थान सुरक्षित रखा है। कंपनी ने सितंबर महीने में कुल 5,242 इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की है। पिछले साल सितंबर 2025 में कंपनी ने 4,803 गाड़ियां बेची थीं, जिससे इसकी सालाना ग्रोथ 9.1 प्रतिशत रही है। जेएसडब्लू-एमजी अपनी किफायती और आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियों के दम पर लगातार ग्राहकों को लुभा रही है।
चौथे पायदान पर विनफास्ट (VinFast) जैसी नई कंपनी ने सबको हैरान करते हुए अपनी गहरी पैठ बना ली है। कंपनी ने सितंबर 2026 में 2,964 इलेक्ट्रिक कारें बेची हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल सितंबर में इस कंपनी ने केवल 6 कारों की बिक्री की थी। इस प्रकार की विस्फोटक वृद्धि यह साबित करती है कि भारतीय उपभोक्ता अब नए और ग्लोबल ब्रांड्स को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
किआ मोटर्स की धमाकेदार एंट्री और मारुति सुजुकी को झटका
इस महीने के आंकड़ों में सबसे बड़ा उलटफेर किआ मोटर्स (Kia Motors) की तरफ से देखने को मिला है। नई सिरोस ईवी (Syros EV) की सफल लॉन्चिंग के बाद किआ ने छलांग लगाते हुए पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। कंपनी ने सितंबर 2026 में 1,263 इलेक्ट्रिक कारें बेची हैं, जिससे उसकी बिक्री में 111.2 प्रतिशत की शानदार सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है। पिछले साल इसी महीने में किआ ने केवल 598 इलेक्ट्रिक कारें बेची थीं। नई मास-मार्केट ईवी आने से कंपनी को इसका सीधा फायदा मिला है।
दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इस दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है और वह टॉप-5 की सूची से बाहर होकर छठे स्थान पर खिसक गई है। सितंबर महीने में मारुति ने केवल 1,104 इलेक्ट्रिक वाहन ही बेचे। बाजार जानकारों का कहना है कि किआ और मारुति के बीच का अंतर केवल कुछ ही यूनिट्स का है, लेकिन किआ की आक्रामक रणनीति और नए पोर्टफोलियो ने इस बार बाजी अपने नाम कर ली है।
"भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार अब पूरी तरह से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है। ग्राहकों की बढ़ती मांग और नए मॉडल्स की लॉन्चिंग से आने वाले महीनों में यह मुकाबला और भी ज्यादा रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।" — ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट, द फ्रीलांस
भविष्य की राह और उपभोक्ताओं के लिए नए विकल्प
इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में जिस प्रकार से नए और किफायती विकल्प आ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। टाटा, महिंद्रा, किआ और अन्य कंपनियों के बीच छिड़ी इस रेस का सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर आम ग्राहकों को मिल रहा है। ग्राहकों को अब लंबी रेंज, आधुनिक फीचर्स और बेहतर सेफ्टी रेटिंग वाली गाड़ियां किफायती दामों पर मिल रही हैं। मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों को भी अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा ताकि वे इस तेजी से बदलते बाजार में अपनी खोई हुई जमीन वापस पा सकें।








